एक पाठक का दर्द : मैं अखबार खरीदता हूँ खबरों के लिए, बच्चों की छी छी फेंकने के लिए नहीं!

बैतूल। मैं महज एक पाठक हूँ और दो अखबार खरीदता हूँ जिससे लोकल की जनहित के मुद्दों की जानकारी और सूचनाएं मुझे प्राप्त हों।

उक्त दोनों अखबार इसलिए नहीं खरीदता कि उससे बच्चों की छि छि फेकना हो।

सर्कुलेशन में अपने को लीडिंग बताने वाले इन दोनों अखबार का लोकल पुलआउट देख कर कोफ्त भी होता है, अफसोस भी होता है।

रुपयों में बिकने वाले इन अखबार के लोकल रिपोर्टर और ब्यूरो कितनी आसानी से जन सरोकार की खबरें हजम कर जाते हैं या उन्हें अंडर प्ले कर जाते है, ये आये दिन पता चलता रहता है।

अब आज बुधवार के पुलआउट को देख लो। लिटिल फ्लावर स्कूल को लेकर पैरेंट्स ने शिकायत की, आक्रोश जाहिर किया पर एक ने पूरी खबर ही हजम कर ली, दूसरे ने डेढ़ कालम फ़ोटो कैप्सन से मिसिंग के पाप से अपने को बचा लिया।

जिस स्कूल से शहर के पांच से दस हजार पैरेंट्स सीधे जुड़े हैं उससे जुड़ी खबर के साथ ऐसा रवैया पत्रकारिता के किस पैरा मीटर में आता है, समझ से परे है।

लोकल पुल आउट में यह कोई पहला मसला नहीं है। अभी हाल में पीआईयू में ईई एसडीओ की हाथापाई का मामला भी लापता था। वहीं जिला अस्पताल के चार डॉक्टरों पर महिला ने गम्भीर आरोप लगाए थे, वह मामला भी ग़ायब था। जबकि यह सब चर्चा में आने वाले मामले हैं।

इन दोनों अखबार में जो रिपोर्टर हैं यह सब वैतनिक हैं। इनका काम केवल खबरें करना ही है। पर ये सब खबरों के नाम पर शायद पर्सनल एजेंडा भी चलाते हैं। उसी का नतीजा यह है कि लिटिल फ्लावर जैसे मामलों की जन सरोकार की खबर का कबाड़ा होता है।

लोगों की नजर में वैसे ही मीडिया, पत्रकार की इमेज क्या से क्या होते जा रही है, वह जग जाहिर है। उसका कारण खबरों के साथ खेल कर जाने की यह प्रवत्ति है।

इन अखबारों के पाठक बोलने लगे कि कोई मतलब की खबरें नही आतीं।

अब ऐसे पाठक को भी सलाह है कि वे इन अखबार में खबर हजम होने पर इनकी सोशल मीडिया पर मजम्मत करना शुरू कर दें।

खबर के नाम पर करते ये हैं कि किसी अधिकारी के पास चले जाओ या उसे फोन कर लो, जो वो बताए उसे बिना सवाल के गाय पर निबंध की तरह उतार दो।

अखबार का सबसे बड़ा पैरामीटर यह होता है कि उसमें पाठक के काम की, उपयोगिता की खबर क्या है, कौन सी सूचना या जानकारी से वह जुड़ता है।

मैं अखबार खरीद कर पढ़ता हूँ इसलिए खबर हजम करने पर अब आगे नामजद सवाल खड़े किए जाएंगे। उनके सम्पादक से भी सीधे बात की जाएगी। साथ ही मैनेजमेंट का नम्बर भी पाठकों को उपलब्ध कराया जाएगा।

(यह सब एक पाठक से मिले फीडबैक पर आधारित है जो लिटिल फ्लावर मामले में विरोध कर रहा था। इस विरोध में दो लीडिंग बताने वाले अखबार का बड़ा एजेंट भी शामिल था और वो इन दोनों अखबार के कर्मचारियों को जिन शब्दों से नवाज रहा था वह लिखने योग्य नहीं है)

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से पत्रकार लक्ष्मीनारायण की रिपोर्ट.

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *