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उत्तर प्रदेश

कोतवाल की थाने में पिटाई, जांच के नाम पर लीपापोती, अब आईपीएस अमिताभ ठाकुर का भरोसा

देवरिया : पुलिस विभाग का एक अधिकारी अपने मातहतों द्वारा कोतवाली थाने में ही बुरी तरीके से पिटा जाता है, लेकिन उच्चाधिकारी जांच के नाम पर मामले को मैनेज कराने में जुटे हुए हैं। इस घटना को हुए एक सप्ताह से अधिक का समय हो रहा है। आला अफसर अब तक पिटाई करने वाले दोषियों को चिन्हित ही नहीं कर पाये हैं। कार्यवाही करने की बात तो काफी दूर की है। लोगों का कहना है कि इससे तो यही प्रतीत होता है कि पुलिस के आला अधिकारी कोतवाल को पिटवाना चाहते थे?

<p>देवरिया : पुलिस विभाग का एक अधिकारी अपने मातहतों द्वारा कोतवाली थाने में ही बुरी तरीके से पिटा जाता है, लेकिन उच्चाधिकारी जांच के नाम पर मामले को मैनेज कराने में जुटे हुए हैं। इस घटना को हुए एक सप्ताह से अधिक का समय हो रहा है। आला अफसर अब तक पिटाई करने वाले दोषियों को चिन्हित ही नहीं कर पाये हैं। कार्यवाही करने की बात तो काफी दूर की है। लोगों का कहना है कि इससे तो यही प्रतीत होता है कि पुलिस के आला अधिकारी कोतवाल को पिटवाना चाहते थे?</p>

देवरिया : पुलिस विभाग का एक अधिकारी अपने मातहतों द्वारा कोतवाली थाने में ही बुरी तरीके से पिटा जाता है, लेकिन उच्चाधिकारी जांच के नाम पर मामले को मैनेज कराने में जुटे हुए हैं। इस घटना को हुए एक सप्ताह से अधिक का समय हो रहा है। आला अफसर अब तक पिटाई करने वाले दोषियों को चिन्हित ही नहीं कर पाये हैं। कार्यवाही करने की बात तो काफी दूर की है। लोगों का कहना है कि इससे तो यही प्रतीत होता है कि पुलिस के आला अधिकारी कोतवाल को पिटवाना चाहते थे?

उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार की रात्रि करीब दस बजे अधीनस्थ वर्दीधारियों द्वारा कोतवाल को जम कर पीटा गया था। उनके शरीर में जगह जगह चोटें आईं तथा वर्दी फट गई थी।

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सूत्रों का कहना है कि कोतवाली थाने के प्रभारी कोतवाल गजेन्द्र राय की पिटाई किए जाने के मामले में पुलिस विभाग एक तीन स्टार वाले जाति विशेष के एक अफसर का हाथ है। राय की 7 अप्रैल की रात्रि में पिटाई अचानक नहीं हुई है, बल्कि इस कार्य में सत्ता पक्ष के एक नेता एवं कुछ सजातीय पुलिस कर्मचारियों का हाथ है। इस बात की जोरदार चर्चा है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस विभाग के आला अधिकारी इस मामले को पूरी तरह से दबाना चाहते हैं। 

पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी अमिताभ ठाकुर, जो इस समय लखनऊ में आईजी हैं, का कहना है कि पुलिस विभाग के अधिकारी यदि अपनी समस्या और घटनाओं को दबाने का प्रयास करेंगे तो यह पुलिस विभाग के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इस मामले में कोतवाल गजेन्द्र राय को मुझसे बात कर पूरे प्रकरण को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तो पुलिस विभाग के अधिकारी की कायरता है कि वह कोतवाली थाने में पिटा जा रहा है और इसके खिलाफ आवाज भी नहीं उठा रहा है। ठाकुर ने इस प्रकरण में कोतवाल का सहयोग करने का भरोसा दिया है। 

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घटना हो जाने के एक सप्ताह बाद भी पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी बचने का प्रयास कर रहे हैं। इस वजह से प्रकरण में पुलिस विभाग में दो गुट बन गया है। एक गुट कार्यवाही की मांग पर अड़ा है तथा कह रहा है कि जब सिपाही लोग कोतवाल को पीट सकते हैं, वह भी कोतवाली थाने में घुसकर, तब वे दो स्टार वाले दारोगा को क्या समझेंगे? इस गुट का कहना है कि आज इन्सपेक्टर पीटा गया तो कल डिप्टी एस पी और एस पी भी पिट सकते हैं। इसलिए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। दूसरा गुट, जिसमें पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी शामिल हैं, नौकरी को सर्वोपरि मानते हुए सब कुछ बर्दाश्त करने की नसीहत दे रहे हैं। पुलिस अधीक्षक डा. मनोज कुमार ने कहा कि जांच कराई जा रही है। 

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