स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में सबसे फिसड्डी यूपी में एक पत्रकार की मां किस तरह बेइलाज मर गईं, सुनिए पूरी दास्तान

जितेंद्र पांडेय उसी गोरखपुर में पत्रकार हैं जहां के मठ के मठाधीश हैं योगीजी जो राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं. जितेंद्र पांडेय गोरखपुर में एक अखबार में सीनियर क्राइम रिपोर्टर हैं. उनकी मां की डेथ हो गई. वे इलाज के लिए मां को लेकर यहां से वहां भटकते रहे पर समय से इलाज न मिलने से उनकी मां तड़प कर मर गईं.

देश के राज्यों में यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था सबसे खराब है. ये हम नहीं, नीति आयोग कह रहा है. इससे संबंधित खबरें भी छपी हैं. इधर एक पत्रकार ने यूपी की इस भ्रष्ट स्वास्थ्य व्यवस्था का दंश भोग भी लिया.

जितेंद्र ने पूरी कहानी फेसबुक पर दर्ज किया है. पढ़ें उन्हीं के शब्दों में पूरा प्रकरण-

प्रदेश में अब इलाज के अभाव में किसी की जान नहीं जाती… ऐसा कहा जाता रहा है… ऐसा मैंने सुना था… पर मैं दुर्भाग्यवान था…

24 दिसंबर को अचानक मेरे माता जी की तबीयत खराब हुई। उन्हें इलाज के लिए सिद्धार्थनगर जिला अस्पताल ले जाया। सिद्धार्थनगर मेडिकल कालेज का उद्घाटन हो चुका है, लेकिन अभी वहां इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है।

माता जी को गोरखपुर मेडिकल रेफर कर दिया गया, लेकिन गोरखपुर मेडिकल कालेज में भी हृदय रोग उपचार की व्यवस्था नहीं है। डॉक्टर खुद ही सलाह देती रहीं कि इन्हें कहीं बाहर लेकर जाइये और और जाने के बाद कह दिया कि मरीज यहां से चला गया।

गोरखपुर के शाही ग्लोबल हॉस्पिटल माता जी को इलाज के लिए ले गया। वहां कई घण्टे जूझने के बाद चिकित्सक ने कहा लखनऊ लेकर जाइए। हृदय की तीनों नसें ब्लाक हो चुकी हैं। बाई तरफ की नस सूख चुकी है। जितनी जल्दी हो लखनऊ लेकर जाइए।

लखनऊ के लारी कार्डियोलजी सेंटर में 25 दिसंबर के दिन चिकित्सक मां को इमरजेंसी से बाहर करवाते रहे। किसी तरह से स्ट्रेचर की व्यवस्था करवा कर भीतर ले गया। तीन बार स्ट्रेचर इमरजेंसी से निकाल कर बाहर कर दिया गया। मां की हालत पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया गया। चिकित्सक के थोड़ा सा ध्यान देने से एक मरीज की जान बच सकती है। मैं माता जी को इलाज के लिए लारी की सर्जरी शाखा में भी लेकर गया। वहां से भी लारी कार्डियो लाजी सेंटर भेज दिया गया।

किसी तरह से तमाम अनुनय विनय के बाद माता जी को चिकित्सक ने देखा। दवाएं लिखीं लेकिन भर्ती नहीं किया। दूसरे दिन 26 दिसंबर को भी माता जी को इलाज के लिए लारी लेकर गया। डॉक्टर ने खून जांच की। रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि इनका हीमोग्लोबिन 7.9 बहुत कम है। सीरम क्रेटिनिन 2.88 बहुत बढ़ा है। नेफ्रो में लेकर जाइये।

एक मरीज को लेकर दौड़ता रहा, लेकिन उन्हें भर्ती नहीं करा सका। बार बार मन में यह सवाल उठता रहा कि जिस मां को लगातार समझाता रहा कि प्रदेश बहुत तरक्की कर गया है, एक से बढ़कर एक अस्पताल की सरकार व्यवस्था कर रही है, उसी अपनी मां को मैं उपचार नहीं दे पा रहा था।

पुत्र होने के नाते नहीं देखा जा रहा था।

रात 9 बजे एक निज चिकित्सक को माता जी को दिखाया। रात में भतीजे के रूम पर ले गया। रात में माता जी की तबीयत बिगड़ रही थी। उनकी पीठ में असहनीय दर्द था। किसी तरह रात एक बजे माता जी को एसजीपीजीआई ले जाने लगा। एम्बुलेंस चालक ने कहा कि भाई एसजीपीजीआई में भर्ती नहीं करेंगे, कोई देखेगा नहीं, इन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता है, सिविल अस्पताल ले चलता हूं।

अस्पताल में चिकित्सक ने भर्ती करने से पहले पहले मरीज की स्थिति पूछी। फिर कहा कि इन्हें कहीं और लेकर जाइये। बाद में मरीज को देखकर कहा कि यह अब नहीं हैं।

मैंने डेथ सर्टिफिकेट बनाने के लिए कहा तो बोला कि पोस्टमार्टम होगा, उसके बाद डेथ सर्टिफिकेट मिल सकता है।

सवाल यह है कि माता जी जीवित नहीं थीं तो एम्बुलेंस चालक किसे अस्पताल लेकर आया था।

अम्मा क्षमा करना। इस बदलती व्यवस्था में एक कमजोर बेटा तुम्हारा समुचित इलाज नहीं करा सका।

लारी कार्डियो, सिटीवीएस, केजीएमयू, एसजीपीजीआई इमरजेंसी के लिए नहीं है। अथवा आप इमरजेंसी की श्रेणी में नहीं थीं। समझ में नहीं आ रहा है कि आपकी मौत हुई है कि पीड़ितों की आवाज न सुनने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था ने आपकी जान ली है।

अम्मा हालात अब पहले जैसा नहीं है। तब तो दूर इलाके में भी कोई अस्पताल नहीं था। मेरी तबीयत खराब होती थी और आप गोद में उठाये कई किलोमीटर पैदल चलतीं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेरा इलाज कराती थीं। एक जगह से बैठे-बैठे सभी का इलाज हो जाता था।

मुझे याद है कि मेरी तबीयत खराब थी और आप मुझे गोरखपुर लेकर आई थीं। रात भर जगी थीं। किसी तरह से मैं स्वस्थ हो गया था।

क्षमा करना अम्मा। इस विकसित व्यवस्था में आप का इलाज नहीं करा सका। सिर्फ आपको ही नहीं बल्कि संसार की हर मां को अपेक्षा रहती है कि बीमार मां का उसका पुत्र इलाज कराएगा। मैं नहीं करा सका।

आपका पार्थिव शरीर लखनऊ से लेकर सिद्धार्थनगर आ रहा हूं। मौत के बाद आपके शव को लेकर कोई प्रदर्शन नहीं करना चाहता। प्रदेश की व्यवस्था अति उत्तम है, लेकिन यह कमजोर, मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए नहीं है। आज 27 दिसंबर को जमुआर घाट से माता जी का अंतिम संस्कार करूंगा। आप लोगों से कुछ कहने का अधिकार नहीं है। संभव हो तो माता जी के अंतिम यात्रा में शामिल होइए।



 

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