संपादक ने ना ढूंढा तिन पाइयां, इंटरव्यू में रिपोर्टर फेल

बहुत सोचा कि इस पोस्ट को लिखूं या न लिखूं। पर दिल नहीं माना, शेयर करता हूं। वाकया हमारे एक पत्रकार मित्र से जुड़ा है। इंटरव्यू देने गए थे, एक नामचीन संस्था में। एक नामी गिरामी संपादक ने इंटरव्यू लिया। भाई रिजेक्ट हो गए। वजह उनमें वह बात नहीं थी जो संपादक ढूढ़ रहे थे। अब वह संपादक तलाश क्या रहे थे सुनिए, इधर उधर के सवालों के बाद मुख्य सवाल-राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय एक ब़ड़े नेता के संदर्भ में –

संपादक- आप उन्हें जानते हैं.

रिपोर्टर- जी जानता हूं..

संपादक- तो फिर वह कितनी बार आपके घर और आप उनके घर खाना खाने गए

रिपोर्टर- सर ऐसी जान पहचान नहीं है। खबरों के सिलसिले में मुलाकात होती है और वह मुझे जानते हैं।

संपादक असंतुष्ट- फिर यही सवाल यूपी के एक कद्दावर नेता के बारे में (इस वक्त विपक्ष में हैं)। रिपोर्टर का जवाब फिर वही- परिचय है, एक दूसरे के घर पर खाना खाने वाली घनिष्ठता नहीं है।

नतीजा–पत्रकार मित्र बैरंग लौटा दिए गए। उनमें वह स्पार्क नहीं थी, जिसकी जरूरत संपादक ( अगर यह शब्द उनके लिए माकूल हो तो) को थी।

( जानबूझकर न संस्था का नाम लिखा और न नेताओं का, पर वाकया सौ फीसदी सच है)।

what a shame!! probably he needed a broker in disguise of a journalist

प्रांशु मिश्रा के एफबी वाल से

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Comments on “संपादक ने ना ढूंढा तिन पाइयां, इंटरव्यू में रिपोर्टर फेल

  • sanju singh says:

    Jhooth kahe likhte ho…..naam likho, jagah likho…khli fekto ho…waise hi…..jab naam nai likh sakte, jagah nahi likh sakte, sansthaan ka naam nhai likh sakte to fir kya likh sakte ho..bab ji ka thullu…aayaa bada patrkaar banane….

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