डेंगू पहले भी था लेकिन ये भयानकता नहीं रहती थी!

आदिल ज़ैदी कविश-

डेंगू के कुछ लक्षण हैं
तेज़ बुख़ार आना
उल्टी आना
कमज़ोरी महसूस होना
चक्कर आना
और बदन पे लाल चकत्ते पड़ना।

नॉर्मल इंसान का बॉडी टेम्प्रेचर 97 से लेकर 99 फारेनहाइट तक रहता है यानी 37.2 से 38.6 डिग्री सेल्सियस। उसके बाद अगर आपका बॉडी टेम्प्रेचर बढ़के 104 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंचता है तो शरीर तपने लगता है यानी 40 डिग्री सेल्सियस के कुछ ऊपर। उससे ज़्यादा होने पर 116 डिग्री फारेनहाइट 44-46 डिग्री सेल्सियस की अवस्था तेज़ बुख़ार की है जिसमे 650MG डोलो ,डॉकसी दवा की ज़रूरत पड़ती है वरना नॉर्मल 104-106°£ तक पेरासिटामोल 500MG देने पर बुख़ार उतर जाता है।

अब ज़रा डेंगू के मरीज़ों को देखिए जिनको मेरे जानने वालों में डेंगू हुआ। उन्हें ना बहुत तेज़ बुख़ार आया ना चक्कर जैसा कुछ हुआ उल्टी हुई, शरीर पर लाल चकत्ते भी नही पड़े, हीमोग्लोबिन 15 यूनिट लेकिन प्लेटलेट्स 13000। अलग अलग जगह जाँच कारवाने पर अलग अलग रिपोर्ट।

डेंगू इससे पहले भी होता था लेकिन इस क़दर नही जैसा इस बार हुआ है चारो तरफ हाहाकार डेंगू के एक भी ऐसे गंभीर लक्षण भी नही दिख रहे हैं लेकिन जाँच में डेंगू और प्लेटलेट्स डाउन दिखा रहा है। बंदा बोल रहा है बतिया रहा है लेकिन प्लेटलेट्स जानलेवा स्तर की रिपोर्ट में दिखा रहा है।

हर व्यक्ति का शरीर 21 दिन पर नई ब्लड सेल्स बनाता है उस अवस्था में महीने में एक बार प्लेटलेट्स कम होती ही है। अमूमन ऐसी प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति चालीस साल के बाद होती है जिसमे प्लेटलेट्स का स्तर गिरता है तो जानलेवा होजाता है। इस बार डेंगू में बच्चों से लेकर जवान तक प्लेटलेट्स गिर रही है। आख़िर मच्छर का लार्वा इतना ख़तरनाक़ कैसे होगया ?

डेंगू पहले भी होते थे लेकिन ये भयानक स्थिति नहीं रहती थी। पूरा ज़िला डेंगू की चपेट में है जहां सुन रहे डेंगू, डेंगू। मुझे तो ये संयोग कम प्रयोग ज़्यादा लग रहा है। मेडिकल सिंडिकेट स्कैम लग रहा। अगर अभी से जवानों का प्लेटलेट्स कम होने लगा है तो ये बहुत गंभीर स्थिति है।

हमारी इम्युनिटी इतनी कमज़ोर तो नही है। हर भारतीय मसालों का उपयोग चाप के कर रहा है जो कि एक तरह की औषधी ही है। सब कुछ खाने पीने के बाद भी अगर इतनी कमज़ोर इम्युनिटी है , या तो हमे नकली खाद्य सामग्री मिल रही या नकली दवा दी जा रही है जो हमे फ़ायदा कम नुक़सान ज़्यादा कर रही है।

ये डेंगू मुझे क़ुदरती कम मशीनरी ज़्यादा लग रहा है।



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