Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

बहनजी हार का कारण खुद को बतातीं तो समर्थक टूट जाते, इसलिए EVM को दुश्मन बनाया!

मायावती के निशाने पर ईवीएम के मायने… राजनीति में अक्सर ईवीएम को मोहरा बना दिया जाता है…  बीएसपी की हार से नाखुश दिख रहे दलित हितों को प्रमुखता से उठाने वाले एक संपादक ने मुझसे निजी बातचीत में बहन मायावती जी रवैये पर खासी नाराजगी जाहिर की. कहा, हार के कारणों की सही से समीक्षा नहीं होगी, तो ईवीएम को गलत ठहराने से बहुजन समाज पार्टी का कुछ भी भला नहीं होगा. बहन जी से मिलकर सबको सही बात बतानी चाहिए, भले ही उसमें अपना घाटा ही क्यों ना हो जाये. मैंने अपने संपादक मित्र से इस मामले पर एक घटना का जिक्र किया. जिसे आपके लिए भी लिख रहा हूं.

मायावती के निशाने पर ईवीएम के मायने… राजनीति में अक्सर ईवीएम को मोहरा बना दिया जाता है…  बीएसपी की हार से नाखुश दिख रहे दलित हितों को प्रमुखता से उठाने वाले एक संपादक ने मुझसे निजी बातचीत में बहन मायावती जी रवैये पर खासी नाराजगी जाहिर की. कहा, हार के कारणों की सही से समीक्षा नहीं होगी, तो ईवीएम को गलत ठहराने से बहुजन समाज पार्टी का कुछ भी भला नहीं होगा. बहन जी से मिलकर सबको सही बात बतानी चाहिए, भले ही उसमें अपना घाटा ही क्यों ना हो जाये. मैंने अपने संपादक मित्र से इस मामले पर एक घटना का जिक्र किया. जिसे आपके लिए भी लिख रहा हूं.

कांग्रेस ने 13वीं लोकसभा चुनाव (1999) में मिली हार की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई. सोनिया गांधी जी चर्चा में तमाम दिग्गज कांग्रेसियों की राय ले रही थी. बात आगे बढ़े, उससे पहले बता दिया देना उचित होगा कि पहली बार लोकसभा चुनाव में ईवीएम को आंशिक तौर पर 1999 में इस्तेमाल शुरू किया गया था. उस समय विदेशी मूल का मुद्दा 12वीं लोकसभा में एक मत से गिरी अटल सरकार के वरदान साबित हुआ. जिसके कारण ही अटल सरकार या कहें पहली गैर-कांग्रेसी सरकार अपने 5 साल पूरा करने में कामयाब रही.

मंच में कांग्रेस के तमाम ऊंची जाति के नेता कांग्रेस की हार समीक्षा में अपनी ऊर्जा इस तरह खपा रहे थे कि कहीं भी हार का ठीकरा सोनिया गांधी पर नहीं फूटे. किसी ने हार का कारण चुनाव में गलत टिकट बटवारे को बताया, किसी में संगठन में अनुशासनहीनता को जिम्मेदार ठहराया, तो किसी चुनाव में युवाओं की भागीदारी की कमी को लेकर भी सवाल खड़ा किया. इसी बीच सोनिया जी ने पूर्वांचल के दिग्गज कांग्रेसी दलित नेता महावीर प्रसाद जी से पूछा कि आपकी राय में कांग्रेस की हार के लिए कौन जिम्मेदार है.

महावीर प्रसाद जी ने कहा कि हार का एकमात्र कारण ईवीएम है. जिसमें वोट डालने पर बीजेपी को एक की जगह दो वोट मिलते थे. दलित नेता की बेतुकी बात सुनकर तमाम दिग्गज और ऊंची जाति के कांग्रेसी नेता व्यंग्य से हंसे और हार के कारणों को जानने के लिए लिए दूसरे नेता की बारी आ गई. ऊंची जाति के नेताओं की व्यंग्यात्मक हंसी महावीर प्रसाद जी के एक समर्थक को काफी खली. चर्चा खत्म होने के बाद जैसे ही महावीर प्रसाद जी बाहर निकले, करीबी समर्थक ने बिलखकर बोला, बाबूजी आप भी गजब करते हैं, आपकी राय को तमाम दिग्गज नेता उपहास में उड़ा दिये. ऐसी राय आपको नहीं जतानी चाहिए थी.

इतना सुनते ही टोपी वाले नेता और बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध महावीर प्रसाद जी गुस्से में बोले, मुझे राजनीति मत सिखाओ. हार का कारण क्या है, किसको नहीं मालूम है… सबको मालूम है कि हार का कारण सोनिया जी ही हैं. उनके विदेशी मूल का मुद्दा ही बड़ा कारण है. लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन. मैं फिर कहता हूं कि ईवीएम ही हार की जिम्मेदार है.

अब समर्थक सन्न. उसने महावीर प्रसाद जी के सामने श्रद्धा से हाथ जोड़ लिये.

दिवंगत महावीर प्रसाद जी की तरह बहन मायावती जी को भी अच्छी तरह मालूम है कि 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में किस कारण से बहुजन समाज पार्टी चुनाव हारी. लेकिन हार की जिम्मेदारी बहन जी के खुद लेने से क्या करोड़ों बीएसपी के वोटरों का मनोबल नहीं गिरेगा? इस सवाल जवाब के बाद मेरे साथी संपादक के चेहरे शांति भाव से खिल गया. जय भीम के नारे संग वो अगली रणनीति को सफल बनाने के लिए बढ़ चले.

नोट : इस लेख का मकसद ईवीएम मशीन को क्लीनचिट देना बिल्कुल नहीं है.

लेखक प्रसून शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई न्यूज चैनलों के एडिटर इन चीफ रह चुके हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.


प्रसून शुक्ला का लिखा ये भी पढ़ सकते हैं…

 

xxx

xxx

xxx

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन