अखबारों के लिए मोदी सरकार की नई विज्ञापन नीति पढ़ कर स्तब्ध रह गया

Samar Anarya : योगा वोगा के बीच मोदी सरकार ने विज्ञापन नीति बदल कर छोटे और मझोले अख़बारों को ख़त्म करने की एक नयी कार्यवाही शुरू कर दी है. कल Aleemullah भाई ने बताया था… पूरी नीति पढ़ी तो स्तब्ध रह गया. आज राहुल सांकृत्यायन ने वेबसाइट्स के विज्ञापन पर भी यही खबर दी! इस नयी विज्ञापन नीति के तहत एक अंकीय गणित बनाया गया है जिसको पूरा करने पर ही उन्हें विज्ञापन मिलेगा. सबसे पहले तो 25 हजार प्रसार संख्या से अधिक वाले समाचार पत्रों के एबीसी और आरएनआई का प्रमाण पत्र अनिवार्य कर उसके लिए 25 अंक रखे गए हैं।

इसी तरह कर्मचारियों की पीएफ अंशदान पर 20 अंक, पृष्ठ संख्या पर 20 अंक, भाजपा-संघ समर्थक 3 एजेंसियों के लिए 15 अंक, खुद की प्रिंटिंग प्रेस होने पर 10 अंक और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की प्रसार संख्या के आधार पर फीस जमा करने पर 10 अंक दिए गए हैं । इस तरह 100 अंक का वर्गीकरण किया गया है, जो वर्तमान में 90 फीसदी लघु एवं मध्यम समाचार पत्र पूरा नहीं कर सकते हैं। पर समाचार पत्रों को चुप कराने की यह साजिश क्यों? क्योंकि बड़े अख़बारों को मैनेज कर भाजपा का मुख पत्र बना देना आसान है- हर शहर में एक अखबार हो तो भ्रष्टाचार से लेकर भुखमरी तक रोकने में असफलता कैसे छुपायेंगे? और हाँ- इन अख़बारों के बंद होने पर जो लाखों लोग बेरोजगार होंगे वो?

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी समर अनार्या उफ अविनाश पांडेय समर के फेसबुक वॉल से.

इसी प्रकरण पर अमर उजाला डाट काम में छपी खबर इस प्रकार है….

आरएसएस समर्थित समाचार एजेंसियों की सदस्यता लेने पर ही मिल सकेंगे सरकारी विज्ञापन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने तीन समाचार एजेंसियों के नाम छांटे हैं, नियम के मुताबिक इन तीनों एजेंसियों की सदस्यता लेने पर समाचार पत्रों को अतरिक्त प्वाइंट मिलेंगे। इन अतिरिक्त प्वाइंट्स की मदद से ही समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापन मिल सकेंगे। ‘हिंदुस्तान समाचार’ एक ऐसी समाचार एजेंसी है जिसे बहुत कम लोग ही जानते हैं, इस समाचार एजेंसी को बीजीपी की विचारधारा समर्थित भी कहा जाता है। मंत्रालय ने अपनी सूची में इसे भी शामिल किया है। हालांकि एक लिस्ट आरएसएस ने भी बनाई है। सरकार ने नया नंबर सिस्टम शुरू किया है जिसके अनुसार डीएवीपी (विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय) के माध्यम से सरकारी विज्ञापन हासिल करने के लिए इन तीनों समाचार एजेंसियों की सदस्यता लेनी पड़ेगी, इनकी सदस्यता लेने पर समाचार पत्रों को प्रत्येक एजेंसी के हिसाब से 15 प्वाइंट मिलेंगे।

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Comments on “अखबारों के लिए मोदी सरकार की नई विज्ञापन नीति पढ़ कर स्तब्ध रह गया

  • jitendra kumar says:

    bahut sahi faisla kiya hai bhrasht akhbaar maliko ki dukan band hogi jo sirf kagaj ka pet aur jimmedaro ki jeb bharkar apni tizori bhar rahe hai

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