
दैनिक भास्कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में अपने ही जाल में उलझ गया दिखाई दे रहा है. भरी अदालत में पत्रकारों ने दैनिक भास्कर ग्रुप को न सिर्फ एक्सपोज कर दिया बल्कि उनके वकील की बोलती भी बंद हो गई.
दरअसल, अडानी ग्रुप को डीबी पॉवर कंपनी लि बेचने पर लेबर कोर्ट से लगी रोक हटवाने के चक्कर में दैनिक भास्कर ने खुद का काम खराब कर लिया है. भास्कर समूह ने पत्रकारों के एक आवेदन के जवाब में डीबी कॉर्प समूह की कंपनी डीबी पॉवर ने हाई कोर्ट में अपनी तरफ से दिए जवाब में दैनिक भास्कर के अखबार के मैनेजर राजकुमार साहू का शपथ पत्र लगा दिया.
आवेदन पर बहस के दौरान पत्रकारों ने हाई कोर्ट में दैनिक भास्कर की यह करतूत उजागर कर दी. उन्होंने अपने तर्कों से साबित कर दिया कि डीबी पॉवर, दैनिक भास्कर की ही इकाई है. याचिका में गलत शपथ पत्र और पत्रकारों के तर्कों पर डीबी पॉवर की वकील निरुत्तर हो गई और बहस बंद कर दी. इस सबके बाद कर्मचारियों के लिए खोदे गए गड्ढे में भास्कर खुद ही गिरता दिखाई दे रहा है. इस केस के फैसले का लाभ केस लड़ रहे पत्रकारों के अलावा दैनिक भास्कर के हजारों कर्मचारियों को भी मिल सकता है.
पूरा किस्सा साल 2022 का है, जब अडानी ग्रुप ने दैनिक भास्कर से उसकी छत्तीसगढ़ स्थित थर्मल पॉवर प्लांट कंपनी..डीबी पॉवर के टेकओवर का सौदा एकमुश्त कैश में करने का सौदा किया था. भास्कर समूह से मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ रहे पत्रकारों तरुण भागवत और अरविंद तिवारी को सौदे की खबर लगते ही इस पर आपत्ति जताई गई थी. दोनों पत्रकारों ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज तक शिकायत की थी. उस वक्त अडानी व भास्कर समूह ने इस आपत्ति को हल्के में लिया था. लेकिन दूसरी तरफ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने शिकायत को गंभीरता से लेकर समूह को नोटिस जारी कर दिया था. इस बात से मजबूर अडानी ग्रुप ने नोटिसों का जवाब देने का जिम्मा लॉ फर्म खेतान एंड कंपनी को सौंप दिया था.
हालांकि, इस मामले में अडानी को 100 साल से भी ज्यादा पुरानी खेतान एंड फर्म कोई भी राहत नहीं दिलवा सकी. नतीजतन अडानी ग्रुप डीबी पॉवर का अधिग्रहण नहीं कर सका था.
मामले में उच्च न्यायालय ने रिट निराकृत कर दी और कहा कि पहले लेबर कोर्ट में आवेदन करें, वहां राहत नहीं मिले तो हाई कोर्ट का रुख करें. पत्रकारों ने इसके तुरंत बाद डीबी पावर और अडाणी की डील पर रोक के लिए लेबर कोर्ट में आवेदन किया. तत्कालीन पीठासीन अधिकारी निधि श्रीवास्तव ने प्रस्तुत आवेदन, साक्ष्यों और पत्रकारों के तर्कों से सहमत होकर अडानी पावर द्वारा अधिग्रहित की जा रही भास्कर समूह की डीबी पॉवर कंपनी की डील पर रोक लगा दी. अडानी पावर और डीबी पावर के बीच यह डील 7017 करोड़ रुपए में होने वाली थी.
7 हजार करोड़ की डील पर लेबर कोर्ट के स्टे पर दैनिक भास्कर समूह ने आनन-फानन स्टे लेने की जल्दी में झूठे कथनों और अधूरे तथ्यों से ओत-प्रोत रिट याचिका से हाई कोर्ट को गुमराह कर एकपक्षीय स्टे ले लिया. लेबर कोर्ट के स्टे पर कैवियट के बावजूद रिट याचिका की बिना अग्रिम सूचना मिले सुनवाई हो जाने से पत्रकार भी अचंभित रह गए. उन्होंने पड़ताल की तो पता चला ना केवल दैनिक भास्कर समूह ने असत्य कथनों से हाईकोर्ट को गुमराह किया है बल्कि हाईकोर्ट के स्टाफ ने भी कैवियट की जांच में गलती की है.
झूठे साक्ष्य पेश करने पर 7 साल जेल
मामले में पत्रकार स्वयं पैरवी कर रहे हैं. उन्होंने भास्कर समूह के मालिकों द्वारा हाईकोर्ट को गुमराह करने के साथ ही शपथ-पत्र पर झूठे कथन प्रस्तुत करने की शिकायत कर प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की गुहार भी लगाई है. दोनों पत्रकारों की मानें तो दैनिक भास्कर समूह के कर्ताधर्ताओं का यह कृत्य आईपीसी के तहत दण्डनीय अपराध है. इसमें दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 7 साल तक की जेल और कड़ा आर्थिक जुर्माना दोनों हो सकता है.
शपथपत्र को लेकर उठे सवाल
पत्रकारों के मुताबिक हाईकोर्ट में विचाराधीन रिट याचिका में अडाणी समूह और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को पक्षकार बनाए जाने के आवेदन पर बहस हो चुकी है. जिस पर इसी हफ्ते फैसला आने वाला है. चूंकि पत्रकारों के उक्त आवेदन के जवाब में डीबी पॉवर ने दैनिक भास्कर अखबार के मैनेजर राजकुमार साहू का शपथपत्र लगा दिया है, जिस पर डीबी कॉर्प के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की सील भी लगी हुई है.
अब सवाल उठता है कि अपने सभी संस्करणों और उद्योग-धंधों को अलग-अलग इकाई बताने वाले दैनिक भास्कर समूह के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का शपथ-पत्र डीबी पॉवर की ओर से कैसे फाइल हो गया? जबकि दोनों ही कंपनियों की पैरवी अलग-अलग महिला वकील कर रही हैं. दैनिक भास्कर की वकील तो डेढ़ साल में सिर्फ दो-तीन सुनवाई में ही कोर्ट में उपस्थित हुई है और जिस दिन डीबी पॉवर की ओर से दैनिक भास्कर अखबार के मैनेजर राजकुमार साहू का शपथपत्र प्रस्तुत किया उस दिन भी डीबी कॉर्प की महिला वकील अनुपस्थित थी.
दोनों पत्रकारों का मसला क्या है जो दैनिक भास्कर के पीछे चबेना लेकर लगे हैं, जानने के लिए नीचे Link पर क्लिक करें…
अडानी को डीबी पॉवर बेचने की फिराक में था दैनिक भास्कर, दो पत्रकारों ने धूल चटा दी!


