‘झा-झा गैंग’ बनाकर मलाई जीम रहे शिवपूजन, ‘जी पुरवैया’ चले या भाड़ में जाए

जी पुरवैया न्यूज़ में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शिवपूजन झा की  तानाशाही और मनमानी की वजह से एचआर की नौकरी गयी, वजह यह है की शिवपूजन झा यहाँ पर अपनी मर्जी से जो चाहे कर रहे थे। चाहे किसी की नौकरी हो या किसी का इन्क्रीमेंट या किसी का प्रमोशन तक, एचआर को झूठ सच बताकर करवाते रहे। आखिरकार जी मीडिया में बैठे उच्च अधिकारियों की नींद टूटी और जांच कर आनन फानन में कार्रवाई कर दी।

शिवपूजन झा पिछले साल जनवरी से जी पुरवैया में काम कर रहे हैं। करीब डेढ़ साल के बाद भी इन्होंने यहाँ काम करने का कोई सिस्टम ईजाद नहीं किया। सिर्फ अपनी मनमानी करते रहे और अपना ‘झा-झा गैंग’ बनाया। शाम की पार्टी के इंतज़ाम में लगे रहे। साथ ही पटना में जहां इनका निजी मकान बन रहा, उसकी प्लानिंग में लगे रहे और अपने पद का दुरूपयोग करते हुए इंतज़ाम करने में व्यस्त रहते हैं। 

ऑफिस के काम का कोई भी निर्णय शाम की पार्टी के दौरान लिए जाते रहे हैं जहां पार्टी के साजोसामान इनके ऑफिस के विश्वस्त चाटुकार जुटाते रहते थे…..कारण नौकरी करनी है तो झा नाम केवलम करना होगा ……तभी तो शिवपूजन के कारनामों से आजिज आकर जी मीडिया प्रबंधन हरकत में आया और दिल्ली से आये एच आर यहाँ पर कई दिनों से कैंप किये हुए हैं और सिस्टम सुधारने की कवायद में जुटे हैं। अब तो न्यूज़ रूम का माहौल यह है कि सब लोग एक दूसरे से बात करने में भी कतराते हैं। कब मुंह से क्या निकल जाए और कौन जाकर शिवपूजन झा को बोल दे और फिर नौकरी खतरे में पड़ जाए। यहाँ पर काम करने वाले काफी डरे और सहमे हुए हैं और मना रहे कि कोई तो उनकी सुन ले।

जबसे इन्क्रीमेंट आया है शिवपूजन झा न्यूज़ रूम में धमकी देते फिर रहे हैं कि लोग काम नहीं कर रहे हैं, उनको तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा जबकि शिवपूजन झा के आदमी ही यहाँ पर काम नहीं कर रहे हैं. उन लोगों को बहुत आजादी है. यहाँ पर वो लोग ड्यूटी समय भी आराम से घूमते हैं. जब से झारखण्ड चुनाव की घोषणा हुई थी उसके बाद से यहाँ कोई न्यूज़ रूम मीटिंग हुई ही नहीं.  यहाँ पर इन्क्रीमेंट और इंसेंटिव शिवपूजन झा के मर्जी पर हुआ और उनका रिकॉर्ड भी उनकी मर्जी से भरा गया. यहाँ पर इन्क्रीमेंट और इंसेंटिव शिवपूजन झा के मर्जी पर हुआ और उन्होंने अपने लिए काम करने वालों पर कृपा बरसाई। यहाँ पुरवैया में रहना है तो शिव पूजन झा को ऑफिस की हर खबर देनी होगी नहीं तो खैर नहीं.  कौन किसके खिलाफ बोल रहा है, कौन उनकी बात की अवहेलना कर रहा है. ऑफिस में गन्दी राजनीति की वजह से आउटपुट डेस्क से प्रभात पाण्डेय भी इस्तीफा देकर वापस दिल्ली चला. अब एंकर सैयद भी शिवपूजन कीकरतूतो को उजागर कर ज़ी मीडिया दिल्ली ट्रांसफर करवा रहा है.

शिवपूजन झा जी पुरवैया पटना को झा झा एक्सप्रेस बना दिए हैं. शिवपूजन झा के रत्न हैं धीरज ठाकुर (मैथिल ब्राह्मण). दूसरे व्यक्ति हैं प्रमोद झा. एक हैं अमित झा. दिल्ली से आये सुमित झा भी झा टोली में शामिल हो गए हैं. आदित्य झा मधुबनी में स्ट्रिंगर थे. उसके बाद पटना में ANI में थे. फिर अचानक से यहाँ पर आ गए. वो भी मोटी सैलरी लेकर गेस्ट कोआर्डिनेशन में. विजय मिश्रा अपने आपको शिवपूजन झा का भाई बता कर अपनी मार्केटिंग कर रहा है. अभिषेक झा आये थे रिसर्च हेड बनकर. अभी तक अपना यहां पर काम ही तलाश रहे हैं.

पुरवैया न्यूज़ में अभी हाल में जो इन्क्रीमेंट का लेटर आया है उसमें चुन चुन कर लोगों को गलत आंका गया है क्योकि वो झा साहेब के आने से पहले से नियुक्त हुए थे.  कुछ रिपोर्टर हैं जो समझौता कर लिए हैं. झा साहेब से उनका ठीक चल रहा है. पटना ऑफिस में आठ रिपोर्टर है जिसमे चन्दन झा, अमित झा, साकेत कुमार, आनंद अमृत राज, ब्रिजम पाण्डेय, आशुतोष चन्द्र, रूपेंद्र श्रीवास्तव और अमित कुमार. क्या सभी का प्रदर्शन ठीक है. शिवपूजन झा के समय जितनी नियुक्ति हुई है, उसकी भी जांच होनी चाहिए. जी मीडिया ज्यादा संसाधन देने के बाद भी बिहार झारखण्ड में नंबर 1 नहीं बन पाया है. जी मीडिया के बाकी रीजनल चैनल नंबर १ बन गए हैं, लेकिन पुरवैया नहीं. क्योंकि यहाँ पर शिवपूजन झा की वैसी कोई मंशा है ही नहीं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित 



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Comments on “‘झा-झा गैंग’ बनाकर मलाई जीम रहे शिवपूजन, ‘जी पुरवैया’ चले या भाड़ में जाए

  • shiv pujan ke baare me jo likha hai sahi likha hai….ye aadmi is pad ke laayak nahi hai…..isse to kahi bhi nokri nahi milni chahiye……..isne mere saath bhi kaafi galat kiya……saala mere paise kha gaya……kutta

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