बंगाल हिंसा पर ताबड़तोड़ ट्वीट करने वाली ‘आजतक’ की पत्रकारिनों के मुंह यूपी हिंसा पर सिल गए हैं!

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने एक जानकारी फेसबुक पर साझा की है. इसके मुताबिक बंगाल हिंसा को लेकर आजतक की पत्रकारिनों अंजना ओम कश्यप, चित्रा त्रिपाठी, श्वेता सिंह ने ताबड़तोड़ ट्वीट किए. पर इनके मुंह यूपी में हो रही हिंसा पर सिल गए हैं. इसीलिए तो ये कही जाती हैं गोदी पत्रकार.

शीतल पी सिंह द्वारा पोस्ट की गई जानकारी के मुताबिक अंजना ओम कश्यप ने बंगाल हिंसा पर 23 ट्वीट किए. चित्रा त्रिपाठी ने बंगाल हिंसा पर 28 ट्वीट मारे. श्वेता सिंह भी बंगाल हिंसा पर मुखर रहीं और 19 ट्वीट कर गईं.

पर ये तीनों आजतक वाली पत्रकारिनें यूपी में आए दिन हो रही हिंसा पर चुप्पी साध चुकी हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इनका भाजपा सरकारों से याराना है. ये सत्ताधारी केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की दुलारी हैं, इसलिए नमक का कर्ज अदा करते हुए चुप्पी साधे हैं.

एबीपी न्यूज वाली रुबिका लियाकत भी बंगाल हिंसा पर 22 ट्वीट कर ममता बनर्जी को घेरती नजर आईं थीं. पर यूपी में हिंसा पर इनका एक भी ट्वीट अब तक नहीं आया है.

आखिर ये चारों महिला पत्रकार यूपी में हिंसा पर चुप क्यों हैं, ट्वीट क्यों नहीं कर रहीं हैं…

क्या बंगाल हिंसा पर ट्वीट करने के लिए भाजपा की तरफ से उन्हें उपकृत किया गया था और अब भाजपा ने इन्हें मुंह बंद रखने के लिए उपकृत कर रखा है….

ये गोदी मीडिया के पत्रकार इतने ढीठ हैं कि अपने पर उठने वाले सवालों को इग्नोर कर मोदी-योगी पूजन में तल्लीन रहते हैं….

Ashish Awasthi
सियासत के मुलायमी फार्मूले को मठ के सांड़सा धारक ने विस्तार ही तो दिया है। याद है जब कैसरबाग से लोहिया के गणपुत्र एक पुलिस अधिकारी को जीप की बोनट पर घसीट कर गंज तक ले गए थे। बाकायदा गण भेष में थे लाल टोपी लाल कुर्ता।

Dev Pal
आप भी ना महोदय….. यह मीडिया नही.. स्वार्थी, लालची, दुकानदार हैं। हवा के रुख के साथ चलने वाले। इनसे कैसी उम्मीद।

Ravi Bhushan
क्या झोला छाप डाक्टरों को आप डॉक्टर मानते हैं नहीं न, तो इन ढोंगियों को पत्रकार का दर्जा क्यों?
लोकतंत्र का सबसे मजबूत निस्वार्थ स्तंभ पत्रकारिता है, जिसका विश्वास जनता से जुड़े मसलों को उजागर करना।
अफसोस अपना कर्तव्य निभाते हुए बहुत से पत्रकारों को अपनी जान देनी पड़ी, कितने ही जेलों की सलाखों के पीछे है।

Yogesh Kumar
नौकर, मालिक के ख़िलाफ़ तभी ज़बान खोल सकता है जब उसको नौकरी छोड़नी हो।

संजय राघव ·
एक आर्टिफ़िशिअल ऋचा भी है

Sheetal P Singh
संजय राघव वे इस समय मंत्रिमंडल की प्रशंसा में लहरा रही हैं । वे आंसू बेचती हैं!

Suneel Yadav
Godi media bhi piti he. Tb bhi chatukari me lge he

Sheetal P Singh
ग़रीब संवाददाता पिटे हैं । मीडिया (मालिक/संपादक/एंकर/ कथित नामचीन पत्रकार )तो तलवे पर जीभ सटाए हुए है ।

Vikas Mahlawat
GODI-MODI MEDIA kay maalik aur Anchors toh sahi salamat hain na.
Yeh toh kewal naukar reporters ko maar mili hai

Mahesh Yadav
बेशर्मी की चरम पराकाष्ठा है और इसमें मीडिया का पूरा सहयोग है, बावजूद इसके कि इस चुनाव के दौरान मीडिया के तमाम नुमाइंदों को कुत्तों के तरह से खदेड़ खदेड़ कर मारा गया।

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