ग़ज़ब! मोदीजी तो पाकिस्तान प्रेमी हो गए!! देखें ये पत्र

विजय शंकर सिंह-

हमारे प्रधानमंत्री जी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को, पाकिस्तान दिवस, जो 23 मार्च को हर साल मनाया जाता है, के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए एक पत्र भेजा है।

यह एक औपचारिकता भी हो सकती है औऱ परस्पर तनाव कम करने की कूटनीतिक कवायद भी। पर 23 मार्च 1940, भारत के बंटवारे के प्रारंभ का दिन था और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में वह एक बेहद मनहूस दिन भी था। यह स्वतंत्रता की शुभकामनाएं नही है। पाकिस्तान 14 अगस्त को आज़ाद हुआ था। उस दिन तो सभी पाकिस्तान को शुभकामनाएं देते हैं।

पाकिस्तान दिवस आइडिया ऑफ इंडिया के तोड़ने का दिन था। 23 अगस्त 1940 को इस कदम के साथ स्वाधीनता संग्राम का कोई भी नेता शामिल नहीं था। तब तक यह भी तय नहीं था कि कैसा पाकिस्तान बनेगा। यह भारत विभाजन की शुरुआत थी। विभाजन एक ट्रेजेडी है और ट्रेजेडी का जश्न नहीं मनाया जाना चाहिए।

यहीं यह भी जिज्ञासा उठती है कि क्या पाकिस्तान दिवस पर पहले भी हमारी सरकार द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को, इस तरह के शुभकामना सन्देश भेजे गए हैं, या एक नयी परम्परा की शुरुआत है?

इसी पोस्ट पर Samar Anarya का यह कमेंट भी पठनीय है।

” पाकिस्तान दिवस पर बधाई देने की कोई परंपरा नहीं है भैया। यह करना वैसा ही है जैसे परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम करना, पड़ोसियों को दावत देना। एक दूसरे के स्वतंत्रता दिवस पर आधिकारिक बधाई ज़रूर दी जाती है. पिछले साल कांग्रेस ने इसी बधाई पर सवाल भी उठाये थे. बाकी इस सरकार की पाकिस्तान नीति गज़ब है- सिक्का उछाल के तय करते हैं ऐसा लगता है. 2020 में 2019 की तुलना में युद्धविराम उल्लंघन डेढ़ गुना बढ़ाया है पाकिस्तान ने, पर इनके साझे बयान आ रहे हैं! चुनाव आएगा कोई बड़ा तो जुमले आएंगे।”

एक कमेंट Parmod Pahwa जी का- “भारत सरकार की ओर से आधिकारिक मुबारक इस लिए नहीं दी जाती क्योंकि इस दिन ही मोहम्मद अली जिन्ना ने हिंदुस्तान तोड़कर बांटने की मांग आधिकारिक तौर पर की थी। यहां तक कि पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा पाकिस्तान डे मनाया जाता है तो उसमे प्रोटोकॉल से बंधे होने के कारण राज्यमंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व भारत की ओर से होता है और 2015 में तो जनरल वीके सिंह ने बहुत कड़वी बातें कर दी थी। आमतौर पर भारतीय मंत्री उनके द्वारा आयोजित भोज में भी हिस्सा नहीं लेते। ऐसे ही अटल बिहारी वाजपेई के अतिरिक्त कभी कोई भारतीय मीनार ए पाकिस्तान (लाहौर स्थित) नहीं जाता क्योंकि वहीं से पाकिस्तान निर्माण की घोषणा हुई थी।”

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करें-

https://chat.whatsapp.com/CMIPU0AMloEDMzg3kaUkhs

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *