देशद्रोहियों की हत्या करने वाले सिपाही या अपराधी?

सरकार और सर्वोच्च न्यायालय को साफ करना चाहिए कि क्या कोई आम आदमी अगर देशद्रोहियों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार देता है, तो उसे देश का सिपाही माना जायेगा या अपराधी. क्योंकि अब सवाल देश की अखंडता का है. सरकार मौन है. न्यायपालिका के घर देर है. ऐसे में सवाल उठता है कि सेना में अपने बच्चे भेजने वाला किसान, मजदूर, फौजी और मध्यमवर्गीय नागरिक देश के बारे में अपमानजनक बातें क्यों बर्दाश्त करे? सरकार और न्यायपालिका की चुप्पी क्या देश के साथ विश्वासघात नहीं है? देश की अखंडता पर चोट क्यों बर्दाश्त किया जा रहा है? क्या व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर फिर से देश के विभाजन पर चर्चा होगी? ऐसे देशद्रोहियों को सीधे फांसी या गोली क्यों नहीं मारी जानी चाहिए? सवाल का जवाब चाहिए… सरकार.

बहनजी हार का कारण खुद को बतातीं तो समर्थक टूट जाते, इसलिए EVM को दुश्मन बनाया!

मायावती के निशाने पर ईवीएम के मायने… राजनीति में अक्सर ईवीएम को मोहरा बना दिया जाता है…  बीएसपी की हार से नाखुश दिख रहे दलित हितों को प्रमुखता से उठाने वाले एक संपादक ने मुझसे निजी बातचीत में बहन मायावती जी रवैये पर खासी नाराजगी जाहिर की. कहा, हार के कारणों की सही से समीक्षा नहीं होगी, तो ईवीएम को गलत ठहराने से बहुजन समाज पार्टी का कुछ भी भला नहीं होगा. बहन जी से मिलकर सबको सही बात बतानी चाहिए, भले ही उसमें अपना घाटा ही क्यों ना हो जाये. मैंने अपने संपादक मित्र से इस मामले पर एक घटना का जिक्र किया. जिसे आपके लिए भी लिख रहा हूं.

टीवी संपादक प्रसून शुक्ला ने कश्मीर मामले पर पीएम को लिखे संतोष भारतीय के पत्र का यूं दिया जवाब

प्रधानमंत्री जी,

जम्मू-कश्मीर की सैर पर गये चंद संपादक और बुद्धिजीवी यह साबित करने पर तुले हैं कि मसला पाकिस्तान नहीं बल्कि कश्मीर है. इतिहास और भूगोल की सलाह देने वाले कथित स्टोरी राइटर्स से आपको इससे ज्यादा उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए. भारत का इतिहास साक्षी है कि यह धरती केवल चंद्रगुप्त मौर्य, साम्राट अशोक, पृथ्वीराज चौहान जैसे वीरों की ही जननी नहीं रही बल्कि जयचंद जैसे कंलक भी इसी की कोख से जन्म लेते रहे हैं. मोदी जी, जनता को शुरू से मालूम है कि आप नेहरू नहीं हैं, गांधी भी नहीं हैं. इसीलिए ही जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना है. आपको करोड़ों-करोड़ लोगों ने जाति-धर्म बंधन को तोड़कर जन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चुना है. इसीलिए आपकी एक भी गलती की माफी नहीं होगी. आप आकांक्षाओं के पहाड़ के नीचे हैं. लेकिन इससे आप मुकर नहीं सकते.

सुलगता देश, दहकते लोग : इस्लामिक कट्टरता ही समस्या

इस्लामिक कट्टरता के टाइमबम पर खड़े देश. सरकार, अदालतों और मानवता के पक्षधरों के पास सीमित समय. इसे डिफ्यूज नहीं किया तो वो लोग फूट पड़ेंगे, जो कभी अहिंसा के पुजारी होने का दम भरते रहे है. हालात नहीं संभले तो फ्रांस समेत तमाम देश गृहयुद्ध के अंदेशे को नकार नहीं सकते. ये बात भारत सहित दुनिया के तमाम देशों के लिए कभी भी सच्चाई बनकर सामने आ सकती है. जो विश्वयुद्ध का आकार ले सकती है. जबकि सिस्टम कथित बुद्धिजीवियों की संतुष्ट करने में लगा है, नाकि समस्या को सुलझाने में. वहीं सेना के जवान, मजदूर, किसान के साथ मध्यमवर्गीय लोग भी सहनशीलता की उपदेश में खुद को ठगा पा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अमिताभ ठाकुर को राज्य की प्रताड़ना से बचाए

