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पार्टी वर्कर और नेताओं के चिंटू बने पत्रकार, सूचना विभाग हलकान

: प्रॉपर्टी डीलर, साइकिल स्‍टैंड चलाने वाले भी बन गए हैं मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार : लखनऊ। खबरचियों की भीड़ से इस समय सूचना विभाग के अदना से आला अधिकारी खासे हलकान है। हो भी क्यों न जब पार्टी वर्कर से लेकर टर्नर, फिटर और आटोलिफ्टर तक विभाग से मान्यता पा गए हों या फिर विभाग की ही संस्तुति पर सचिवालय प्रवेश पत्र पाने में सफल हो गए हों। सूचना विभाग से जुड़े एनेक्सी में बैठने वाले आला अफसरों की मजबूरी यह है कि वे खुलकर इनसे कुछ कह भी नहीं कह सकते। क्योंकि हर कलमनवीस पत्रकार बाद में पहले सत्तारूढ़ दल के किसी प्रभावशाली नेता का चिंटू है या फिर वह उसकी किचन कैबिनेट का सक्रिय सदस्य है।

: प्रॉपर्टी डीलर, साइकिल स्‍टैंड चलाने वाले भी बन गए हैं मान्‍यता प्राप्‍त पत्रकार : लखनऊ। खबरचियों की भीड़ से इस समय सूचना विभाग के अदना से आला अधिकारी खासे हलकान है। हो भी क्यों न जब पार्टी वर्कर से लेकर टर्नर, फिटर और आटोलिफ्टर तक विभाग से मान्यता पा गए हों या फिर विभाग की ही संस्तुति पर सचिवालय प्रवेश पत्र पाने में सफल हो गए हों। सूचना विभाग से जुड़े एनेक्सी में बैठने वाले आला अफसरों की मजबूरी यह है कि वे खुलकर इनसे कुछ कह भी नहीं कह सकते। क्योंकि हर कलमनवीस पत्रकार बाद में पहले सत्तारूढ़ दल के किसी प्रभावशाली नेता का चिंटू है या फिर वह उसकी किचन कैबिनेट का सक्रिय सदस्य है।

मुख्‍यमंत्री के सूचना परिसर से लेकर मीडिया सेंटर में बैठने वाले अदना से आला अधिकारी ऐसे लोगों से पनाह मांग गए हैं। अधिकारी के आने की आहट से सक्रिय हो जाने वाले यह तथाकथित कलमनवीस एनेक्सी के पोर्टिकों से ही चहलकदमी करने लगते हैं और अधिकारियों के कमरे में प्रवेश करने के साथ स्वयं भी प्रवेश कर जाते हैं। इनमें कई महिला पत्रकार भी शामिल हैं, जिनका लिखने पढऩे से ज्यादा विश्वास एनेक्सी के भूतल से लेकर पंचम तल बैठने वाले अधिकारियों की चंपूगीरी करने में ज्यादा है। 

यह मानने में गुरेज नहीं होना चाहिए कि अधिकारियों की विनम्रता और सहजता का ये तथाकथित कलमनवीस अनुचित फायदा ले रहे हैं। विभाग के आला अधिकारी की माने तो वे स्वयं इस तरह के कलमनवीसों से परेशान हैं, जो उनके आने से पहले ही उनके कार्यालय पहुंच जाते हैं और तब तक दही की तरह जमे रहते हैं, जब कोई दूसरा अधिकारी न आ जाए या संबंधित अधिकारी स्वयं  न उठकर चलने लगे। 

बात यहीं नहीं खत्म होती जब से एनेक्सी के मीडिया सेंटर में होम की ब्रीफिग और सीएम या सीएस की प्रेस कांफ्रेस आयोजित होने लगी है, तब से इस तरह के फट्टेबाज कलमनवीसों की उम्‍मीदों में मानो पंख लग गए हैं। ब्रीफिंग या कांफ्रेस खत्म होने के बाद अधिकारियों की चंपूगीरी से मुक्ति पाते हैं तो अपने ही मोबाइल से फोटो खींचकर शाम तक फेसबुक पर पोस्ट कर देते हैं। ऐसा अक्सर वही लोग कर रहे हैं, जिनके सामने पहचान का संकट है। मान्यता होने और सचिवालय प्रवेश पत्र होने के बाद भी दर्जनों लोग ऐसे हैं, जो लिखने पढऩे से ज्यादा अधिकारियों की चंपूगीरी करके अपनी पहचान बनाए हुए हैं या बना रहे हैं। 

बाढ़ के पानी की तरह बढ़ रही पत्रकारों की भीड़ को नियंत्रित कर पाना सूचना विभाग के बूते के बाहर हो रहा है। राजभवन  में शपथ  समारोह या फिर अन्य कोई सरकारी आयोजन, मान्यता होने के बाद सभी वहां जाने की पात्रता रखते हैं, लेकिन सीमित स्थान होने के कारण विभाग सेलेक्टेड लोगों को प्रवेश दिला पाता है। ऐसे में फट्टेबाज कलमनवीस विभाग के अधिकारियों के लिए मुसीबत का सबब बनते हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों विधानसभा सत्र कवरेज करने वाले पत्रकारों की बढ़ती भीड़ और उनकी कारगुजारी पर पिछले बजट सत्र में विधानसभा सचिवालय ने तब सख्‍त रूख अपनाया जब सत्र की कार्यवाही के दौरान मोबाइल से क्लीपिंग बना रहे तीन लोगों का प्रवेश ही नहीं प्रतिबंधित किया गया बल्कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले तीनों पत्रकारों के नाम हर प्रवेश द्वार पर लगाए गए। इन तीन में एक मान्यता प्राप्त पत्रकार भी शामिल था। 

लखनऊ से संचालित दैनिक में प्रकाशित खबर. 

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