यूपी में बीजेपी की सियासी बेचैनी : अखिलेश, माया और राहुल मिल कर दे सकते हैं मात!

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार जीत का परचम फहराती जा रही है। यूपी में उसकी सफलता का ग्राफ शिखर पर है, लेकिन शिखर पर पहुंच कर भी बीजेपी एक ‘शून्य’ को लेकर बेचैन नजर आ रही है। उसे चुनावी रण में हार का अंजाना सा डर सता रहा है। इस डर के पीछे खड़ी है अखिलेश-माया और राहुल की तिकड़ी, जो फिलहाल तो अलग-अलग दलों से सियासत कर रहे हैं, मगर मोदी के विजय रथ को रोकने के लिये तीनों को हाथ मिलाने से जरा भी गुरेज नहीं है। बीजेपी का डर लखनऊ से लेकर इलाहाबाद तक में साफ नअर आता है। असल में 2014 के लोकसभा चुवाव मे मिली शानदार जीत का ‘टैम्पो’ बीजेपी 2019 तक बनाये रखना चाहती है।

यह तभी हो सकता है जब बीजेपी के किसी सांसद के इस्तीफे की वजह से बीजेपी को उप-चुनाव का सामना न करना पड़ जायें। बात यहां यूपी के उप-मुख्यमंत्री और फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्या की हो रही है। मौर्या को अगर डिप्टी सीएम बने रहना है तो छह माह के भीतर (नियुक्ति के समय से) उन्हें विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना पड़ेगा। इसके लिये सबसे पहले केशव को संासदी छोड़ना पड़ेगी। सांसदी छोड़ेगें तो जिस (फूलपुर) लोकसभा सीट का केशव प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहा चुनाव भी होगा और चुनाव में बीजेपी को जीत नहीं हासिल हुई तो विपक्षी ऐसा माहौल बना देंगे मानों यूपी में बीजेपी शिखर से शून्य पर पहुंच गई है। बात यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। मोदी ने यूपी में जो चमत्कार किया था, उस पर भी सवाल खड़े होंगे? ऐसे में पूरे देश में गलत संदेश जायेगा, जिसका असर 2019 के लोकसभा चुनाव तक पर पड़ सकता है।

फूलपुर लोकसभा चुनाव के पुराने नतीजे भी बीजेपी में भय पैदा कर रहे हैं। फूलपुर संसदीय सीट से तीन बार पंडित जवाहर लाल नेहरू, दो बार विजय लक्ष्मी पंडित से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह तक चुनाव जीत चुके हैं। 1952 से लेकर 2009 तक बीजेपी का यहां कभी खाता नहीं खुला। 2009 के लोकसभा चुनाव में तो यहां से बीजेपी को पांयवें नबर पर ही संतोष करना पड़ा था और उसे मात्र 8.12 प्रतिशत वोट ही मिले थे। यहां तो कभी राम लहर तक का असर नहीं दिखा। हॉ, 2014 के चुनाव में जरूर चमत्कारिक रूप से मोदी लहर में यह सीट बीजेपी की झोली में आ गई थी। इसी लिये यह कयास लगाये जा रहे हैं कि बीजेपी आलाकमान केशव को सासदी से इस्तीफा दिलाने की बजाये उन्हें डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा दिलाकर दिल्ली में कहीं समायोजित कर सकती है।

वैसे, तमाम कयासों के बीच कहा यह भी जा रहा है कि बीजेपी की चिंता बेकार की नहीं है। असल में यहां चुनाव की नौबत आती है तो गैर भाजपाई दल यहां अपना संयुक्त प्रत्याशी उतार सकती है। फूलपुर संसदीय सीट पर चुनाव की नौबत आती है तो बसपा सुप्रीमों मायावती भी विपक्ष की संयुक्त प्रत्याशी बन सकती हैं। मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। वह लोकसभा पहुंच कर मोदी को दलितों सहित सामाजिक समरसता के तमाम मुद्दों पर आमने-सामने खड़े होकर घेरना चाहती हैं, जिसका सीधी असर यूपी की भविष्य की सियासत पर पड़ेगा। कुछ लोग इससे इतर यह भी तर्क दे रहे है कि बीजेपी आलाकमान योगी को पूरी स्वतंत्रता से काम करने की छूट देने का विचार कर रही है। मगर इसके लिये वह पिछड़ा वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहता है। पार्टी नेतृत्व का केशव पर भरोसा और पिछड़े वर्ग से होने के नाते भी उनके दिल्ली जाने की खबरों को बल मिलता दिख रहा है।

