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यूट्यूब खबरिया चैनलों की बाढ़, जहां देखो डंडे पर माईक लगाकर मीडिया वाले बने बैठे हैं…

प्रदीप महाजन

फर्जी चैनलों की बाढ़, सरकारी अंकुश नहीं, शातिर मालिक सैलरी नहीं देते… यूट्यूब खबरिया चैनलों की बाढ़ आई हुई है, जहा देखो डंडे पर माईक का डंडा लगाकर कथित शातिर मालिक जनता, सरकार, पुलिस प्रशासन को बेवकूफ बना रहे हैं… हालांकि सरकार ने इन्हें किसी तरह की परमिशन नहीं दी हुई है लेकिन फिर भी अपने आप को किसी से कम नही समझ रहे हैं…

कई कथित इन अवैध चैनल वालों ने युवाओ को भर्ती किया हुआ है जिन्हें तनख्वाह तो छोड़िए, उनसे उल्टा खबर दिखाने के नाम से पैसे ऐंठ लेते हैं… जिनका शोषण हो रहा है वो भी खुश है क्योंकि तनख्वाह ना मिले, लेकिन खाने-पीने को तो मिल ही जाता है.. दिल्ली पुलिस मुख्यालय के पुलिस अधिकारी क्या, प्रशासनिक अधिकारी क्या, सभी इन डंडे वाले माइकों से परेशान हैं…

गौरतलब है कि पुलिस, प्रशासन, नेताओं के आसपास मंडराने वाले इन फर्जी चैनलों के शातिर मालिक अपने निजी स्वार्थों के लिये डंडा वाला माईक लिये खड़े रहते हैं जिनकी विश्वसनीय हमेशा संदिग्ध रहती है.. बेचारे इन कथित चैनलों के कैमरामैनों ओर रिपोर्टरों का जमकर शोषण होता है… मानक स्तर की तनख्वाह तो छोड़िए, अगर उनको वाजिब खर्च भी मिल जाए तो राम राम कहिये. हां यहां कुछ यू ट्यूब चैनलों ने जरूर अपनी साख और विश्वनीयता बनाई है जिनकी खबरों में चापलूसी या बिकाउपन नहीं मिलता, उनको मेरा साधुवाद है…

सरकार से गुजारिश है कि इस दिशा में कदम उठायें ओर कोई पालिसी लेकर आयें नहीं तो 500 रुपये का डोमेन बुक कर और एक यूट्यूब चैनल बनाकर ही डंडे वाला माइक चलने ही नहीं बल्कि दौड़ने लगेगा… जैसा कि आजकल हर ओर दिखने भी लगा है.

लेखक प्रदीप महाजन दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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