खबर लिखने से नाराज मेरठ पुलिस ने अमर उजाला के पत्रकार के खिलाफ थाने में तस्करा डाला

क्राइम रोकने में नाकाम मेरठ पुलिस ने खबर लिखे जाने से नाराज होकर पत्रकार के खिलाफ थाने में तस्करा डाल दिया। मेरठ में अमर उजाला के पत्रकार मोहित कुमार पर मेरठ पुलिस ने दौराला थाने में तस्करा डाला है।

‘टोल प्लाजा पर बदमाशों ने लूट का प्रयास किया’ शीर्षक से मोहित ने खबर का प्रकाशन अमर उजाला में किया था। पुलिस ने इस खबर को गलत बताते हुए पत्रकार के नाम का तस्करा डाल दिया और जांच शुरू कर दी है।

पूरे प्रदेश में इन दिनों पत्रकारों को पुलिस की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे उपर से कोई अघोषित आदेश पूरे प्रदेश के लिए जारी किया गया है कि जहां जो भी पत्रकार पुलिस-प्रशासन या सरकार की बुराई लिखे, उसे फौरन मुकदमा लिखकर घेर लो!

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Comments on “खबर लिखने से नाराज मेरठ पुलिस ने अमर उजाला के पत्रकार के खिलाफ थाने में तस्करा डाला

  • Dushyant chaudhary says:

    जैसा कि सूचनाएं सामने आ रही है कि पूरे प्रदेश में निष्पक्षता रखने वाले रिपोटरों पर ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, उससे साफ है कि अपराध रोकने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है, चूंकि कुछ अखबार के घराने ही रिपोर्टर का साथ छोड देते हैं, ऐसे में कागजों में जरूर अपराधमुक्त प्रदेश होने जा रहा है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता हैं। मेरठ पुलिस के तस्करें को पढकर साफ है कि खबर पूरी तरह मजबूत थी, जिसे रूकवाने में पुलिस नाकाम साबित हो गई होगी और अब कोई रिपोर्टर ऐसी घटना को अखबार तक ही न पहुंचा पाए, इसका मैसेज भी साफ कर दिया प्रतीत होता है। रिपोर्टर को अच्छी खबर लिखने के लिये बाकी रिपोर्टर को भी चाहिए कि वह उनकी सराहना करें न कि खबर मिसिंग होने का मलाल करके उन्हें नीचा दिखाए। क्यंूकि पुलिस ऐसा एक-एक किसी भी रिपोर्टर के साथ भी कर सकती है, चूंकि मै कई बार ऐसे हालातों का सामना करने के बाद ही मजबूत हुआ हूं। हालांकि मेरा अनुभव है कि पुलिस के बडे अधिकारी मामले को रफादफा करने का आश्वासन जल्दी ही देंगे या फिर दे चुके होंगे। लेकिन पुलिस के आला अफसरों से एक मेहनती रिपोर्टर को सवाल जरूर करना चाहिए कि तस्करें में ही घटना झूठी साबित नहीं हो रही है, इसके अलावा जब पुलिस किसी आरोपी को दस तक हिरासत में रखकर चंद घंटे पहले की गिरफतारी दिखाकर फीलगुड करते हैं तो उन्हें अंदर से कैसा फील होता हैं। कुछ दिनों पहले बिजनौर में भी दो रिपोर्टर पर मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन इसका विरोध करने के स्थान पर जी हुजूरी की गई। जबकि अगर रिपोर्टर अपनी पर आ जाए और मेहनत करें तो आईना दिखाया जा सकता है, जिसकी इस समय अधिक जरूरत है।

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  • ये पुलिस की नाकामी हताशा को दिखा रहा है लेकिन।इससे सबक लेने की भी जरूरत है क्योंकि हम लोग हो इनके फर्जी एनकाउंटर को बड़ा बड़ा छाप कर इनके कद को शासन में बढ़ाने का काम।कर रहे है जबकि बिना बुलेट प्रूफ जैकेट ओर बिना हेलमेट बिना वर्दी के ये लोग एनकाउंटर कर रहे है रात के अंधेरे का हो या दिन के उजाले का सबका निशाना सटीक है इसलिए हमें भी जागने की जरूरत है जब क्राइम रिपोर्टर लिखने पे आता है तो अच्छे अच्छे पानी भरते है

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