केशव प्रसाद के भविष्य को लेकर एक-दो दिन में तस्वीर साफ हो जाएगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 29 जुलाई को तीन दिवसीय प्रवास पर लखनऊ आ रहे हैं। वह अपने प्रवास के दौरान एक तरफ सरकार और संगठन के बीच समन्वय बैठाने की कोशिश करेंगे तो दूसरी तरफ 2019 के लोकसभा चुनाव के अभियान की बुनियाद भी रखेंगे। शाह पहली बार तीन दिन के प्रवास पर आ रहे है। इसके कई संकेत हैं। तीन दिन में शाह 25 बैठकें करेंगे। बताते चलें की हाल में पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान सांसदों ने योगी के मंत्रियों की शिकायत की थी। मोदी ने इसे काफी गंभीरता से लिया थां। इसका प्रभाव भी शाह के दौरे पर दिखाई पड़ सकता है।

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव को लेकर यही संभावना जताई जा रही है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में ही विधानसभा की किसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। दूसरे डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को विधान परिषद भेजा जा सकता है। इस समय योगी, मौर्य और डॉ.शर्मा सहित परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह और वक्फ व विज्ञान प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री मोहसीन रजा भी विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं है।

योगी और मौर्य की सांसदी फिलहाल उप-राष्ट्रपति चुनाव तक तो बरकरार रहेगी ही, लेकिन 19 सितंबर से पहले दोंनो को विधानमंडल के किसी सदन की सदस्यता लेनी ही पड़ेगी, लेकिन विधान सभा और विधान परिषद की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वर्तमान सदस्यों से त्याग पत्र दिलाए बिना इन सबके समायोजन की स्थिति दिखाई नहीं दे रही। भाजपा विधायक मथुरा पाल और सपा एमएलसी बनवारी यादव के निधन के चलते हालांकि विधानसभा और विधान परिषद में एक- एक स्थान रिक्त है, पर इन सीटों की स्थिति देखते हुए यहां से मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री या राज्यमंत्रियों मंे किसी को लड़ाने की संभावना दूर- दूर तक नहीं दिखती। ऐसे में संभावना यही है कि भाजपा नई सीटें खाली कारकर इन सबका समायोजन कराएगी।

अखिलेश की चुटकी
केशव के दिल्ली भेजे जाने की चर्चा के बीच सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि अभी तो तीनों मिले नहीं, फिर क्यों घबरा गए। अखिलेश ने केशव प्रसाद मौर्य का नाम लिए बगैर कहा,सुना हैं कि आप लोग किसी को दिल्ली भेज रहे है। अभी तो समझौता नहीं हुआ है फिर क्यों घबरा गए। अगर हम तीनों (सपा, बसपा व कांग्रेस) एक हो जाएं तो आप कहां ठहरोगे, यह आप समझ सकते हो।

लेखक संजय सक्सेना लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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गाजियाबाद में छुटभैये भाजपा नेता ने अखबार को दी गालियां और पत्रकार को दी धमकी (सुनें टेप)

इंदिरापुरम (गाजियाबाद) भाजपा के मंडल अध्यक्ष नवनीत मित्तल ने ‘शिप्रा दर्पण’ नामक अखबार निकालने वाले पत्रकार नवीन द्विवेदी को एक खबर छापने पर जमकर धमकाया. नवीन द्विवेदी ने इस बारे में भड़ास को बताया कि वह सम्पादक हैं, शिप्रा दर्पण समाचार पत्र के. कल शाम 5.00 बजे इंदिरापुरम (गाजियाबाद) भाजपा के मंडल अध्यक्ष नवनीत मित्तल का फोन आया. उन्होंने मुझे गालियां देना शुरू कर दिया और फिर मुझे जान से मारने की धमकी भी दी.

साथ ही अखबार शिप्रा दर्पण को भी गालियां दी. नवीन के मुताबिक वे अत्यंत भयभीत हैं और उन्हें आशंका है कि मुझे किसी भी समय यह बाहुबली मार सकता है. नवीन ने पुलिस में लिखित शिकायत दे दी है. वे धमकी को देखते हुए इंदिरापुरम गाजियाबाद क्षेत्र छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक वे इंदिरापुरम में हैं, अगर उनका एक्सीडेंट भी होता है तो इसके लिए जिम्मेदार भाजपा मंडल अध्यक्ष नवनीत मित्तल माने जाएं.

टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://youtu.be/ioweiDrwNKw

नीचे है वो खबर जिसके छपने के बाद भाजपा नेता को गुस्सा आ गया…

इंदिरापुरम भाजपा नेता और आरएसएस के अधिकारी के बीच तीखी तू..तू..में…में..

Naveen Dwivedi –
शिप्रा दर्पण!

जिस राज्य में विपक्ष नही होता या कमजोर होता हैं उस राज्य सत्ताधारी दल की विचारधारा के लोग कभी कभी विपक्ष की भूमिका अदा कर लेते हैं, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम क्षेत्र में यह माहौल साफ़ तौर पर देखा गया जब इंदिरापुरम के बीजेपी के मंडल अध्यक्ष नवनीत मित्तल और आरएसएस के अधिकारी अविनाश चंद्र के बीच तीखी नोक झोंक हुई मुद्दा था बिहारी मार्केट।

कुछ समय से स्थानीय लोग अवैध बने बिहारी मार्केट का विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि खुले में मॉस व सब्जी और अन्य गलत कार्य इस अवैध बाजार में होते है जिसके चलते क्षेत्र में चोरी और स्नेचिक की वारदात बढ़ी है और बिहारी मार्केट के विरोध के समर्थन में आरएसएस के अधिकारी अविनाश चन्द्र कर रहे थे मगर बीजेपी के मंडल अध्यक्ष ने एक चौपाल पर एक बैठक के दौरान बिहारी मार्केट का समर्थन किया और कहा कि बिहारी मार्केट को हटने नही देना चाहिए वही उपस्थित बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता संजय सिंह भी नवनींत मित्तल के सुर में सुर मिलाते नज़र आये और कहा कि बिहारी मार्केट के व्यापारियों को वैकल्पिक स्थान मिलना चाहिए।

वही दूसरी और स्थानीयजनों और आरएसएस अधिकारी अविनाश चन्द्र ने इस बात का विरोध किया कि वह अवैध बाजार है जिसके चलते रात में महिलाएं सड़क पर चल भी नही पाती खुले में गालियां दी जाती है और खुले में मांस की बिक्री होती हैं कुछ स्थानीयजन यहाँ तक कह गए की सत्ता आते ही भाजपा के कार्यकर्ताओं में सपा का रंग दिखने लगा हैं।हालांकि बात बिगड़ने की स्थति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने सम्भाल लिया।

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लखनऊ के पत्रकार कबाब और रोगन जोश खाते थे इसलिए पांच कालीदास मार्ग का शुद्धीकरण जरूरी!

Ambrish Kumar : लोगों को पता नहीं होगा अखिलेश यादव पांच कालीदास में नहीं रहते थे. मायावती रहती थीं. पर दोनों के दौर में पत्रकारों के चक्कर में प्रेस कांफ्रेंस के बाद खाने में कई बार कबाब से लेकर रोगन जोश तक परोसा जाता था. ऐसे में किसी संन्यासी के प्रवेश से पहले शुद्धिकरण तो जरूरी है. शम्भुनाथ शुक्ल का सुझाव भी ठीक है कि आसपास के सभी रिहाइसी इलाकों को गोबर और गोमूत्र से शुद्ध किया जाना चाहिए. वैसे सारे अतिथि गृह भी इसमें शामिल किये जाएं.

यूपी के वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Amitaabh Srivastava मांसाहार के बाद शुद्धिकरण वाले तर्क से तो चौक अमीनाबाद नखास और अकबरी गेट जैसी जगहों पर गंगाजल के टैंकर रोज़ाना भिजवाने पड़ेंगे कई महीनों तक। हालांकि मुख्यमंत्री जी के निवास से ये सब दूर हैं लेकिन फिर भी माहौल में शुद्धता, साफ सफाई तो रहनी ही चाहिए। टुंडे कबाबी के यहां अब शायद करमकल्ले की टिकिया मिलने लगे शुद्धिकरण के inagural offer के तौर पर।

Pavan Kumar Yadav Sir JI a Jo bjp ke lakho karykarta hai Jo meet bhakosate hai kya unka bhi shudhi karan hoga

Ambrish Kumar व्यापक शुद्धिकरण कार्यक्रम हेतु मीडिया के वरिष्ठ पत्रकारों की मदद ली जानी चाहिए Shambhunath Nath

Shambhunath Nath अब अपन तो अदना-से पत्रकार। न लीपने के न पोतने के। और यूँ भी मैं तो प्याज़-लाहशुन तक नहीं खाता सो अपन क्या कहें।

Ambrish Kumar आप संपादक रहे हैं, इस समय तो गोरखपुर के स्टिंगर भी प्रभावशाली माने जा रहे हैं. अपने वाले ने भी पूछा था- भाई साहब,महाराज से कुछ कहना हो तो बताएं. दस साल से ज्यादा का साथ है.

