पत्रकारिता से ‘आज तक’ का भी बस नाम मात्र का ही लेना-देना बचा है

-Amitaabh Srivastava-

आप क्रोनोलॉजी समझिये। आजतक के शो दंगल में बैठे हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास और आरएसएस के विचारक अवनिजेश अवस्थी एक दिन पहले अर्णव गोस्वामी के चैनल रिपब्लिक भारत पर टीआरपी की लड़ाई में अर्णव गोस्वामी और रिपब्लिक की पत्रकारिता के कसीदे काढ़ रहे थे जब अर्णव आज तक और इंडिया टुडे की पत्रकारिता की धज्जियाँ उड़ा रहे थे।

जब ये महानुभाव अर्णव की पत्रकारिता का झंडा बुलंद कर रहे थे, उस समय आज तक प्रबंधन अर्णव की पत्रकारिता के मुकाबले अपने संस्थान की पत्रकारिता की साख की खातिर स्पष्टीकरण लिखवा रहा होगा।

आज इन्हे देख कर ऐसा लगा जैसे आज तक और रिपब्लिक सब एक ही संयुक्त परिवार का हिस्सा हैं, बस दो भाइयों में अपने-अपने हिस्से को लेकर फिलहाल थोड़ा झगड़ा बढ़ गया है।

दोनों मिलकर तमाशा पसंद करने वाली जनता का मनोरंजन कर रहे हैं बस।

पत्रकारिता से आज तक का भी बस नाम मात्र का ही लेना-देना बचा है। जिन्हें लगता हो कि आज तक कुछ अलग है, उनको ये सब देखना चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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