क्या मुकुल गोयल विभाग की गलती को सुधार पायेंगे!

Krishan pal Singh-

यूपी पुलिस! हीरोइज्म से फिर प्रोफेशनलिज्म की ओर

उत्तर प्रदेश में पुलिस में प्रोफेशनलिज्म पर हीरोइज्म को हावी कर दिये जाने से व्यवस्थायें पटरी से उतर गई थी। इसी बीच प्रदेश पुलिस के नये मुखिया मुकुल गोयल ने एनकाउण्टर को लेकर जो कहा है उससे लगता है कि यह गलती अब सुधारी जायेगी। पुलिस का पेशेवर कुशलता के मुताबिक काम करना ही आधुनिक मूल्यों और उदार लोकतंत्र की व्यवस्था के अनुरूप हो सकता है।

उदार लोकतंत्र में मानवाधिकारों के संरक्षण का विशिष्ट महत्व है। जिसकी अनदेखी शांति व्यवस्था के नाम पर नहीं की जा सकती। लेकिन हाल के वर्षो में यूपी पुलिस ने ठोंक दो मंत्र को ऐसा गुंजित किया जिससे मानवाधिकारों के मूल्यों पर बन आई। तात्कालिक रूप से इसके कारण कुछ उपलब्धियां हासिल होती नजर आ सकती हैं लेकिन विधि व्यवस्था से विचलन के पुलिस के तरीके दूरगामी तौर पर अनर्थकारी ही होंगे।

अपराध मुक्त समाज के लिए उच्चस्तरीय अवधारणा के चलते पुलिस और अदालत अलग-अलग रखे गये हैं। इसलिए पुलिस को उसकी सीमा का अतिक्रमण न करने देने में ही भलाई है। पुलिस का काम अपराधियों को पकड़कर उनके खिलाफ मजबूत केस बनाना है ताकि अदालत में उन्हें सजा मिल सके। बिहार की नीतीश सरकार को शुरू में राज्य को माफिया मुक्त करने के लिए बड़ी सराहना मिली थी जबकि अपने राज्य में उन्हें विरासत में सर्वत्र समानांतर माफिया राज का प्रकोप मिला था। नीतीश कुमार ने राज्य की पुलिस को प्रेरित किया कि वह अपराधियों पर शिकंजा कस के अदालत में उनके खिलाफ मजबूत पैरवी करे जिससे सजा का प्रतिशत बहुत बढ़ गया और राज्य की शांति व्यवस्था पटरी पर लौट आई।

पुलिस के लिए अच्छे तरीके से काम करने का यही मानक है।

अगर पुलिस एनकाउंटर के उन्माद में ओवर लैपिंग करके अदालतों का अधिकार भी अपने हाथ में ले लेती है तो यह भविष्य में खतरनाक स्थितियों का आमंत्रण हो सकता है। यह पुलिस राज कायम किये जाने की भूमिका सिद्ध होगा जिसे लोकतंत्र में जनमानस कभी स्वीकार नहीं कर सकता है। नये पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल वैसे तो पुरानी लकीर मिटाने की बजाय बड़ी नई लकीर खींचकर स्थिति को सुधारने के कायल हैं इसलिए उन्होंने एनकाउंटर नीति को लेकर अपने किसी पूर्ववर्ती की आलोचना न करते हुए बहुत ही संयमित तरीके से यह कहा है कि इस मामले में उनके समय में पुलिस कानून के दायरे में काम करेगी। इसका बहुत ही सकारात्मक संदेश लोगों में गया है। विपक्षी नेताओं तक ने इस कारण सकारात्मक प्रतिक्रियायें दी हैं।

बसपा की अध्यक्ष मायावती ने राज्य सरकार से नये पुलिस प्रमुख को निष्पक्षता से काम करने की स्वतंत्रता देने का मुतालवा किया है तो सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उन्हें पुलिस के नये नेतृत्व से लोगो के लिए प्रतिबद्धता की भावना से काम करने की उम्मीद है। स्पष्ट है कि विपक्षी नेताओं का अंदाजे बया व्यवस्था के एकदम पक्ष में तो नहीं हो सकता लेकिन उनके बयानों से जो ध्वनित हुआ है उससे योगी को पुलिस महानिदेशक के मामले में अपने चयन पर निश्चित रूप से संतोष हो सकता है।

नये पुलिस महानिदेशक ने पेशेवर उसूलों के बारे में अपने विचारों की स्पष्टता को उजागर करते हुए कहा है कि छोटे अपराध ही बड़े अपराधों का कारण बनते हैं इसलिए पुलिस से हर मामले में कार्रवाई की अपेक्षा की जायेगी। पहले भी इस पर जोर दिया जाता था। सूझबूझ वाले पुलिस मुखिया के निर्देश यही होते थे कि असंज्ञेय अपराधों में भी पुलिस मौके पर जरूर जाये ताकि प्रारम्भिक दौर में ही स्थिति नियंत्रित हो जाये और भविष्य में बड़ी घटना न हो सके। लेकिन पुलिस हाल में यह सूत्र भूल गई थी। न्यूयार्क में भी जब अपराध बढ़ने लगते हैं तो जीरो टालरेंस पर जोर दिया जाता है जिसमें छोटी मोटी अवहेलनाओं तक में पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश रहते हैं। यह पुलिस के दबदबे का अहसास समाज को कराने का टोटका है और नये पुलिस महानिदेशक की मंशा में इसको भी निहित किया गया है।

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को इसका श्रेय तो देना पड़ेगा कि उसने संगठित अपराध लगभग पूरी तरह रोक दिये हैं इसलिए पुलिस का मुख्य काम यह है कि रोजमर्रा के जीवन में अन्याय को न पनपने दें। थाने आने वाले पीड़ितों की सुनवाई की गहन समीक्षा का इरादा जाहिर करके नये पुलिस महानिदेशक ने इस मर्म पर उंगली रखकर दिखा दी है। वर्तमान सरकार में कलंकित अधिकारी कितनी भी सेंटिंग गेंटिंग करके प्राइज पोस्टिंग नहीं ले पा रहे हैं लेकिन ऐसा भी नहीं है कि थाने बेचने जैसी परिपाटी पूरी तरह बंद हो गई हो। पिछले महानिदेशक के कार्यकाल में मानिटरिंग का पक्ष कमजोर हो जाने से इस मामले में मनमानी बढ़ी थी लेकिन नये पुलिस महानिदेशक की ऊर्जा और जबावदेही लेने के मामले में तेज तर्रारी को देखते हुए काफी हद तक पुलिस में भ्रष्टाचार रहित और संवेदनशील व्यवस्था को कायम किया जा सकेगा।

K.P. Singh
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