मजीठिया के लिए लड़ रहे होशंगाबाद भास्कर के 3 कर्मचारियों का प्रबंधन ने किया ट्रांसफर

होशंगाबाद। सुप्रीम कोर्ट की लगातार फटकार के बाद भी मीडिया मालिकों के कानों पर जू नही रेंग रही है। कंपनी मालिक लगातार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे है। मजीठिया वेज बोर्ड का केस लड़ रहे दैनिक भास्कर होशंगाबाद के कर्मचारियों को मालिकान तरह तरह से परेशान कर रहे हैं। इसके बाद भी कर्मचारी अपने हक़ के लिए खड़े हैं। परेशान कंपनी की हालात खिसयानी बिल्ली जैसी हो गयी है। पहले 5 कर्मचारियों का ट्रांसफर किया। फिर उन्हें टर्मिनेट कर दिया। बाकी को 2 सालों से इन्क्रीमेंट नहीं दिया गया। काम का बोझ सिर पर डाल दिया।

इसके बाद भी कर्मचारी पीछे नहीं हटे तो अब भास्कर ने इन्हीं में से 3 और कर्मचारियों का ट्रांसफर दूसरे राज्य में बगैर सैलरी बढ़ाये ही कर दिया। ये कर्मचारी होशंगाबाद यूनिट के प्रिंटिंग डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं। इनके नाम हैं- प्रणय मालवीय, नरेंद्र धुर्वे और धीरेन्द्र। कंपनी ने ट्रांसफर लेटर में 20 जुलाई की तारीख डाली है और ज्वाइनिंग के लिए 1 अगस्त का समय दिया है। लेकिन कर्मचारियों को ट्रांसफर की जानकारी 26 जुलाई को तब लगी जब HR ने उन्हें फोन करके ऑफिस बुलाया और लेटर दिए। हालांकि कर्मचारियों ने फ़िलहाल रिसीविंग नहीं दी है।

लेटर में तीनों कर्मचारियों का तबादला रायपुर किया है। वह भी बगैर सेलरी बढ़ाये। जबकि ट्रांसफर का नियम ही होता है की उन्हें जिस जगह तबादला किया जा रहा है उस सिटी के अनुसार वेतन वृद्धि हो लेकिन कंपनी अपने मनमुताबिक चल रही है। हाल फिलहाल ‘एक पेड़ एक जिंदगी’ की मुहिम शुरू करने वाला भास्कर पेड़ लगाकर जिंदगी बचाने की अपील कर रहा है लेकिन कर्मचारियों की बलि राक्षसों जैसे लेने को तैयार खड़ा है। 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से कंपनी को जैसे ही कुछ समय की मोहलत मिली, कंपनी के प्रबंधकों ने जहर उगलना शुरू कर दिया है।

आपको बताना चाहूँगा कि होशंगाबाद से 19 कर्मचारियों ने मजीठिया का केस लगाया है। कंपनी की इस परेशान करने वाली नीति से ये कर्मचारी डरने वाले नही हैं। उन्होंने कंपनी द्वारा किये गए इस ट्रांसफर का रास्ता निकाल लिया है। वे जल्द ही इसे कोर्ट में चुनौती देंगे। ऊपर वाले के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं। कर्मचारियों को उनका हक़ जरूर मिलेगा, लेकिन प्रताड़ित कर्मचारियों और उनके परिवार वालो की बद्दुआ कंपनी और कंपनी के सिपहसाहरों को जल्द लगेगी। एक एक की प्रताड़ना का हिसाब कंपनी के मालिक को जेल जाकर देना पड़ेगा।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.



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