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धर्मशाला में छात्रा से बर्बर गैंग रेप, बड़बोले मीडिया ने पूंछ चुराई

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला डिग्री कॉलेज में दिल्ली के निर्भया कांड जैसी वीभत्स घटना शुक्रवार को हुई। कॉलेज के चार सीनियर छात्रों ने प्रथम वर्ष की छात्रा को कॉलेज से उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और मरणासन्न हालत में सड़क किनारे फेक दिया। इस मामले की चर्चा पूरे हिमाचल में लोगों की जुबान पर है लेकिन निर्भया कांड पर दस-दस पेज के सप्लीमेंट छापने वाले प्रिंट मीडिया में एक सिंगल कॉलम खबर तक नहीं है। 

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला डिग्री कॉलेज में दिल्ली के निर्भया कांड जैसी वीभत्स घटना शुक्रवार को हुई। कॉलेज के चार सीनियर छात्रों ने प्रथम वर्ष की छात्रा को कॉलेज से उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और मरणासन्न हालत में सड़क किनारे फेक दिया। इस मामले की चर्चा पूरे हिमाचल में लोगों की जुबान पर है लेकिन निर्भया कांड पर दस-दस पेज के सप्लीमेंट छापने वाले प्रिंट मीडिया में एक सिंगल कॉलम खबर तक नहीं है। 

हिमाचल से छपने वाले अखबार हिमाचल दस्तक ने अपनी वेबसाइट पर खबर लगा दी, लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते अगले कुछ ही घंटो में खबर बेवसाइट से हट गई। कॉलेज के छात्रों से मिल रही खबर के अनुसार छात्रा की हालत बेहद नाजुक है। हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए दरिंदों ने छात्रा के यूट्रस तक को बाहर निकाल दिया है। कॉलेज प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन तक इस मामले से ही इनकार कर रहा है। छात्रा को इलाज के लिए हिमाचल से बाहर कहां भेजा गया है इसकी जानकारी तक किसी को नहीं है। 

कॉलेज छात्र दबी जुबान में बताते हैं कि चारों आरोपी काफी समय से छात्रा को परेशान कर रहे थे जिससे तंग आकर शुक्रवार को छात्रा ने अपनी बहन के साथ कॉलेज के प्राचार्य से शिकायत की थी, जिसके बाद आरोपियों ने शाम को इस घटना को अंजाम दिया।

सवाल यह है कि एक बलात्कार दिल्ली में होता तो अखबार क्रांति छापने लगते हैं, फेमनिस्ट एंकर की जुबान आग उगलने लगती है, मोमबत्तियां लिए लोग सड़कों पर उतर आते हैं, ऐसा आंदोलन होता है मानो देश एक बार फिर गुलाम है और जनता आजादी के लिए सड़कों पर है, आनन-फानन में जांच कमेटियां बैठा दी जाती हैं, संसद में निर्भया बिल आ जाता है, इसलिए क्योंकि वहां पर बलात्कारी किसी मंत्री के बेटे नहीं बस ड्राइवर थे, जगह राजधानी थी कोई गांव, कस्बा या धर्मशाला जैसा छोटा शहर नहीं। 

मामला जैसे ही हाईप्रोफाइल होता है मीडिया अपनी दुम बचाकर न जाने किस बिल में छिप जाता है। ये कौन से संपादक हैं जो इस मामले में एक सिंगल कॉलम खबर तक छापने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। मैं नहीं जानता यह राष्ट्रीय मुद्दा होना चाहिए या क्षेत्रीय, लेकिन किसी के साथ अन्याय हुआ है, क्या उसके हक की, उसको न्याय दिलाने के लिए आवाज मीडिया को नहीं उठानी चाहिए। यहां के अखबारों ने जिस प्रकार से चुप्पी साधी है वह यहां के संपादकों और पत्रकारों के पुरुषार्थ पर सवाल खड़ा कर रहा है। 

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4 Comments

4 Comments

  1. ramesh sharma

    May 18, 2015 at 6:33 am

    yeh bahut hu sharmnaak ghatna hai aise me har patarkar ko apna farje nibhana chahie taki aaropion ko unke kiye ki sajja mil sake. agar news paper chup ho jaainge to piditon jo insaaf kaise milega.hame un charo aaripion ko saja dilane ke lie sangharsh karna chahiye. taki logon ka wishwas parmatma ke kanoon par bana rahe sake.aaiye pariwar ke saath insafe ke lie court ka darwaja khadkai aur parmatma se prarthana kare ki uha arropion ko jald se jald saja de.

  2. DS Guleria

    May 19, 2015 at 7:20 am

    इतने गंभीर मामले को छुपाने में कॉलेज और पुलिस के जिन अधिकारियों की भूमिका है सबको तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए।

  3. शशिकांत

    May 19, 2015 at 3:01 pm

    हमारी मीडिया लोकतां;िक तरीके से काम करतीहै, उसे बडों का सम्‍मान करना आता है

  4. HItesh Sharma

    May 20, 2015 at 4:04 pm

    Ek nirbhaya WO thi Jo jindgi Ko paney ke liye apne dukho Se ladti marr gyi … Or abb ek or nirbhaya …… Shame on those people who don’t respect the girls ….. Have no wards to use abuse words …. Beeeeppppp

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