पूर्वोत्तर भारत की हिंदी पत्रिका ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ की तरफ से अमरावती सृजन-पुरस्कार एवं सम्मान समारोह में कई सम्मानित

सिलीगुड़ी से प्रकाशित पूर्वोत्तर भारत की चर्चित हिंदी मासिक पत्रिका ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ की तरफ से 28 फरवरी को सिलीगुड़ी के बर्द्धवान रोड स्थित ऋषि भवन में अमरावती सृजन पुरस्कार एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें शहर के अलावा बाहर से आये लेखक कवियों ने भागीदारी की। ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ के प्रधान संपादक डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अमरावती सृजन-पुरस्कार व सम्मानों की भूमिका रखते हुए देश में पुरस्कार वितरण के बारे में कहा कि पूर्वोत्तर की एक मात्र हिंदी मासिक पत्रिका आपका तिस्ता-हिमालय की ओर से दिये जा रहे इन पुरस्कार एवं सम्मानों के बारे में हम यहां साफतौर पर बताना आवश्यक समझते हैं कि यह पहल हमने विशेष प्रयोजन से शुरू की है। आप जानते हैं कि आजकल पुरस्कार व सम्मान देने का एक मंतव्य प्रेरित चलन प्रारंभ हुआ है। सत्ता एवं पूंजी के भ्रमजाल तथा प्रायोजित सम्मानों के बरक्स तिस्ता-हिमालय द्वारा दिये जा रहे ये सम्मान इससे बिल्कुल इतर जन-सामाजिक सरोकारों तथा जन-संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध साहित्यकर्मी एवं नागरिक दायित्व के निष्ठापूर्ण निर्वाहन के लिए हैं जिसे हम बखूबी कर पा रहे हैं। ऐसे सम्मान उन्हीं लोगों को दिया जाना चाहिए जो देश व समाज की बेहतरी प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी व उत्तर बंगाल ने उन्हें एक मजबूत जमीन दी और भरपूर प्यार दिया जिसका वे ऋण इस सम्मान के जरिए चुका रहे हैं। समारोह के दौरान कवि व समालोचक देवेंद्रनाथ शुक्ल ने शैलेंद्र चौहान का परिचय देते हुए कहा शैलेन्द्र चौहान धरती के लेखक हैं। उनका पहला संकलन नौ रुपये बीस पैसे के लिए का नामकरण 8० के दशक में जहां वह सेवारत थे वहां एक बिजली मजदूर की न्यूनतम सरकारी मजदूरी थी के ऊपर लिखी गयी। शैलेंद्र का यह काव्य संकलन यूटोपिया और व्यवहारिकता के अन्तर्संघात से उत्पन्न कुछ दृश्य-अदृश्य बिम्बों और जटिलताओं से मुठभेड़ करते हैं।

अपने संबोधन में शैलेन्द्र चौहान ने कहा कि पत्रकारिता एवं सृजनशील साहित्य की रचना में अन्य लोग भी सक्रिय हैं। यह सम्मान दरअसल उन्हें मिलना चाहिए था। लेकिन वे विनम्रतापूर्वक इस सम्मान को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लेखक व पत्रकारों को समाज व राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए गरीब व वंचित वर्ग के हित में रचनाधर्मिता निभानी चाहिए। मुनाफाखोरी की तेजी से बढ़ रही प्रवृत्ति के बीच समाज का जिस तेजी से ध्रुवीकरण हो रहा है वह चिंतनीय है। हमारी सहनशील संस्कृति की राष्ट्रीय पहचान आज कठिन परीक्षा की घड़ी से गुजर रही है। हमें सामुदायिक सरोकारों पर अधिक बात करने की आवश्यकता है। मेरी कविता और पत्रकारिता भारतीय जनमानस के सुख-दुख, संघर्ष और सांस्कृतिक रुचि को सहज रूप में अभिव्यक्त करने का उपक्रम है। शैलेन्द्र चौहान को सिलीगुड़ी महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. अभिजित मजूमदार, साहित्यकार डॉ. भीखी प्रसाद ‘वीरेन्द्र’ एवं नवगीतकार बुद्धिनाथ मिश्र द्बारा सम्मानित किया गया। प्रो. अभिजित मजूमदार ने शैलेंद्र चौहान के विचारों से सहमति जताते हुए देश में जनवाद और राष्ट्रवाद को विकृत करने की फासीवादी सोच पर चिंता जताई।

तदुपरांत समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के रतिराम शर्मा एवं उद्योगपति राम कुमार गोयल को वरिष्ठ पत्रकार-विचारक निधुभूषण दास ने उत्तरीय पहनाकर सम्मानित किया। लेखक डा. ओम प्रकाश पाण्डेय ने मानपत्र और मेयर अशोक भट्टाचार्य ने समारोह में उन्हें स्मृति चिह्न् प्रदान किया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदी भाषा व साहित्य के विकास के लिए छोटी-छोटी बोलियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पत्रिका की इस पहल की सराहना करते हुए सम-सामयिक स्थितियों में सांस्कृतिक चर्चा को महत्वपूर्ण बताया। अपने संबोधन में उद्योगपति आर.के. गोयल ने सम्मान के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें सामाजिक कार्य के लिए बराबर प्रोत्साहित करता रहेगा। उन्होंने अपने संबोधन में लोक मंगल की कामना की। अगले चरण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह द्बारा रचित, मुंतज़िर की आत्मकथा ‘छाया दी’ का लोकार्पण किया गया। साथ ही ‘आपका तिस्ता-हिमालय’ के 71 वें अंक का भी विमोचन कवयित्री रंजना श्रीवास्तव द्बारा किया गया।

बिहार के पूर्व माकपा विधायक रामाश्रय सिंह ने कहा कि वर्तमान जटिल राजनैतिक परिस्थिति में साहित्यकारों को जन-सरोकारों से लैस साहित्य का सृजन करना चाहिए। नवगीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय चेतना को संकीर्णता में सीमित किया जा रहा है। प्रो. सुनील कुमार द्बिवेदी ने कहा कि मुंतज़िर की आत्मकथा छाया दी एक ऐसा उपन्यास है जो समय को आलोचनात्मक दृष्टि से समझने का अवसर प्रदान करता है। प्राध्यापिका पूनम सिंह ने मुंतज़िर की आत्मकथा ‘छाया दी’ पर बोलते हुए उसमें निहित समय के यथार्थ को रेखांकित किया। प्रो.अजय साव ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा कि यह पुस्तक एक ओर आत्मकथा का स्वाद देती है तो दूसरी ओर यह उपन्यास के रूप में हमारा ध्यान आकृष्ट करती है। यह दोनों के द्बंद्बात्मक स्वरूप को अभिनव ढंग से प्रस्तुत करते हुए समय को प्रत्यभिज्ञान द्बारा रूपायित करती है। समारोह को सी.बी. कार्की, नीधूभूषण दास, पूर्व विधायक रामाश्रय सिंह और महावीर चाचान ने भी संबोधित किया। अंत में भीखी प्रसादने अध्यक्षीय भाषण के साथ समारोह का समापन हुआ।

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