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सियासत

प्याज खरीद कर लंबा फंस गए मोदीजी!

Mukesh Aseem : इस खबर को पढ कर मैं बिना शर्त स्वीकार करता हूँ कि मोदी जी आज तक के मानव इतिहास के सबसे बडे आर्थिक जीनियस हैं!

हुआ यूँ है कि कुछ करने के नाम पर जिल्लेइलाही ने 600-700 डॉलर प्रति टन के दामों पर 36 हजार टन प्याज खरीद ली। 18 हजार टन भारत पहुँच भी गई है। पर इतनी महँगी कीमत वाली प्याज को कोई राज्य खरीदने के लिए तैयार नहीं हैं।

अब जिल्लेइलाही के दूतों ने बांग्लादेश को यही प्याज 550 डॉलर प्रति टन कीमत पर खरीदने का प्रस्ताव दिया है। पर बांग्लादेश ने कह दिया है कि तुम तो तीन महीने पहले अचानक हमें प्याज बेचना बंद कर धोखा दे चुके हो। इसलिये हमने नेपाल के रास्ते चीन से प्याज मँगा ली है। तुम अपनी प्याज हमें बेचना चाहो तो और डिस्काउंट दो और इसे बांग्लादेश पहुँचाने का भाड़ा भी दो।

अफसोस कि मोदी जी बस 18 घंटे ही काम कर हमें न जाने ऐसे कितने ही और चमत्कारों से वंचित करते हैं!

मोदी-शाह के पास एनआरसी/समप्रदयिकता/पाकिस्तान जैसे फर्जी सवालों पर पीछे हटने का विकल्प नहीं है क्योंकि आर्थिक मंदी दिनों दिन भयानक रूप अख़्तियार कर रही है। आज के आयात-निर्यात दोनों में गिरावट के आँकड़े हों, बिजली उत्पादन में लगातार 5वें महीने गिरावट हो, हर दिन सुरसा के मुँह की तरह फैलता वित्तीय घाटा हो, हर कोशिश के बाद भी नीचे न आतीं ब्याज दरें हों, बढ़ती महँगाई-बेरोजगारी हो, हर ओर से आतीं छँटनी की खबरें हों, उत्पादन-बिक्री की कमी से बैंक ब्याज न चुका पाने वाली कंपनियों की वजह से लुढ़कते बैंक हों, आर्थिक मोर्चे पर हर ओर से संकट के गहराने की ही खबरें आ रही हैं। मोदी-शाह के लिए नई-नई साज़िशों में जनता को फंसाये रखना ही विकल्प है। ये लड़ाई लंबी चलने वाली है।

उधर, पीएमसी बैंक को डुबाने वाले एचडीआईएल के वधावनों को मुंबई हाईकोर्ट ने जमानत नहीं दी, पर जेल के बजाय उन्हें घर भेजने का आदेश दिया है। बस घर के बाहर दो गार्ड खडे रहेंगे। जज साहिबान का कहना था कि संपत्ति बेचने में उनका सहयोग लेना है। मतलब संपत्ति मालिक हो तो अपराधी आदर सत्कार का हकदार है!

खुद जज के अनुसार चंद्रशेखर ‘आजाद’ ने कुछ भी असंवैधानिक नहीं किया, उसे जमानत मिलनी चाहिए। पर उसे दिल्ली में घुसने से मना कर दिया गया है, दिल्ली चुनाव में उसे बोलने का हक नहीं।

उधर सुधा भारद्वाज, सुधीर धवले, शोमा सेन, सुरेंद्र गाडलिंग, आदि को तो जमानत भी नहीं मिल रही, जबकि यह भी सामने आ गया कि गिरफ्तारी के बाद पुणे पुलिस ने उनके कंप्यूटर हैक कर उसमें फर्जी दस्तावेज डाले हैं।

विश्लेषक मुकेश असीम की एफबी वॉल से.

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