वाराणसी। शाकाहारी भोजन को सेहत के लिए बेहतर माना जाता है, लेकिन एक ताज़ा अध्ययन ने इस धारणा के बीच एक अहम सवाल खड़ा किया है। शोध में पाया गया है कि शाकाहारी लोगों में विटामिन बी-12 की कमी व्यापक रूप से देखी जा रही है, जिससे भूलने की समस्या, चिड़चिड़ापन, नसों की कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं बढ़ रही हैं।
यह अध्ययन आईएमएएस, बीएचयू में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया गया। न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि शाकाहारियों में बी-12 की कमी का जोखिम अधिक पाया गया है।
क्यों अहम है विटामिन बी-12?
विटामिन बी-12 तंत्रिका तंत्र के सुचारु संचालन, रक्त निर्माण और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में इसकी सामान्य मात्रा 200 से 900 पिको ग्राम प्रति मिलीलीटर होनी चाहिए। जांच में बड़ी संख्या में मरीजों में इसका स्तर 200 से कम पाया गया।
शोध के मुताबिक लगभग 25% मरीजों में बी-12 की कमी दर्ज की गई। इनमें से कई मरीजों में याददाश्त कमजोर होना, थकान, एनीमिया, हाथ-पैरों में झनझनाहट और मानसिक अस्थिरता जैसे लक्षण विकसित हो चुके थे।
मुख्य स्रोत क्या हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन बी-12 मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
- गोश्त (मांस)
- मछली
- अंडा
- दूध और दुग्ध उत्पाद
डॉक्टरों के अनुसार, गोश्त बी-12 का सबसे समृद्ध और प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। शाकाहारी आहार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता नहीं होती, इसलिए लंबे समय तक पूर्ण शाकाहार अपनाने वाले लोगों में कमी की संभावना बढ़ जाती है।
शाकाहार बनाम मांसाहार की बहस
भारत में शाकाहार बनाम मांसाहार की बहस लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहस भावनात्मक या वैचारिक स्तर पर नहीं, बल्कि पोषण विज्ञान के आधार पर होनी चाहिए।
डॉक्टरों का सुझाव है कि यदि कोई व्यक्ति पूर्ण शाकाहारी है, तो उसे नियमित रूप से बी-12 की जांच करानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर सप्लीमेंट या फोर्टिफाइड फूड का सेवन करना चाहिए।
क्या करें?
- नियमित ब्लड टेस्ट कराएं।
- डॉक्टर की सलाह से बी-12 सप्लीमेंट लें।
- यदि संभव हो तो आहार में बी-12 युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
विटामिन बी-12 का मुख्य स्रोत गोश्त ही है जिसकी कमी शरीर में बहुत-सी दिक्कतें पैदा करती है। शाकाहार बनाम मांसाहार की बहस में इस बिन्दु को ध्यान में रखना ज़रूरी है। -शमीम उद्दीन अंसारी


