दवा कंपनियों की माफियागिरी के खिलाफ बोलने की अखबारों और सरकारों में हिम्मत नहीं

Shambhunath Shukla : एलोपैथी दवा कंपनियां बड़े पूंजी घरानों के पास हैं और एलोपैथी के चिकित्सक उनके क्रीत दास। ये कंपनियां ही दिल्ली तथा समस्त मेट्रो टाउन्स के हाई-फाई अस्पताल भी चलाती हैं। नतीजा यह होता है कि इनके पालक डॉक्टर कम बीमार को घोर बीमार बता देते हैं और जिसका आपरेशन करने की जरूरत नहीं है उसे अपने चहेते अस्पताल के गंदे व इन्फैक्टेड ओटी में लिटा देते हैं। नतीजा यह होता है कि दस प्रतिशत रोगी इनके ओटी से बाहर आने के कुछ समय बाद दम तोड़ देते हैं।

जो अस्पताल में ही दम तोड़ देते हैं उन्हें लेकर यदि उनके परिजनों ने हंगामा किया तब तो एकाध अखबार छोटी-मोटी खबर छाप देते हैं और कहीं घर जाकर मरा तो अस्पताल तो साफ मुकर जाएगा। किसी अखबार, नेता या पोलेटिकल पार्टी अथवा सरकार की हिम्मत नहीं है कि उनके विरुद्ध कोई पहल करे। दवा कंपनियों की यह माफियागिरी किसी संगठित माफिया से कम घातक नहीं है। हथियारों और नशे के सौदागरों के समान ही एलोपैथी दवा कंपनियों की दादागिरी है। ये विज्ञान और वैज्ञानिकों को भी खरीदे हुए हैं तथा मीडिया को भी।

नोबेल पुरस्कार प्राप्त कोई व्यक्ति इन्हें अगर सर्टीफिकेट दे दे तो ये पाकसाफ नहीं हो जातीं। मेरा तो आज भी मानना है कि होम्योपैथी गरीब आदमी के लिए वरदान है। कलकत्ता, कानपुर, बम्बई और अहमदाबाद में जब कल-कारखाने लग रहे थे तो मशीनों की धड़धड़ व रुई तथा जूट के रेशों से फेफड़ों की बीमारी हो जाया करती थी तो इन गरीब और बेसहारा मजदूरों को होम्योपैथी दवाएं तथा घरेलू चिकित्सा पद्घतियां ही बचाया करती थीं। तब गुड़ उनके लिए रामबाण था। इसलिए आप लोग नोबेल विजेता वेंकटरमण रामकृष्णन के झाँसे में मत आइए। न तो होम्योपैथी अवैज्ञानिक है न यूनानी विद्या ज्योतिष। आज भी कोलकाता में होम्यो डॉक्टरों के यहां लाइन लगती है वे मूर्ख नहीं हैं। होम्योपैथी को पढ़ें और जानें कि होम्योपैथी एलोपैथी की तुलना में वैज्ञानिक तो है ही साथ में गरीब आदमी के लिए अमृत।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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Comments on “दवा कंपनियों की माफियागिरी के खिलाफ बोलने की अखबारों और सरकारों में हिम्मत नहीं

  • Aapney 100% sahi kaha hai sir. Abhi hal me maine Delhi ke Fortis hospital me apney relative ka Ilaaj hotey dekha. Wahan jo Injection usse likha gaya, wah daily 4 Lagna tha, jiska MRP around Rs. 1995/- tha, jiski keemat Wholesale Mandi (Delhi) me Around Rs. 549/- Tha. Issi tarah pichhle saal maine AIIMS me apney ek relative ko admit kiya. AIIMS me aap apni dawayen khud khareed ker latey hain aur apney paas rakh dete hain. Maine dekha, Kai Medicine aur daily 4-5 bottle (Sline) pani jo mareej ko chadhta hai, ki MRP around Rs. 390/- thi, jiska wholesale price around Rs.49/- tha. Meri to Ankhein ye dekh ker Fati ki Fati rah gai.
    Ab ye Modi Sarkar ho, ya koi bhi iss desh ki sarkar ho (Bhrasht Congress ko to chhod hi dijiye) in Dawa Mafiya se Ladney ko Taiyyar nahi. Ya to Hamarey Health Minister bhi inse Bikey hue hain, ya fir wahi jantey hain ki ab tak ke saarey Health Hinisters ne aaj tak inkey khilaf “Bigul” kyun nahin Funkaa…
    Mar to rahi hai Desh ki Gareeb Janta… Ab Social media ke jariye hi kuchh kiya ja sakta hai… Badey-2 Patrakaron tak bhi Commission jata hi hoga mere khyal se….

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