अमर उजाला ने जासूसी कांड पर आज खूब खबरें छापी हैं लेकिन क्वालिटी ठीक नहीं! थोड़ा टेलीग्राफ से सीखते!

रवीश कुमार-

आज अमर उजाला ने जासूसी कांड की ख़बर को पहली ख़बर बनाई है। पेज नंबर 13 पर भी चार-पाँच ख़बरें हैं। इन ख़बरों के भीतर की क्वालिटी अच्छी नहीं है फिर भी पाठक को सतही क़िस्म की जानकारी मिल जाती है कि उसके वजूद को कुचलने के लिए किस तरह के जाल बिछाये जा रहे हैं।

अख़बार ने पूरे मामले को घटना की सूचनाओं को जस का तस रखने का प्रयास किया है लेकिन यही चालाकी होती है। पत्रकारिता के इस मूलभूत सिद्धांत की आड़ में ख़बरों को उसी तरह पेश किया जाता है ताकि वे पाठक के विवेक संसार में हलचल न पैदा करें। अगर सनसनी करनी हो तब ये अख़बार ज़रा भी संकोच नहीं करते हैं।

अमर उजाला अख़बार ने पाठकों को यह बताने का प्रयास नहीं किया है कि इस पर्दाफ़ाश के व्यापक निहितार्थ क्या हैं। लोकतंत्र को लेकर भी और लोक को लेकर भी। बस इसी का संतोष रह जाता है कि ख़बर छपी है। मगर छुपा छुपा कर छपी है।

आप तुलना के लिए टेलिग्राफ का पहला पेज देख सकते हैं। ज़रूरी नहीं कि दो अख़बार एक से हों लेकिन यह कोई पाकेटमारी की भी ख़बर नहीं की ख़बर ट्रैक्टर- ट्रॉली दुर्घटना की रिपोर्टिंग की तरह छप जाए । दोनों अख़बार की तस्वीर लगा रहा हूँ।


विदेशी मीडिया ने नहीं मोदी के काम ने भारत की छवि ख़राब की

ऐसी तस्वीरें और ख़बरें केवल छवि को ख़राब नहीं करती हैं बल्कि उस आमद की तस्दीक़ करती हैं जिसकी आहट सुनी जा रही थी। विदेश यात्राओं के दौरान संघ से जुड़े संगठनों के मार्फ़त लोगों को स्टेडियम में बुलाकर लोकप्रियता का एक माहौल रचा गया। जिसमें भारतीय ही बैठे होते थे और वहीं मोदी के लिए ताली बजाते थे।

गाँव गाँव में बताया गया कि दुनिया में प्रधानमंत्री मोदी का नाम हो गया है। भारत का नाम हो रहा है। जबकि राजनयिक दुनिया में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ था। आज वो सारा पैसा पानी में बह चुका है। उसमें भारत की जनता का भी पैसा था जो एक नेता ने भारत की छवि बनाने के नाम पर अपनी छवि पर बहाया। ऐसी खबरें हवा में नहीं गढ़ी गई हैं बल्कि दुनिया के 17 मीडिया हाउस के अस्सी पत्रकारों ने मिलकर पत्रकारिता की है। उस सच का एक छोटा सा कतरा सामने रख दिया है जिसे ढँकने के लिए हर दिन मोदी सरकार झूठ का एक नया अभियान गढ़ देती है ताकि आप सोच ही न सकें कि पिछला क्या हुआ और अगला क्या होगा।

मोदी के बारे में जिन शब्दों का इस्तमाल बच बचा कर किया जा रहा था वो अब अख़बारों की सुर्ख़ियों में होने लगा है। भारत की साख दांव पर लगी है। पत्रकारों ने नहीं लगाई है। किसी की हरकत और करतूत के कारण लगी है।

ये वही अख़बार हैं जिनमें मोदी के बारे में अच्छा भी छपा है तब इनमें छपने के कारण गोदी मीडिया गाता रहता था कि विदेशी मीडिया में भी मोदी की धूम। मोदी की लोकप्रियता पहुँची सात समंदर पार। आज उसी मोदी का काम भारत की शान को ख़राब कर रहा है।

नोट: अगर आप हिन्दी प्रदेश के युवा हैं तो आप उसी पर यक़ीन करें जो आई टी सेल व्हाट्स एप फार्वर्ड कर रहा है। आप थोड़े दिन और आँख बंद कर यक़ीन कर लेंगे तो ठीक रहेगा। सत्यानाश जल्दी आएगा।



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Comments on “अमर उजाला ने जासूसी कांड पर आज खूब खबरें छापी हैं लेकिन क्वालिटी ठीक नहीं! थोड़ा टेलीग्राफ से सीखते!

  • पंकज says:

    नोएडा सिटी की हालत तो इससे भी ज्यादा खराब है। बिन हाथ पैर की खबरें छाप दी जाती हैं।

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  • नोएडा सम्हालने के लिए विशेष चेला रखा गया है। फिर क्या हालत खराब है। अखबार भी छप रहा है, नौकरी भी चल रही है संपादक की। मालिकों को क्या पता कि नीचे क्या खेल हो रहा है। मालिक अखबार की गुणवत्ता देखेंगे तब न पता चलेगा। फोटोग्राफर अब यहाँ अखबार बेच रहा है। उसी से फ्लैट खरीद ले रहा है। मालिक की जिस दिन गुड मॉर्निंग होगी तब देखी जाएगी।

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