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जागरण की नई चाल, मीडिया कर्मियों में फूट डालने के लिए फर्जी यूनियन का गठन

एक कहावत है, लतियाए रहो, लतियाए रहो। फिर भी हम किसी से कम नहीं। यही हाल है दैनिक जागरण प्रबंधन का। उसे जीत हार से कोई मतलब नहीं है। उसका एक सूत्रीय कार्यक्रम है-नीचता दिखाना। फोर्थ पिलर को कुछ ऐसे दस्‍तावेज मिले हैं, जो दैनिक जागरण प्रबंधन की नीचता के पुख्‍ता प्रमाण हैं। समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नीच लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए क्‍यों तैयार हो गए। वह एक ऐसे पत्रकार को क्‍यों तवज्‍जो देते हैं, जिस पर दैनिक जागरण की एक कर्मचारी के यौन शोषण का आरोप है। वह ऐसे मालिकों के साथ क्‍यों फोटो खिंचवाते हैं, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की लगातार अवमानना कर रहे हैं और हजारों कर्मचारियों ने अवमानना की याचिका दायर कर उन्‍हें आरोपी बनाया है। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट समेत हजारों कर्मचारियों के साथ खेल करने वाले मीडिया औघड़ों के साथ खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के बीच अपनी साख गिराई है।

एक कहावत है, लतियाए रहो, लतियाए रहो। फिर भी हम किसी से कम नहीं। यही हाल है दैनिक जागरण प्रबंधन का। उसे जीत हार से कोई मतलब नहीं है। उसका एक सूत्रीय कार्यक्रम है-नीचता दिखाना। फोर्थ पिलर को कुछ ऐसे दस्‍तावेज मिले हैं, जो दैनिक जागरण प्रबंधन की नीचता के पुख्‍ता प्रमाण हैं। समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नीच लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए क्‍यों तैयार हो गए। वह एक ऐसे पत्रकार को क्‍यों तवज्‍जो देते हैं, जिस पर दैनिक जागरण की एक कर्मचारी के यौन शोषण का आरोप है। वह ऐसे मालिकों के साथ क्‍यों फोटो खिंचवाते हैं, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की लगातार अवमानना कर रहे हैं और हजारों कर्मचारियों ने अवमानना की याचिका दायर कर उन्‍हें आरोपी बनाया है। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट समेत हजारों कर्मचारियों के साथ खेल करने वाले मीडिया औघड़ों के साथ खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के बीच अपनी साख गिराई है।

दैनिक जागरण प्रबंधन की नीचता को साबित करने वाला ताजा उदाहरण यह है कि कर्मचारियों को विश्‍वास में लिए बगैर एक ऐसी यूनियन का गठन किया जा रहा है, जिसके बारे में उसके पदाधिकारियों तक को कोई जानकारी नहीं है। 131 सदस्‍यों वाली इस यूनियन का क्‍या उद्देश्‍य है, बात समझ से परे है। इसकी जानकारी मिलने पर कर्मचारी भड़क गए हैं और वे यूनियन के बारे में अपनी शिकायत पंजीयक के यहां दर्ज करा रहे हैं। इस स्थिति में यूनियन का लाभ उस तरह से नहीं उठाया जा सकेगा, जिस तरह मणिसाना वेज बोर्ड के समय प्रबंधन ने अपने लोगों की यूनियन बना कर फर्जीवाड़ा किया था।

अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो वहां ऐसी किसी भी यूनियन का कोई मतलब नहीं रह जाता। फिर भी दैनिक जागरण प्रबंधन ने यूनियन बनाई है तो उसका जरूर कोई मतलब होगा। 7 फरवरी 2015 की हड़ताल से हकबकाए प्रबंधन को कर्मचारियों में फूट डालने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था। इस यूनियन में जिन लोगों के नाम हैं, उन पर कर्मचारी बड़ा भरोसा करते हैं। कर्मचारियों के इसी भरोसे को तोड़ने के लिए प्रबंधन ने यूनियन बनवाई और उसकी जानकारी आसानी से लीक हो जाने दी, ताकि कर्मचारियों की एकता बिखर जाए और वे मजीठिया वेतनमान व एरियर पाने के लिए प्रबंधन को धूल चटाने से पीछे हट जाएं। अंत में ऐसा कुछ हुआ नहीं। सभी कर्मचारी एकजुट हैं और प्रबंधन को धूल चटाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। दैनिक जागरण प्रबंधन की इस नीचता का भंडाफोड़ हो जाने से कर्मचारी आने वाले दिनों में क्‍या करने वाले हैं, यह देखने वाली बात होगी। हम आपको बताते रहेंगे दैनिक जागरण प्रबंधन की नीचता की नई नई कहानियां।

फोर्थपिलर एफबी वॉल से

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