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‘ईटीवी भारत’ के हर डेस्क से 80 से 90 फीसदी मीडियाकर्मी हटाए गए!

संजय झा-

ईटीवी भारत के हर डेस्क पर लगभग 80 से 90 फीसदी कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। इस बारे में मेरी पक्की जानकारी नहीं है।

यह आंकड़ा वहां काम करने वाले लोगों ने बताया है। सुन रहा हूँ कि डेस्क इंचार्ज और शिफ्ट इंचार्ज को छोड़कर कुछ ही सौभाग्यशाली कर्मचारी हैं जो बच गए हैं। ऐसी आशंका है कि अब अगला नंबर डेस्क इंचार्ज और शिफ्ट इंचार्ज लोगों का है।

इससे पूर्व लगभग छह महीने पहले ईटीवी ने अपने लगभग रिपोर्टरों को या तो स्टिंगर बना दिया है या उन्हें निकाल फेंका है। तब भी कोई विशेष हंगामा नहीं हुआ था।

अबकी बारी आउटपुट की है। अभी भी कुछ होगा इसकी उम्मीद नहीं ही है। सुनने में आया है कि रामोजी फ़िल्म सिटी की खस्ता हालत होने की वजह से संस्थान की ऐसी हालत हुई है। इसलिए भारी पैमाने पर कर्मचारियों की छटनी हुई है।

जहां तक मुझे पता है ईटीवी भारत मार्च 2019 में लांच हुआ था। हालांकि इस संस्थान पर काम जनवरी 2018 या उससे पहले से ही हो रहा था।

अब मैं यह नहीं समझ पा रहा कि साढ़े तीन बरस में अगर संस्थान प्रॉफिटेबल नहीं बनाया जा सकता तो इसकी जिम्मेदारी वहां बैठे अधिकारियों की क्यों नहीं है? क्यों अभी भी हर महीने मोटी पगार हड़पने वाला मैनेजमेंट डटा हुआ है और पत्रकारों को निकाला जा रहा है।


एक मीडियाकर्मी ने भड़ास तक मेल से ये जानकारी पहुँचाई है

ETV Bharat से थोक में निकले जा रहे कर्मचारी…

ETV Bharat के कर्मचारियों में इन दिनों डर का माहौल है. कब किसको HR बुला ले और हाथ में रिलीविंग लेटर थमा दे, कोई भरोसा नहीं. कुछ लोगों ने इसी महीने ज्वाइन किया था लेकिन सैलरी के बदले रिलीविंग थमा दिया गया.

संस्थान में कम सैलरी वाले कर्मचारियों को थोक में निकाला जा रहा है. हर डेस्क से 7 से 8 लोग निकाले गए हैं. हैरानी की बात ये है कि उन्हें भी निकाला जा रहा है, जिनकी नियुक्ति एक महीने पहिले हुई है. अभी उनकी एक महीने की सैलरी भी नहीं आई और उनसे रिजाइन ले लिया गया.

बात करें पदोन्नति की तो चार साल में सिर्फ एक increment मिला है. वहीं जिन लोगों को एक साल के लिए ट्रेनी बनाकर लाया गया था, दो साल बाद भी परिचय पत्र पर ट्रेनी ही लिखा हुआ है और सैलरी भी समान ही है.
अब यह संस्थान चलता रहेगा या बन्द होगा ये तो समय ही बताएगा, लेकिन जिन लोगों को निकाला गया है, उनके सामने घना अंधकार है और भविष्य खतरे में है.

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3 Comments

3 Comments

  1. छटनी का शिकार युवा

    June 28, 2021 at 4:19 pm

    संस्थान के अधिकारियों ने ईटीवी भारत का बेड़ा गर्क किया, यही नहीं रामोजी राव को भी अंधेरे में रख रखा हैं. करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए गए. इसके अलावा चाटुकार लोगों को बचाया गया है. लेकिन गाज छोटे कर्मचारियों पर गिराई गई. ये संस्थान हद से ज्यादा कन्फ्यूज हैं इन्हें खुद नहीं पता कि आगे क्या फैसला करना है 3 साल बाद भी ट्रॉयल मॉड पर ही चल रहा है.

    • Bhupendra

      June 29, 2021 at 5:30 pm

      लगभग 3 साल तक इस संस्थान में काम किया लेकिन अब रिपोर्ट्स की हालत भी काफी खराब कर दी है। सिर्फ वैल्यू खबर लगाने का कहा है, ओर एक दिन में सिर्फ 100 खबरे ही लगाई जाएगी, ऐसे में काम कैसे करे। गलती ऊपर वाले लोगो ओर मैनेजमेंट की है जो सही तरीके से अपनी ड्यूटी नही कर पाए। ऐसे में अब रिपोर्ट्स ओर स्ट्रिंगर्स का भविष्य खतरे में है।

  2. ex employee

    July 5, 2021 at 10:11 am

    अगर मैनेजमेंट वाले एडिटोरियल कंटेंट में अपना नाक घुसाएँ तो क्या होगा। जिस मैनेजर को कंपनी के लिए बिज़नेस लाना था वो उसको छोड़ कर बाकि सब काम करता हैं.जो जिंदगी में एक रिपोर्ट नहीं लिखे हैं वे स्टोरी के बारे में ज्ञान देते हैं। रामोजी रओ को भी अँधेरे में रखते हैं। .वहां के अच्छे अच्छे पत्रकार जो की अपने करियर में अपना नाम किये थे इसी कारण छोड़ कर चले गए चुपचाप।इन मैनेजरों को नहीं हटाने से इस कंपनी का कुछ नहीं हो सकता।

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