नकली शराब बिकवाने वाले आबकारी निरीक्षक अब भी जमे हैं पदों पर, शासन मौन

योगी राज में अफसर सरकारी नीतियों का भर्ता बनाने में जुटे हैं. आबकारी विभाग का सबसे बुरा हाल है. प्रदेश भर में नकली शराब बिक रही है. दुकानों में ग्राहकों से ज्यादा पैसे लेकर शराब बेची जा रही है. हरियाणा से नकली शराब की खेप धड़ल्ले से चली आ रही है.

लग ही नहीं रहा कि प्रदेश में शासन सत्ता में बदलाव हुआ है. जो हाल आबकारी विभाग का मुलायम, अखिलेश, माया राज में था, वही अब भी है. याद करिए कानपुर नगर और देहात में हुए शराब कांड को. दर्जनों लोगों की मौत हुई थी. लेकिन नकली शराब बिकवाने वाले आबकारी इंस्पेक्टर अब भी यहीं जमे हैं.

आबकारी विभाग मुख्यमंत्री के दिये गए आदेशों की अवहेलना करने पर उतारू है. कानपुर नगर व देहात में हुए शराब कांड के बाद भी शराब कांड में लिप्त आबकारी निरीक्षक नहीं हटाये जा रहे. नयी आबकारी नीति को फेल करने में लगे हैं नौकरशाह. इससे प्रदेश सरकार को राजस्व का भी काफी नुकसान हो रहा है.

कानपुर जहरीली शराब कांड में डीओ व डिप्टी के सिर ठीकरा फोड़ कर सबने चुप्पी साध ली. लेकिन सबको पता है कि आबकारी इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से नकली व दूषित शराब बिक्री का धंधा धड़ल्ले से चलता है. कानपुर के इन एक्साइज इंस्पेक्टरों को जाने किसके इशारे पर अभयदान मिला हुआ है. यही कारण है कि ये इंस्पेक्टर बेलगाम हैं और अपने संरक्षण में अवैध शराब बिक्री का कारोबार करा रहे हैं. शराब कांड के दोषी आबकारी निरीक्षकों को छुआ तक नहीं गया. इससे इनके हौसले बुलंद हैं.

ऐसा लगता है कि सीएम योगी के सख्त आदेश पर आबकारी विभाग का धन बल और राजनीतिक पहुंच हावी है. शराब तस्करी व बिक्री कराने वाले इंस्पेक्टरों की चांदी है. प्रदेश के कानपुर जिले में बीते मई माह में विषाक्त शराब प्रकरण हुआ था. सूबे के मुखिया ने कानपुर नगर और कानपुर देहात के दोनों जिलो के तत्कालीन आबकारी निरीक्षकों सहित समस्त अधिकारियों को यहां से हटाने का आदेश दे दिया था.

परंतु आबकारी विभाग के शीर्ष अफसरों ने उनके आदेशों को किनारे कर केवल डिप्टी व जिला आबकारी अधिकारी व कुछ सिपाहियों को निलंबित कर अपनी पीठ थपथपा ली. आबकारी निरीक्षकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई. आरोप है कि विभाग के जिम्मेदारों ने उन्हें अभयदान दे दिया है. दुकानों का निरीक्षण करने व शराब तस्करी को रोकने के लिए आबकारी निरीक्षक पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं.

लेकिन हो रहा है उल्टा. उनके संरक्षण में ही सब कुछ अवैध क्रिया कलाप संचालित हो रहा है. आबकारी विभाग में धनबल के आधार पर पोस्टिंग और ट्रांसफर का खेल खुलेआम चल रहा है जिसके कारण नकली शराब बिकवाने वाले निरीक्षक भी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उनका बाल तक बांका नहीं होगा. दोषियों तथा संदिग्धों पर कारवाई नहीं किया जाता. ऐेसे लोगों को संरक्षण दिया जाता है. कर्मठ अधिकारियों तथा निरीक्षकों को साइडलाइन कर महत्वहीन पोस्टिंग दिया जाता है.

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