Amitaabh Srivastava लखनऊ के खान पान में तो वैसे भी इस तरह के व्यंजनों का चलन रहा है जो होते शाकाहारी हैं लेकिन उनका ज़ायका मांसाहार को भी मात करता है. मिसाल के तौर पर ज़मीकंद और कटहल के कबाब – कई बार गोश्त से फर्क बताना मुश्किल हो सकता है. अब्दुल हलीम शहर की किताब ‘गुजिश्ता लखनऊ’ में लखनऊ के दिलचस्प खान पान का विस्तार से ज़िक्र मिलता है. राज्य सरकार के संस्कृति विभाग को नयी सरकार और उसके मुखिया को ये सब भी बताना चाहिए. आखिरकार संस्कृति कुल मिला कर राजनीति का ही हिस्सा है.

Deepu Naseer मुलायम शाकाहारी हैं, अखिलेश भी हैं क्या? अटल जी नॉनवेज के शौक़ीन थे, मोदी शाक़ाहारी हैं.. 7RCR का शुद्धिकरण हुआ था क्या?

Shriram Sen घृणा पाप से करो पापी से नही

Sushil Kaul आपने जानकारी दी तो पता चला कि बहन मायावती जी पांच कालीदास मार्ग में रहतीं, हम भी जब अपने नये मकान मे हमने भी वही किया था, जो योगी जी कर रहे, आपकी जानकारी से शुद्धीकरण का महत्त्व अब समझ आ रहा है। हाँ एक बात है, पत्रकार जो शाकाहारी के साथ-साथ मांसाहारी हैं, उनके लिए अलग भवन की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

Santosh Singh भाई उनका घर है जो मर्जी करें दूसरों को क्या?

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यूपी में भ्रष्ट नौकरशाहों का गैंग भाजपा राज में भी मलाई चाटने-चटाने के लिए तैयार : सूर्य प्रताप सिंह

Surya Pratap Singh : उत्तर प्रदेश की ‘नौकरशाही के भ्रष्ट चेहरे’ अपनी पसंद के मुख्यमंत्री व मंत्री बनवाने में लगे! उत्तर प्रदेश में कुछ नौकरशाहों की ‘भ्रष्ट लेकिन धनाढ़्य’ गैंग (CAUCUS) की आज ये हिम्मत / हस्ती है कि दिल्ली से लेकर नागपुर तक अपने पसंद के मुख्यमंत्री व मंत्री बनवाने के किए पैरवी में लगे हैं…. पिछली दो सरकारों में जिस नौकरशाह गैंग की तूती बोलती थी वे ‘पैसे व रसूक़’ के बल पर ‘मलाई चाटने व चटाने’ के लिए फिर से तैयार हैं…

सम्भावित नामों में १-२ चेहरे इसी गैंग की पसंद है…. इस गैंग के दो सदस्य उत्तर प्रदेश में शपथ ग्रहण समारोह की व्यवस्था में भी लगे व भाजपा नेताओं की चमचागिरी करते समारोह स्थल पर देखे गए… मित्रों, शायद आप में से कुछ लोग जिन्हें इस गैंग की ताक़त का अहसास नहीं है, मेरी बात पर विश्वास नहीं कर रहे…. विश्वास करें! मेरी जानकारी अत्यंत सटीक है …

उत्तर प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री का चयन ‘नौकरशाही की चयन समिति’ ने किया…. नाम लगभग तय! उ० प्र० के मुख्यमंत्री के चयन में उत्तर प्रदेश के दिल्ली में तैनात ३ बड़े अधिकारियों की अहम भूमिका मानी जा रही है …लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का मतलब अब जनता की पसंद नहीं बल्कि जो नौकरशाही को पसंद हो, वही भविष्य में बनेगा उ०प्र० का मुख्यमंत्री….इन ३ नौकरशाहों में से दो के उ० प्र० की पूर्व की दो सरकारों (सपा व बसपा) में नॉएडा में तैनात रहे बड़े अधिकारियों (जिन्होंने भ्रष्ट इंजीनियर यादव सिंह को बचाया है) व उत्तर प्रदेश के पूर्व सरकार के महा बदनाम बड़े लंबे-२ से भ्रष्ट IAS से भी गरमा-गरम सम्बंध बताए जा रहे हैं….