सर्वोच्च न्यायालय से गुहार. यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के मामले में दखल दीजिए. सरकार की प्रताड़ना से बचायें, वरना सभी जनवादी और लोकतंत्र के नायक कालकोठरी में होंगे. अब जरा भी देरी न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बना देगी. यूपी सरकार से भरोसा उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट से आस है. पूरा मामला देश के लोकतंत्र और कानूनी प्रक्रिया का माखौल उड़ाते साफ दिख रहा है. अब तो हर पत्रकार और अफसर को डर लगने लगा है कि जो यूपी सरकार के खिलाफ आवाज उठायेगा, वो फर्जी मुकदमे झेलेगा, जेल जायेगा. ये देश की सबसे बड़ी अदालत, अब जनता इंसाफ के लिए आप की तरफ टकटकी लगाये बैठी है. दखल दीजिए. 

जो इस्तीफा दे चुका है उसे श्रम विभाग नोएडा ने पार्टी बनाकर नोटिस जारी कर दिया! (पढ़ें प्रसून शुक्ला का पत्र)

द्वारा, प्रसून शुक्ला, पूर्व एडिटर इन चीफ  एवं सीईओ, न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल

08.06.2015

श्री शमीम अख्तर

सहायक श्रम आयुक्त

गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

संदर्भ :  प्रसून शुक्ला, (पूर्व सीईओ एवं एडिटर इन चीफ) को भेजे गये 06.06.15 की नोटिस का जवाब

शमीम जी,

न्यूज एक्सप्रेस में अपने साथियो की दुर्गति देख एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला ने इस्तीफा दिया

{jcomments off}

न्यूज एक्सप्रेस चैनल के एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला और मैनेजिंग डायरेक्टर शशांक भापकर : आछे दिन पाछे गए… ! (फाइल फोटो)


एक बड़ी खबर साईं प्रसाद मीडिया के न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रेस’ से आ रही है. चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला ने दुबारा व फाइनली इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने अधीनस्थ मीडियाकर्मियों को सेलरी न दिए जाने पर पहले भी इस्तीफा दे दिया था लेकिन प्रबंधन ने सेलरी संकट दूर करने और सब कुछ स्मूथ करने का पूरी गंभीरता से वादा किया था जिस पर भरोसा करने के बाद प्रबंधन के अनुरोध पर प्रसून काम पर लौट आए. लेकिन प्रबंधन लगातार वादाखिलाफी करता रहा. चैनल संचालन के लिए जरूरी प्रत्येक मद में पैसे देने का काम बंद कर दिया गया. इसके कारण देखते ही देखते चैनल ब्लैकआउट हो गया.

‘न्यूज एक्सप्रेस’ के सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से प्रसून शुक्ला के इस्तीफे की चर्चा

{jcomments off}

एक बड़ी खबर ‘न्यूज एक्सप्रेस’ चैनल से आ रही है. पता चला है कि सीईओ और एडिटर इन चीफ पद से प्रसून शुक्ला ने इस्तीफा दे दिया है. पिछले कुछ महीने से चैनल में चले आ रहे सेलरी संकट के निपटते ही प्रसून ने चैनल को टाटा बाय बाय बोल दिया है. हालांकि इस बारे में प्रसून शुक्ला ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. उधर, उनके करीबियों का कहना है कि प्रसून जी ने इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं.

प्रसून शुक्ला के व्यक्तित्व के बारे में क्या कहा वैदिक, यशवंत, रुबी, विकास आदि ने, आप भी सुनिए…

पिछले दिनों न्यूज एक्सप्रेस चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला का सम्मान उनके गृह जनपद बस्ती में एक संगठन ‘बस्ती विकास मंच’ द्वारा किया गया. इस मौके पर दिल्ली से गए कई पत्रकारों ने प्रसून शुक्ला के जीवन, करियर और सोच को लेकर अपने अपने विचार व्यक्त किए. डा. वेद प्रताप वैदिक, योगेश मिश्र, यशवंत सिंह, रुबी अरुण, सुधीर सुधाकर, विकास झा, बृजमोहन सिंह आदि ने प्रसून की पर्सनाल्टी के विविध पक्षों को उकेरा.