जनधन योजना या जन-बचत पर हाथ साफ!

Anil Singh : प्रधानमंत्री मोदी ने कल मैडिसन स्क्वायर पर बताया कि कैसे उन्होंने जनधन योजना चलाई और बैंकवाले उन लोगों तक पहुंचे जहां अभी तक केवल पोस्ट वाले पहुंचते थे। लेकिन मोदी जी से हमारा विनम्र सवाल है कि आपकी सरकार इसी इंडिया पोस्ट को बैंक बनाने का लाइसेंस क्यों नहीं दे देती? इसके पास तो देश भर में 1.55 लाख पोस्ट ऑफिसों का नेटवर्क है। वो लाखों लोगों की बचत और सरकारी लघु बचत योजनाएं पहले से चलाती है। उसके पोस्ट बैंक ऑफ इंडिया को बैंकिंग लाइसेंस मिल जाए तो वो देखते ही देखते भारतीय स्टेट बैंक के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा और 4 करोड़ नहीं, 40 करोड़ बैंक खाते खटाखट खुल जाएंगे। लेकिन पहले यूपीए सरकार के वित्त मंत्रालय ने इसका विरोध किया और अब आपकी सरकार इसे नज़रअंदाज़ कर रही है।

कहीं ऐसा तो नहीं कि पोस्ट बैंक बन गया तो जन-बचत का जो 100% हिस्सा सरकार को बाजार से सस्ते ऋण के रूप में मिल जाता है, उसके घटकर सभी बैंकों के एसएलआर जितना 22% रह जाने की परेशानी तो सरकार को नहीं सता रही? लेकिन महोदय! इंडिया पोस्ट को 6400 करोड़ रुपए के घाटे से उबरने का करतब करने का हक तो बनता है! आज आपके मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जब दिल्ली के गोल डाकखाने में गंदगी पर टीवी के सामने कर्मचारियों को डांटा तो ऐसा लगा कि गरीब के कपड़े छीन लो और फिर उस पर अंग-प्रदर्शन का आरोप जड़ दो।

मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार और आर्थिक विश्लेषक अनिल सिंह के फेसबुक वॉल से.

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