इन नौकरशाहों की टोली ने CM पद के कई ‘लोकप्रिय’ दावेदारों की छुट्टी करा दी….. तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा ….शायद इनमें से कई के साथ इन भ्रष्ट नौकरशाहों की दाल नहीं गलती…. अब ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उ०प्र० का आने वाला मुख्यमंत्री Proxy CM सिद्ध न हो…..

यूपी के चर्चित आईएएस अधिकारी रहे और अब भाजपा नेता के रूप में सक्रिय सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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बहनजी हार का कारण खुद को बतातीं तो समर्थक टूट जाते, इसलिए EVM को दुश्मन बनाया!

मायावती के निशाने पर ईवीएम के मायने… राजनीति में अक्सर ईवीएम को मोहरा बना दिया जाता है…  बीएसपी की हार से नाखुश दिख रहे दलित हितों को प्रमुखता से उठाने वाले एक संपादक ने मुझसे निजी बातचीत में बहन मायावती जी रवैये पर खासी नाराजगी जाहिर की. कहा, हार के कारणों की सही से समीक्षा नहीं होगी, तो ईवीएम को गलत ठहराने से बहुजन समाज पार्टी का कुछ भी भला नहीं होगा. बहन जी से मिलकर सबको सही बात बतानी चाहिए, भले ही उसमें अपना घाटा ही क्यों ना हो जाये. मैंने अपने संपादक मित्र से इस मामले पर एक घटना का जिक्र किया. जिसे आपके लिए भी लिख रहा हूं.

कांग्रेस ने 13वीं लोकसभा चुनाव (1999) में मिली हार की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई. सोनिया गांधी जी चर्चा में तमाम दिग्गज कांग्रेसियों की राय ले रही थी. बात आगे बढ़े, उससे पहले बता दिया देना उचित होगा कि पहली बार लोकसभा चुनाव में ईवीएम को आंशिक तौर पर 1999 में इस्तेमाल शुरू किया गया था. उस समय विदेशी मूल का मुद्दा 12वीं लोकसभा में एक मत से गिरी अटल सरकार के वरदान साबित हुआ. जिसके कारण ही अटल सरकार या कहें पहली गैर-कांग्रेसी सरकार अपने 5 साल पूरा करने में कामयाब रही.

मंच में कांग्रेस के तमाम ऊंची जाति के नेता कांग्रेस की हार समीक्षा में अपनी ऊर्जा इस तरह खपा रहे थे कि कहीं भी हार का ठीकरा सोनिया गांधी पर नहीं फूटे. किसी ने हार का कारण चुनाव में गलत टिकट बटवारे को बताया, किसी में संगठन में अनुशासनहीनता को जिम्मेदार ठहराया, तो किसी चुनाव में युवाओं की भागीदारी की कमी को लेकर भी सवाल खड़ा किया. इसी बीच सोनिया जी ने पूर्वांचल के दिग्गज कांग्रेसी दलित नेता महावीर प्रसाद जी से पूछा कि आपकी राय में कांग्रेस की हार के लिए कौन जिम्मेदार है.

महावीर प्रसाद जी ने कहा कि हार का एकमात्र कारण ईवीएम है. जिसमें वोट डालने पर बीजेपी को एक की जगह दो वोट मिलते थे. दलित नेता की बेतुकी बात सुनकर तमाम दिग्गज और ऊंची जाति के कांग्रेसी नेता व्यंग्य से हंसे और हार के कारणों को जानने के लिए लिए दूसरे नेता की बारी आ गई. ऊंची जाति के नेताओं की व्यंग्यात्मक हंसी महावीर प्रसाद जी के एक समर्थक को काफी खली. चर्चा खत्म होने के बाद जैसे ही महावीर प्रसाद जी बाहर निकले, करीबी समर्थक ने बिलखकर बोला, बाबूजी आप भी गजब करते हैं, आपकी राय को तमाम दिग्गज नेता उपहास में उड़ा दिये. ऐसी राय आपको नहीं जतानी चाहिए थी.

