दुबकने की बजाय आतंकियों की छाती पर मूँग दल आए अमित शाह!

शिशिर सोनी-

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की यही अदा लोगों को भाती है। दोनों चुनौतियों को स्वीकार करते हैं। जब देश का कोई नेता श्रीनगर के लाल चौक पर जाने से थर्राता था तब मोदी ने लाल चौक पर तिरंगा लहराया था। तब मोदी को देश जानता भी नहीं था। भाजपा में तब अटल, अडवाणी और जोशी के नाम पर नारे लगते थे – भारत के तीन धरोहर, अटल, अडवाणी, मुरली मनोहर….

आज जब अमित शाह का कश्मीर घाटी का दौरा बना। उसकी घोषणा हुई तो आतंकियों ने खूब धमाके किये। हमले किये। सुरक्षाकर्मी मारे गए। आतंकी मारे गए। माहौल ऐसा बनाने की कोशिश हुई कि अमित शाह का दौरा टले। रद्द हो जाए। मगर शाह नहीं टरे। आतंकियों की छाती पर रैली करने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहुँच गए हैं।

बारामुला और राजौरी कभी आतंकियों का धुर गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में अपने सभी तय कार्यक्रम को शाह ने बरकरार रखा। ये मामूली बात नहीं।

अभी तक ऐसी घटनाओं के बाद नेताओं के दौरे टलते आये हैं। सुरक्षा का हवाला देकर दिल्ली में नेता दुबके नजर आये हैं। मगर, मोदी, शाह ने इस डर को बार बार जीत में तब्दील किया है। आपदा को हर बार अवसर में बदला है। ऐसे बोल्ड फैसले से स्थानीय लोगों में विश्वास तो पैदा होता ही है, देश भी फिर ऐसे जिगर वाले नेताओं के साथ खड़ा नज़र आता है। कभी प्रतीकों के तौर पर लिए जाने वाले ऐसे साहसिक फैसले अब भाजपा की मजबूती का, सफलता का मूल मंत्र है। असली राजनीतिक हथियार है।



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