तारा ने दिल्ली के जज के रूप में जिस इक़बाल का नाम लिया, वो शख्स आखिर है कौन?

Shailesh Singh : झारखण्ड के बहुचर्चित तथाकथित “लव जेहाद” मामले के बारे में आपने जरूर पढ़ा-सुना होगा. इसमें आरोपी रक़ीबुल @ रंजीत के जुडिशरी नेक्सस के बारे में उसकी पत्नी तारा ने गंभीर आरोप लगाये हैं. इन आरोपों में सबसे गंभीर बात है- “दिल्ली के एक जज, जिनका नाम शायद इक़बाल है”. इस आरोप की गंभीरता के बारे में मैं आगे बता रहा हूँ, पहले आप www.bhadas4media.com पर प्रकाशित इस पोस्ट- खबर को पढ़ लें, क्लिक करें… http://goo.gl/9nfj8o

झारखण्ड उच्च न्यायालय के एक जज जो चेन्नई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश रहने के बाद अभी सर्वोच्च न्यायालय के जज हैं, का नाम भी इत्तेफ़ाक़(!) से यही है. ये मूल रूप से झारखण्ड के ही रहने वाले हैं. इसलिए, हो न हो ये वही हैं, जनमानस के मन में ऐसा संदेह पैदा होना स्वाभाविक है. तारा के बयान के बावजूद झारखण्ड के हर अख़बार ने (जान-बूझकर) इस पहलू को अभी तक इग्नोर ही किया है.

न्यायिक सेवा के छोटे अधिकारियों का नाम तो अखबार रोज छाप रहे हैं, लेकिन वो इक़बाल शब्द से ही डर रहे हैं. हो सकता है ये वाले इक़बाल कोई और हों, लेकिन सर्वोच्च न्यायपालिका की स्वच्छता और पारदर्शिता के लिए ये साफ़ होना जरूरी है, कि ये वाले इक़बाल आखिर कहाँ के जज हैं! लेकिन अगर ये वही हैं, और इस मामले में सबों ने जिस तरह की चुप्पी साध ली है, तो पुरे मामले की जाँच क्या होगी और पीड़िता को किस प्रकार का न्याय मिलेगा, इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है. अगर कोई राष्ट्रीय अखबार इतना ही लिख दे कि तारा ने दिल्ली के जज के रूप में जिस इक़बाल का नाम लिया है, आखिर वो शख्स है कौन? तो शायद इस एक खबर से ही जाँच को दिशा और गति मिल जाये! मुझे भरोसा है की आप मामले की गंभीरता को समझते हुए आगे जो जरूरी है, करेंगे.

रामगढ़ (झारखंड) के आरटीआई एक्टिविस्ट शैलेष सिंह के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “तारा ने दिल्ली के जज के रूप में जिस इक़बाल का नाम लिया, वो शख्स आखिर है कौन?

  • आरोपी रक़ीबुल @ रंजीत के जुडिशरी नेक्सस के बारे में उसकी पत्नी तारा ने गंभीर आरोप लगाये हैं. इन आरोपों में सबसे गंभीर बात है- “दिल्ली के एक जज, जिनका नाम शायद इक़बाल है”.
    आई एम् डेम स्योर यह वही जज है इसी के दम पर रांची हाईकोर्ट की एक महिला वकील मनचाहा आडर्र दिलवाने का काम किया करती थी जो बाद में एक स्टिंग आपरेशन फंस कर अपनी वकालत गँवा बैठी .लेकिन जज साहब की रंगदारी चलती रही .

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