इतना सुनते ही टोपी वाले नेता और बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध महावीर प्रसाद जी गुस्से में बोले, मुझे राजनीति मत सिखाओ. हार का कारण क्या है, किसको नहीं मालूम है… सबको मालूम है कि हार का कारण सोनिया जी ही हैं. उनके विदेशी मूल का मुद्दा ही बड़ा कारण है. लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन. मैं फिर कहता हूं कि ईवीएम ही हार की जिम्मेदार है.

अब समर्थक सन्न. उसने महावीर प्रसाद जी के सामने श्रद्धा से हाथ जोड़ लिये.

दिवंगत महावीर प्रसाद जी की तरह बहन मायावती जी को भी अच्छी तरह मालूम है कि 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में किस कारण से बहुजन समाज पार्टी चुनाव हारी. लेकिन हार की जिम्मेदारी बहन जी के खुद लेने से क्या करोड़ों बीएसपी के वोटरों का मनोबल नहीं गिरेगा? इस सवाल जवाब के बाद मेरे साथी संपादक के चेहरे शांति भाव से खिल गया. जय भीम के नारे संग वो अगली रणनीति को सफल बनाने के लिए बढ़ चले.

नोट : इस लेख का मकसद ईवीएम मशीन को क्लीनचिट देना बिल्कुल नहीं है.

लेखक प्रसून शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई न्यूज चैनलों के एडिटर इन चीफ रह चुके हैं. उनसे संपर्क prasoon001shukla@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.


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यूपी में इस वक्त प्रशासन नाम की चीज नहीं है, नकल माफिया कर रहे नंगा नाच : आईएएस सूर्यप्रताप सिंह

Surya Pratap Singh : उत्तर प्रदेश में नक़ल माफ़िया का नंगा नाँच…. नयी सरकार की ‘ट्रैंज़िशन-अवधि’ में उ० प्र० में प्रशासन नाम की चीज़ नहीं है…. भारी ‘जनादेश’ देकर भी नक़ल माफ़िया के सामने जनता बेबसी से ‘कौन होगा मुख्यमंत्री’ के खेल का मंचन देख रही है… नक़ल के लिए कुख्यात कौशाम्बी, इलाहाबाद में यूपी बोर्ड परीक्षा में धुंआधार नकल, यहां इमला बोलकर लिखाया गया एक-एक उत्तर… नीचे देख सकते हैं प्रमाण के तौर पर संबंधित वीडियो…

नकल के लिए बदनाम कौशांबी जिले मे इस बार 112 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला प्रशासन ने नकल विहीन परीक्षा करने का दिखावे पूर्ण दावा किया था लेकिन उसके दावे की हवा पहले दिन ही निकल गई। जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर जमकर नकल हुई। कक्ष निरीक्षक कहीं इमला बोलकर नकल कराते दिखे तो कहीं परीक्षार्थी की कापी भी लिखते दिखाई दिये। कहने को नकल रोकने के लिए सचल दस्ते परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे। सचल दल मे शामिल लोग महज खाना पूर्ति करके वापस लौट जाते रहे। जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए मीडिया के कैमरों मे कैद तस्वीरे हकीकत को बयां करने के लिए बहुत हैं। निम्न दो वीडियो देखें तो माजरा समझ में आ जाएगा ….

https://youtu.be/0vaUptWANMw

https://youtu.be/8rUviGRU4Ow

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आज आरंभ हुई उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षाओं में नक़ल का बोलबाला….. नयी सरकार के संकल्प को चुनौती! आपको याद हो की गोण्डा की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में व्याप्त नक़ल के अभिशाप के मुद्दे को उठाया था …इस वर्ष भी मैंने अपना नक़ल के विरुद्ध ‘सविनय सुचिशिक्षा अभियान’ यानि ‘नक़ल रोको अभियान’ चलाने का संकल्प लिया है…

