गीतकार माया गोविन्द का अमृत महोत्सव : …मुझमें अब भी वही जोश-जज़्बा है जो 16 की उम्र में था

(बाएं से दाएं- प्रो.हूबनाथ पांडेय, शायर देवमणि पांडेय, डॉ.कुमुद शर्मा, व्यंग्यकार डॉ.अनंत श्रीमाली, डॉ.करुणा शंकर उपाध्याय, मा.कुलपति डॉ.संजय देशमुख, गीतकार माया गोविन्द, शायर रामगोविंद अतहर, हास्यकवि आशकरण अटल, शायर दीक्षित दनकौरी, गीतकार किरण मिश्र)

मुम्बई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और राजस्थानी सेवा संघ की ओर से आयोजित अपने अमृत महोत्सव के अवसर पर गीतकार माया गोविन्द ने कहा- ‘‘वैसे तो मैं पचहत्तर की हो गई हूँ लेकिन ख़ुद को सोलह साल की ही समझती हूँ। सोलह साल का इंसान उत्साह और ऊर्जा से लबालब होता है। मुझमें अभी भी वही जोश और जज़्बा है जो सोलह साल की उम्र में था।

माया गोविंद के रचनात्मक योगदान पर डॅा. करुणा शंकर उपाध्याय द्वारा सम्पादित अभिनंदन ग्रंथ ‘गीतकार माया गोविन्द : सृजन के अनछुए संदर्भ’ का लोकार्पण शुक्रवार 28 अगस्त की शाम को मुम्बई वि वि के फ़ीरोज़ शाह मेहता सभागार में मा.कुलपति डॉ.संजय देशमुख ने किया। दिल्ली वि.वि.की प्रोफेसर डॉ.कुमुद शर्मा, फ़िल्म लेखक संघ मुम्बई के महासचिव कमलेश पांडेय, मुम्बई महानगर के संयुक्त पुलिस आयुक्त-शायर क़ैसर ख़ालिद, सीमा एव्म उत्पाद शुल्क के उपायुक्त-कवि हेमंत ताँतिया और जेजेटी विवि के कुलाधिपति डॉ.विनोद टिबड़ेवाला ने गीतकार माया गोविन्द के सिनेमा और साहित्य में योगदान को रेखांकित किया।

संगीतकार रवींद्र जैन ने माया गोविंद के रचनात्मक व्यक्तित्व पर आधारित एक स्वरचित गीत सुनाया जो लोगों को बहुत पसंद आया। पद्मश्री गायक शेखर सेन ने श्रीकृष्ण के सजीले नेत्रों पर ललित किशोरी का एक छंद बड़े सरस अंदाज़ में सुनाकर श्रोता समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीतकार-गायक विवेक प्रकाश ने माया गोविंद रचित राधा-कृष्ण का एक प्रेमपरक गीत सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। शुरूआत में गायक-अभिनेता अरिहंत अनुरागी ने संस्कृत में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

इस अवसर पर गीतकार माया गोविन्द की अध्यक्षता मे आयोजित काव्य संध्या का संचालन शायर देवमणि पांडेय ने किया। इसमें व्यंग्यकार डॉ.अनंत श्रीमाली, हास्यकवि आशकरण अटल, गीतकार किरण मिश्र, शायर हस्तीमल हस्ती, कवि प्रो.माधव पंडित और दिल्ली से पधारे मशहूर शायर दीक्षित दनकौरी ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम के संयोजन में डॉ.करुणा शंकर उपाध्याय, प्रो.विष्णु सरवदे, प्रो.हूबनाथ पांडेय और जयहिंद फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ.दृगेश यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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