वाराणसी जिला प्रशासन कुछ और पत्रकारों की मौत का इंतजार कर रहा है?

दैनिक जागरण, वाराणसी में राकेश चतुर्वेदी की कोरोना से मौत और तीन दर्जन से अधिक पत्रकारों के पाजिटिव निकलने के बाद भी दफ्तर सील नहीं कराया गया। प्रबंधन काम लेता रहा।

पहले दिन की जांच के बाद दूसरे दिन वहां के चार और पत्रकार पाजिटिव निकले जिसमें जिला प्रशासन देखने वाले विकास ओझा भी पाजिटिव रहे। फिर भी जिला प्रशासन नहीं चेता। आम आदमी के घर एक भी पाजिटिव निकलने पर पूरा मोहल्ला सील हो रहा। एक दो अधिवक्ता के संक्रमित हो जाने पर कई-कई दिन पूरी कचहरी बंद हो रही। लेकिन दैनिक जागरण सारे नियम-कानून से ऊपर सरकार के संरक्षण में पत्रकारों की जान ले रहा।

संक्रमण से बचे पत्रकारों को क्वारंटाइन कराने के बजाय लगातार देर रात तक उनसे काम लिया जा रहा। नतीजा यह रहा कि निगेटिव भी अब पाजिटिव आने लगे हैं। गुरुवार को सिटी डेस्क के मिलन गुप्ता को लगातार काम करते पैर व पेट में दर्द होने लगा। घर पर आशा कार्यकर्त्री से बताने व चेकअप कराने पर वह भी संक्रमित निकला।

जागरण प्रबंधन लगातार दफ्तर ना आने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर बुला रहा है और कोरोना संक्रमित माहौल में काम लेकर मौत के कगार पर पहुंचा रहा है।

बनारस के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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