मैं कल अलीगढ़ में आपने ‘नक़ल रोको अभियान’ के सम्बंध में गया था और अपने इस अभियान को इस वर्ष भी निजी प्रयासों के रूप में चालू रखने के लिए वालंटीर्स के साथ कार्ययोजना बनायी गयी…. आज इस अभियान के तहत मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, व हापुड़ जनपदों का भ्रमण पर हूँ। ज्ञात हुआ कि अलीगढ़ के नक़ल के लिए कुख्यात वीआईपी तहसील “अतरोली” में खुले आम सामूहिक नक़ल हुई। जब कि मेरे अभियान के अलीगढ़ में शुरुआत पर अलीगढ़ के अख़बारों के प्रतिनिधियों के पूछे जाने पर राजस्थान के राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने कल ही कहा था कि ‘अतरोली इस वर्ष अपने ऊपर से नक़ल के दाग़ की नहीं लगने देगा’…..परंतु आज यह सत्य साबित नहीं हुआ और अतरोली में धड़ल्ले से सामूहिक नक़ल हुई।

ज्ञात हो कि बोर्ड परीक्षा में पैसे देकर नक़ल से बोर्ड परीक्षा पास करने अतरोली में मिज़ोरम, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर तक के बच्चे आते हैं। नयी सरकार के लिए बोर्ड की परीक्षाओं में नक़ल रोकना बड़ी चुनौती बनेगी….. प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग के रूप में मैंने परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरा लगाने व नक़ल रोकने जे किए छात्रों, अभिववकों, अध्यापकों, प्रबंधकों की हर मंडल में बैठकें कर नक़ल के विरुद्ध अभियान चलाया था…. मात्र ३ महीने में ही सपा सरकार ने मेरा ट्रान्स्फ़र कर दिया था….. मैंने २५५ परीक्षा केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया था जिन्हें सपा सरकार ने मेरे ट्रान्स्फ़र के बाद बहाल कर दिया था। यदि नक़ल रोकने के लिए आने वाली सरकार नक़ल रोकने जे किए मेरे अनुभव का लाभ उठाना चाहती है तो युवाओं के जीवन जे हित में, मैं सहर्ष अपना योगदान देने के किए तैयार हूँ…..

यूपी कैडर के चर्चित आईएएस रहे और इन दिनों भाजपा नेता के रूप में सक्रिय सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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आजतक की अहमदाबाद ब्यूरो चीफ गोपी घांघर को पता था यूपी में भाजपा 300 से उपर सीट लाएगी!

Vikas Mishra : ये हैं गोपी घांघर। अहमदाबाद में हमारे चैनल की ब्यूरो चीफ। लंबे वक्त से गुजरात की राजनीति को करीब से देख रही हैं। पिछले दिसंबर महीने में एजेंडा आजतक में आई थीं, तब गोपी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटों का आकलन किया था। गोपी ने कहा था कि मोदी और अमित शाह यूपी में करामात करने वाले हैं, बीजेपी को तीन सौ के आसपास सीटें मिलेंगी।

मैंने कहा कि यहां तो बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। कुछ तर्क भी रखे मैंने। गोपी बोली-आप तर्क की बात कर रहे हैं, मैंने मोदी को गुजरात में 12 साल देखा है, मैं मोदी को जानती हूं। खैर, चुनाव के बाद यहां मेरे दफ्तर में सीटों के आकलन को लेकर शर्तें लग रही थीं। गोपी मुझसे बार-बार कह रही थी कि आप कम से कम 280 सीटों पर दांव लगाइए। मैंने डरते-डरते बीजेपी को 209 सीटें दी थीं। अब नतीजे आए तो गोपी सौ फीसदी सही साबित हुई। मान गए गोपी Gopi Maniar आपके आकलन को।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार विकास मिश्र की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से एक प्रमुख कमेंट इस प्रकार हैं….

Sanjay Dave गोपी मणीयार घांघर को मैं २००२ से जानता हूं, एक ही शहर के होने के नाते कई बार रीपोर्टिंग भी साथ साथ कि है, स्टोरी और स्थल कोई भी हो गोपी के अन्दर हंमेशा एक अलग सा आत्मविश्वास देखा है । मुझे बराबर याद है २००८ दिपेश-अभिषेक मौत मामला समय अहमेदाबाद स्थित आसाराम आश्रम कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के उपर आसाराम के गुंडों ने अचानक किए हमले समय प्रेग्रन्ट होने के बावजूद स्टोरी करने आई गोपी ने अपने शरीर के उपर लाठीया खाई लेकिन डटी रही पीछे नहीं हटी। हम सबको गोपी मणीयार-घांघर के उपर गर्व है ।

Vikas Mishra सही कहा आपने, गोपी हमारी जांबाज सेनानी है।

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