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अक्षय की मौत पर भी ब्रांडिंग का भूखा ‘आजतक’ शिवराज सरकार से सिर्फ बिचौलिये की भूमिका निभा रहा

युवा पत्रकार अक्षय सिंह की संदिग्ध हालात में हमेशा के लिए चले गए। लगभग 12-13 सालों से सहारा टीवी के वक्त से जानता था। आजतक चैनल अपने संवाददाता की मौत पर भी खबर परोस कर अपनी ही ब्रांडिंग करने में लगा है क्योंकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस घटना के बाद चैनल शिवराज सरकार के मध्यस्थ की भूमिका में दिख रहा है। सबसे तेज नं0- 1 चैनल को इस घटना को सबसे बड़ी खबर बनाना चाहिये था और अक्षय की मौत को इत्तिफाक न मानते हुये इसके राज – रहस्य के उजागर करने की बात करनी चाहिये थी, केन्द्र-राज्य सरकार से लगातार सवाल पूछने चाहिये थे। 

युवा पत्रकार अक्षय सिंह की संदिग्ध हालात में हमेशा के लिए चले गए। लगभग 12-13 सालों से सहारा टीवी के वक्त से जानता था। आजतक चैनल अपने संवाददाता की मौत पर भी खबर परोस कर अपनी ही ब्रांडिंग करने में लगा है क्योंकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस घटना के बाद चैनल शिवराज सरकार के मध्यस्थ की भूमिका में दिख रहा है। सबसे तेज नं0- 1 चैनल को इस घटना को सबसे बड़ी खबर बनाना चाहिये था और अक्षय की मौत को इत्तिफाक न मानते हुये इसके राज – रहस्य के उजागर करने की बात करनी चाहिये थी, केन्द्र-राज्य सरकार से लगातार सवाल पूछने चाहिये थे। 

मध्यप्रदेश की किसी भी जाँच एजेन्सी पर अगर किसी मिडिया हाउस या पत्रकार को भरोसा है तो ऐसे लोग शिवराज के दलाल की भूमिका में ही हैं। कॉरपोरेट मिडिया में प्रचलित सतही परम्परा से परे जाकर आजतक चैनल (टीवी टुडे ग्रुप) अक्षय के परिवार की सुधि लेगा और परिजनों/आश्रितों का ख्याल करेगा/रखेगा – ऐसी उम्मीद थोड़ी बहुत जरूर करता हूँ। अक्षय की आत्मा को शांति मिले और परिवार के लिये दुख से उबरने की ताकत मिले इसकी प्रार्थना करता हूँ। 

मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला देश के सबसे बड़े रैकेट में से एक है जिसमें एक पूरा सरकारी सिंडिकेट शामिल है। जैसे उत्तर प्रदेश में NRHM घोटाला जिसमें भी करीब 12 से 15 राजदार अब इस दुनिया को संदेहास्पद परिस्थितियों में अलविदा कह चुके उसी प्रकार व्यापम घोटाले के राजदार लगभग 45 लोगों की मौत हो चुकी है। शिवराज समर्थक अक्षय की मौत को इत्तिफाक बता रहे हैं लेकिन जनाब एक मामले में 45 मौते भी क्या इत्तिफाक है? लगता है कि दुनिया की बड़ी से बड़ी जाँच एजेन्सी के लिये भी इस घोटाले का रहस्योदघाटन एक चुनौती ही होगी। 

देश के पत्रकारों के लिये भी ये एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। खैर व्यापम के बहाने मध्य प्रदेश की प्रशासनिक अराजकता और संस्थागत कुशासन की पोल उसी कदर खुल गयी है जैसे उत्तर प्रदेश की NRHM घोटाले में खुली थी। एक पत्रकार होने के नाते प्रथम दृष्टया अक्षय की मौत को मैं कतई इत्तिफाक नहीं लेकिन बड़े साजिश या राज के तौर पर देखता हूँ। परन्तु हाँ! अक्षय की मौत देश के एक बड़े घोटाले के रैकेट को पर्दाफाश करने और व्यापम के सत्य की तहकीकात के रास्ते में हुई – यह जरूर एक अजीब इत्तिफाक है। 

अनगिनत राजदारों को खत्म कर अब लगता है कि इस घोटाले की सीबीआई जाँच हो भी तो क्या हाथ लगेगा? लेकिन लोकतंत्र में जनता को सत्य जानने का हक जरूर है जिसके सवालों के घेरे में सिर्फ और सिर्फ शिवराज सिंह चौहान है जो अपनी कुर्सी और राजनीति बचाने के चक्कर में लगे हैं। सुनों शिवराज! तुम्हे और मिडिया सहित लोकतंत्र के सभी स्तंभों में मौजूद भ्रष्ट सत्ता के दलालों को अक्षय जैसे ईमानदार पत्रकार की आह जरूर लगेगी।

निखिल आनंद के एफबी वाल से

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