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सूचना सचिव से लड़ाई भारी पड़ी, ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता का मकान आवंटन निरस्त

लखनऊ : हिंदी पत्रिका ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल की आपसी खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है। बताया जाता है कि एक खबर को लेकर दोनो के बीच पैदा हुई रंजिश के चलते सहगल के इशारे पर अनूप गुप्ता का मकान आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस समय अनूप गुप्ता उसी मकान में रह रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि शासन की इस मनमानी को गुप्ता कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। 

लखनऊ : हिंदी पत्रिका ‘दृष्टांत’ के संपादक अनूप गुप्ता और उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल की आपसी खींचतान चरम पर पहुंच चुकी है। बताया जाता है कि एक खबर को लेकर दोनो के बीच पैदा हुई रंजिश के चलते सहगल के इशारे पर अनूप गुप्ता का मकान आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस समय अनूप गुप्ता उसी मकान में रह रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि शासन की इस मनमानी को गुप्ता कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। 

गौरतलब है कि अनूप गुप्ता ने अपनी पत्रिका के दों अंकों में प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल के खिलाफ कवर स्टोरी छापी थी। स्टोरी में यह भी बताया गया था कि नवनीत सहगल ने अनेक बेगुनाहों को सत्ता के बल पर जेल भिजवा दिया था। इसके बाद सहगल ने गुप्ता के खिलाफ मान हानि का केस दायर कर दिया था, जिसमें उन्हें जैसे तैसे जमानत मिल पाई थी। कोई भी पत्रकार विज्ञापन के लालच में सहगल के प्रभाव का रिस्क लेने को तैयार नहीं था। इस समय मामला अदालत में विचाराधीन है। सहगल दो तारीखों 22 जुलाई और 2 अगस्त पर कोर्ट नहीं गए है, जिससे उनका बयान दर्ज न होने के कारण अभी मामले की आगे कार्यवाही शुरू नहीं हो पा रही है। 

इस बीच सूत्रों से पता चला है कि विगत दो अगस्त को राज्य संपत्ति अधिकारी बृजराज यादव ने राजकीय आफीसर्स कालोनी, निराला नगर के सी-16 में रह रहे अनूप गुप्ता के मकान का आवंटन निरस्त कर दिया। अनूप गुप्ता मान्यता प्राप्त पत्रकार रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने उन्होंने अपनी मान्यता ये कहते हुए लौटा दी थी कि उन्हें सरकार या शासन का कोई एहसान या मदद नहीं चाहिए। अब उनके मान्यता प्राप्त पत्रकार न होने को ही मकान आवंटन निरस्त करने का आधार बनाया गया है। सूत्रों से पता चला है कि वह मकान खाली कर सकते हैं। 

नियमतः मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही मकान आवंटित होना चाहिए लेकिन लखनऊ में उस तरह के अन्य  लगभग दो दर्जन लोग और हैं। यदि उनके भी मकान खाली नहीं कराए जाते हैं तो गुप्ता संभवतः इस मामले को हाईकोर्ट ले जा सकते हैं। बताया गया है कि अवैध तरीके से अनावंटित मकानों में इस वक्त रहने वालों में अन्य पत्रकारों के अलावा अमर उजाला, दैनिक जागरण के पूर्व संपादक और जागरण के मालिक तक हैं। यदि गुप्ता मामले को कोर्ट ले जाते हैं तो अन्य अवैध आवंटन भी निरस्त किए जाने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 

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1 Comment

1 Comment

  1. Ramesh Singh

    August 5, 2015 at 4:32 am

    Sahgal ki yah purani fitrat hai. Iske pahle Bsp sarkar me wah Nishith Roi (EditorDNA News Paper) ka bhi Makan khali karane ka prayas kiye thhe . Tab bhi dalal patrakaro ki team unke sath thhi .

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