फेक न्यूज़ फ़ैलाने में मध्यप्रदेश सबसे आगे

विपक्ष की भारी आलोचना के बाद राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने देशभर में अपराध की घटनाओं की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट की विशेषता यह है कि इस बार भ्रामक (फर्जी) खबर को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें 257 मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश फर्जी संदेश फैलाने के मामले में पहले नंबर पर रहा। यहां 138 मामले रिपोर्ट हुए। उत्तर प्रदेश 32 मामलों के साथ दूसरे और 18 के साथ केरल तीसरे स्थान पर रहा। जम्मू कश्मीर में फर्जी खबर के केवल चार मामले दर्ज हुए।

यह पहली बार है जब सरकार ने भारतीय दंड संहिता की धारा 505 के तहत ऐसे अपराधों पर आंकड़े संकलित किये हैं। आईटी अधिनियम के साथ धारा 505 के तहत अपराध दर्ज किए गए थे। 11 राज्यों में झूठी खबरों/ अफवाहों की कोई घटना दर्ज नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार बिहार, हरियाणा और झारखंड में साल 2017 में फेक न्यूज का कोई भी मामला सामने नहीं आया यह तब है जब पिछले कुछ सालों में इन राज्यों बढ़ती मॉब लिचिंग की घटनाओं के पीछे सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को बड़े पैमाने पर जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके साथ ही रिपोर्ट के मुताबिक देश के पूर्वातर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में फेक न्यूज का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।

आंकड़ों को दुरुस्त करने के लिए एनसीआरबी के पूर्व निदेशक ने परफॉर्मा में सुधार किया था। हत्या वर्ग के उपवर्ग के रूप में मॉब लिंचिंग को जोड़ा गया था, जिसमें रसूखदार लोगों, खाप पंचायतों, धार्मिक कारणों जैसे मामलों में हुई हत्याओं को शामिल किया गया था। लेकिन नई रिपोर्ट में ऐसे ब्रेकअप नहीं हैं। इतना जरूर है कि कुछ नए सबहेड शामिल किए गए हैं। जैसे, फेक न्यूज, भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के तहत मामले, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान के मामले, ऑफिस में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के मामले आदि। इनके अलावा महिलाओं के लिए साइबर दुष्प्रचार एक और उपयोगी वर्ग है, जिसमें सबसे ऊपर महाराष्ट्र का नाम है।

एनसीआरबी ने 2016 में हादसों से होने वाली मौतों और खुदकशी की रिपोर्ट जारी नहीं की थी। किसानों की खुदकशी जैसे गंभीर विषय को देखते हुए ये आंकड़े जरूरी थे। इसकी कुछ जवाबदेही राज्य सरकारों पर भी है, जिन्होंने आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने में देरी की। एनसीआरबी को सार्वजनिक माध्यम से आंकड़े सामने लाना चाहिए, जिसमें एनसीआरबी प्रमुख चौथे स्तम्भ के सामने मुख्य विन्दुओं को उजागर करें और सवालों का जवाब दें।इससे स्पष्टता आती है, जनता में भरोसा पैदा होता है।

एक अन्य समाचार के अनुसार भारत में इंटरनेट यूजर्स को फर्जी खबरों का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है। भारत में फर्जी खबरों का प्रसार वैश्विक औसत से कहीं ऊंचा हैं। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 22 देशों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 64 प्रतिशत भारतीयों को फर्जी खबरों का सामना करना पड़ा है। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 57 प्रतिशत का है। माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि भारत इंटरनेट पर फर्जी सूचनाओं के मामले में वैश्विक औसत से आगे हैं। सर्वेक्षण में शामिल 54 प्रतिशत लोगों ने इसकी सूचना दी। इसके अलावा 42 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें फिशिंग या स्फूगिंग से भी जूझना पड़ा है। दिलचस्प यह है कि परिवार या दोस्तों द्वारा आनलाइन जोखिम बढ़ाने का आंकड़ा 9 प्रतिशत बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया है।

इसके अलावा सर्वे में पाया गया कि ऑनलाइन खतरों से होने वाली परेशानियों की शिकायत करने के मामले में वैश्विक स्तर के मुकाबले भारत में ज्यादा है। वैश्विक स्तर पर जहां 28 फीसदी ही शिकायत करते हैं वहीं भारत के मामले में यह आंकड़ा 52 फीसदी है। सर्वे के मुताबिक ऑनलाइन खतरों की सबसे ज्यादा मार किशोरों पर पड़ रही है।

वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट.

तीखे सवाल पूछने वाले पत्रकार से इस सांसद की क्यों 'फटी'! 😀

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Posted by Bhadas4media on Wednesday, October 23, 2019
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