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उत्तर प्रदेश

आजमगढ़ के पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) से विभूषित

आजमगढ़ । विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ (विश्वविद्यालय) भागलपुर बिहार ने अपने दो दिवसीय (20-21, फरवरी 2016) 20वां महाधिवेशन सह-सम्मान समारोह में जनपद के पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह संपादक, ‘शार्प रिपोर्टर’ को उनके एक दशक की पत्रकारीय व साहित्यिक अवदान तथा विशिष्ट शोधकार्य के लिए अपना प्रतिष्ठित मानद सम्मानोपाधि, ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) से विभूषित किया है। जनपद के रामपुर, जहानागंज के मूल निवासी अरविन्द कुमार सिंह ने सन् 2014-15 में देश की राष्ट्रीय महत्व की संस्था, ‘‘उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा’’, मद्रास (विश्वविद्यालय) के हैदराबाद केन्द्र से आंचलिक पत्रकारिता में एम.फिल.किया।

आजमगढ़ । विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ (विश्वविद्यालय) भागलपुर बिहार ने अपने दो दिवसीय (20-21, फरवरी 2016) 20वां महाधिवेशन सह-सम्मान समारोह में जनपद के पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह संपादक, ‘शार्प रिपोर्टर’ को उनके एक दशक की पत्रकारीय व साहित्यिक अवदान तथा विशिष्ट शोधकार्य के लिए अपना प्रतिष्ठित मानद सम्मानोपाधि, ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) से विभूषित किया है। जनपद के रामपुर, जहानागंज के मूल निवासी अरविन्द कुमार सिंह ने सन् 2014-15 में देश की राष्ट्रीय महत्व की संस्था, ‘‘उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा’’, मद्रास (विश्वविद्यालय) के हैदराबाद केन्द्र से आंचलिक पत्रकारिता में एम.फिल.किया।

आंचलिक पत्रकारिता पर आधारित यह शोधकार्य ‘पूर्वांचल की हिन्दी पत्रकारिता और उसकी चुनौतियां’ पर आधारित था। इस महत्वपूर्ण शोधकार्य के क्षेत्र विस्तार में, उ.प्र. की पूर्वी अंचल का 28 जनपद और पश्चिमी बिहार के 7 जनपदों की बिस्तृत आबादी के बीच, आंचलिक पत्रकारिता का अतीत, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का वृहद अध्ययन है। यह शोध इतना महत्वपूर्ण था और है कि उन्हें पच्चासी प्रतिशत अंक के साथ गोल्ड मेडल हेतु भी चयन हो गया। हैदराबाद केन्द्र में सर्वोत्तम अंक पाने के साथ ही उन्होंने समूचे विश्वविद्यालय में भी सर्वोत्तम अंक पाकर विश्वविद्यालय को भी टाप कर किया। उनकी इस सफलता के लिए उन्हें आगामी 28 फरवरी-2016 को मद्रास के त्यागराय नगर स्थित विश्वविद्यालय कैम्पस के 78वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों दो स्वर्ण पदक प्रदान किये जायेंगे।

इसके पूर्व भी श्री सिंह ने पत्रकारिता में पिछले एक दशक से विभिन्न आयामों को लेकर जनपद और उसके बाहर भी काम किया है। ‘शार्प रिपोर्टर’ और ‘मनमीत’ जैसी पत्रिका का संपादन उनके द्वारा काफी सालों से किया जा रहा। साथ ही श्री सिंह के राजनैतिक एवं साहित्यिक विषयों पर आधारित मौलिक आलेख देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होते रहें हैं। अभी देश की सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘हंस’ के दिसम्बर-15 के अंक में सम्मानों और पुरस्कारों की वापसी को लेकर छपे आलेख की पूरे देश में चर्चा हुई।

श्री सिंह के इन सभी अवदानों को देखते हुए विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर ने 20 फरवरी-16 को अपने दीक्षांत समारोह में ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) की मानद उपाधि प्रदान किया। इस उपाधि को विद्यापीठ के कुलाधिपति सुमन जी भाई, कुलपति तेज नारायण कुशवाहा, कुलसचिव देवेन्द्र नाथ साह, अधिष्ठाता योगेन्द्र नारायण शर्मा ‘अरूण’ तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य के.डी. मिश्र के हाथों प्रदान किया गया।

इस अवसर पर आयोजित सेमिनार के विषय ‘‘हिन्दी साहित्य में मिथक’’ पर भी श्री सिंह द्वारा शोधपत्र पढ़ा गया। जिसको देशभर से आये साहित्यकारों, लेखकों, विद्वानों व पत्रकारों ने सराहा। जनपद के पत्रकार की सफलता पर वरिष्ठ साहित्यकार पारसनाथ पाण्डेय ‘गोवर्धन’ ने कहा कि यह सम्मान किसी पत्रकार को नही, बल्कि जनपद को मिला है। दक्षिण भारत के साथ बिहार में जाकर जनपद का मान बढ़ाने पर हम युवा संपादक अरविन्द कुमार सिंह को बंधाई देते हैं। वरिष्ठ समाजवादी विचारक एवं पत्रकार विजय नारायण ने इस सम्मान पर बंधाई देते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। वरिष्ठ पत्रकार चिन्तक गुंजेश्वरी प्रसाद ने इसे समूचे हिन्दी पट्टी का सम्मान बताया और कहा कि हिन्दीतर क्षेत्र में हिन्दी भाषी को सम्मान हिन्दी प्रेम को दिखाता है।

जनपद के पत्रकार व शार्प रिपोर्टर के उप संपादक दीपनारायण मिश्र ने कहा कि यह जनपद की परम्परा का सम्मान है। पत्रकार आशुतोष द्विवेदी इसे पत्रकारिता का सम्मान कहा। इस अवसर पर पत्रकार सुभाष सिंह, राजेश चन्द्र मिश्रा, विकास, विश्राम शर्मा, अम्बिका, पूनम श्रीवास्तव, निरुपमा श्रीवास्तव के अतिरिक्त साहित्यकार वेदप्रकाश उपाध्याय, डॉ. ईश्वर चन्द्र त्रिपाठी, मधुर नज्मी तथा शिक्षक नेता वेदपाल सिंह आदि लोगों ने भी अरविन्द सिंह को बंधाई दिया। पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मान मेरा नहीं है बल्कि मेरे जनपद की माटी का है। इस जनपद की साहित्यिक और पत्रकारीय परम्परा का है।

आनन्द विश्वकर्मा की रिपोर्ट.

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1 Comment

1 Comment

  1. देवेन्द्र कुमार

    March 1, 2016 at 5:34 am

    महोदय ये कोई वैधानिक संस्था नहीं है जिसके बारे में आपने इतने आत्मगौरव के साथ लिखा है
    आजमगढ़ को बदनाम न करें पहले तथ्यों को जाचें

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