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उत्तर प्रदेश

बरेली में उपजा का असली अध्यक्ष कौन!

बरेली। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के दो अध्यक्ष मय कार्यकारिणी के यहां सक्रिय है और दोनों ही अपने को उपजा का असली अध्यक्ष बता रहे है। दबंग किस्म के एक पक्ष ने पत्रकारों के बैठने का स्थान पत्रकार संगोष्ठी भवन पर कब्जा कर लिया है जबकि दूसरे पक्ष के पदाधिकारी एवं अन्य सक्रिय पत्रकार सड़कों पर है। दूसरे पक्ष के अध्यक्ष ने बताया कि हमारा संगठन पत्रकारों के हित के लिए लम्बे समय से कार्य कर रहा है। पत्रकारों के बैठने के लिए जिला प्रशासन जो स्थान उपलब्ध कराया था उसे उपजा के तथाकथित पदाधिकारियों ने विभिन्न समाचार पत्र में कार्य कर रहे सक्रिय पत्रकारों के लिए पत्रकार संगोष्ठी भवन पर प्रवेश पर पाबन्दी लगा दी है। पाबन्दी से पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।

बरेली। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन के दो अध्यक्ष मय कार्यकारिणी के यहां सक्रिय है और दोनों ही अपने को उपजा का असली अध्यक्ष बता रहे है। दबंग किस्म के एक पक्ष ने पत्रकारों के बैठने का स्थान पत्रकार संगोष्ठी भवन पर कब्जा कर लिया है जबकि दूसरे पक्ष के पदाधिकारी एवं अन्य सक्रिय पत्रकार सड़कों पर है। दूसरे पक्ष के अध्यक्ष ने बताया कि हमारा संगठन पत्रकारों के हित के लिए लम्बे समय से कार्य कर रहा है। पत्रकारों के बैठने के लिए जिला प्रशासन जो स्थान उपलब्ध कराया था उसे उपजा के तथाकथित पदाधिकारियों ने विभिन्न समाचार पत्र में कार्य कर रहे सक्रिय पत्रकारों के लिए पत्रकार संगोष्ठी भवन पर प्रवेश पर पाबन्दी लगा दी है। पाबन्दी से पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।

नॉवल्टी चौराहा स्थित सुभाष मार्केट में सक्रिय पत्रकारों को अपने कार्य संपादित करने हेतु पत्रकारों की मांग पर जिला प्रशासन ने पत्रकार संगोष्ठी भवन का वर्ष 1985 में निर्माण कराकर 28 फरवरी को निर्वतमान मण्डलायुक्त अनादिनाथ सैगल ने पत्रकार संगोष्ठी कक्ष का उद्घाटन कर पत्रकारों को सौंपा था लेकिन एक पक्ष ने उसपर कब्जा कर लिया है। दूसरे पक्ष के अध्यक्ष ने इस पत्रकार संगोष्ठी भवन के खुर्द-बुर्द की आशंका जताई है।

जिन तथाकथित पत्रकारों का सरोकार अब मीडिया जगत से नहीं रह गया है वे ही धन-बल पर कार्यकारिणी में अपना प्रभुत्व बनाए हुए हैं। जिस पत्रकार संगोष्ठी भवन को पत्रकारों के हित के लिए इस्तेमाल होना चाहिए वही पत्रकार संगोष्ठी भवन अब मठाधीशों के व्यापार का अड्डा बन चुका है। जिन पत्रकारों ने मठाधीशों का काकस तोड़ने का प्रयास किया वे ही अब पत्रकार संगोष्ठी भवन में प्रवेश के योग्य नहीं समझे जाते हैं। आज से लगभग तीन दशक पूर्व 1985 में पत्रकारों के जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पत्रकार संगोष्ठी भवन की स्थापना की गयी थी, वे उद्देश्य अब कहीं नजर नहीं आते। पत्रकार संगोष्ठी भवन को जिस राह पर चलाने के लिए पत्रकारिता जगत से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ पत्रकारों ने जी-तोड़ मेहनत की। वही पत्रकार संगोष्ठी भवन वर्तमान मठाधीशों की भोग-विलासिता के चलते अपनी राह से भटक चुका है। जिस पत्रकार संगोष्ठी भवन में किसी समय देश-विदेश की राजनीति और खबरों को लेकर चर्चाओं का दौर चला करता था वहीं अब शाम होते ही चन्द लोग अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए आकर बैठ जाते है।

बरेली से विजय सिंह द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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