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सुख-दुख

एकता कपूर को “पद्मश्री” स्मृति ईरानी की खोज करने के लिए दिया गया है!

राजीव तिवारी-

तस्वीर बोलती है…. पद्मश्री तो इन दोनों को उसी दिन मिल गया था! अब सिर्फ़ औपचारिकता पूरी की जा रही है। जेनुइन लोगों को अवॉर्ड देने के कारण मोदी सरकार की प्रशंसा हो रही थी पर इन दोनों को अवॉर्ड देकर सब गुड़ गोबर कर दिया।

रत्नेश पांडेय-

कुछ साल पहले हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं दो बालाओं (पहले) के साथ फोटो खिंचाई थी और आज इन्हीं दो भारतीय नारियों को पदमश्री से नवाजा गया है कुछ तस्वीरें भी बोलती हैं।

ममता मल्हार-

कंगना राणावत बड़ी बेगैरत निकलीं… तुम तो भीख की आजादी पर जी रहीं थीं। क्या देशभक्ति का चरम यही है कि सारे आजादी के रणबांकुरों के संघर्ष को भुलाकर आजकल आजादी की नई परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं? कभी कोई कहता है आजादी 99 साल की लीज पर मिली थी तो तुम जैसे लोग उसे भीख में मिली आजादी बता रहे हैं। ये जो एंकर महोदया बैठी हैं ये भी तुम्हारी बात पर मुस्कुरा रही हैं। देशभक्ति के अब नए पैमाने क्या हैं? देश को शर्मिंदा करो और उन बलिदानियों के बलिदान को भुलाकर अल्ल-बल्ल कुछ भी बक देना। इस बार पद्म अवार्ड वाकई हीरे लोगों को दिए गए, पर तुम जैसे कंकड़-पत्थरों ने चांद में दाग का काम किया। शर्मनाक।

अनुपम-

कंगना पर भड़कने और गुस्सा करने में अपनी ऊर्जा न खपाएं मित्रों! क्योंकि जिस बेग़ैरत को राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री तक ‘भीख’ में मिल जाता हो, भारत की आज़ादी को लेकर उसके विचार तो ऐसे ही होंगे न?

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