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सत्ता के करीबी पत्रकार के लौंडे ने नशे में मारी टक्कर, ली एक की जान, पुलिस खामोश

यूपी की राजधानी लखनऊ में मीडिया के एक बड़े संस्थान के एक रिपोर्टर की करतूत से बवाल मचा हुआ है। सरकार से लेकर अधिकारी तक दो ख़ेमे में बंट गये है। अक्टूबर महीने के आखिरी सप्ताह की एक देर रात लखनऊ की सड़कों पर फ़र्राटा भरती हुई फ़ोर्ड एंडेवर गाड़ी ने एक बाइक सवार युवक को बुरी तरह कुचल दिया। बताया जाता है कि गाड़ी की स्पीड इतना ज़्यादा थी कि बाइक सवार को एक किलोमीटर तक खींच कर ले गयी। पब्लिक के दौड़ाने पर गाड़ी रुकी लेकिन तब तक लड़के की मौक़े पर मौत हो गयी थी।

मौक़े पर पहुँची पुलिस ने जब आरोपी लड़के को बाहर निकाला तो वो नशें में धुत्त था और अपनी गलती का एहसास किये बग़ैर वो लोगों से लड़ने के लिये तैयार हो गया। यहाँ तक उसने पुलिस को राब में लेने के लिये अपने मोबाइल पर अपने पत्रकार पिता की फ़ोटो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ दिखाते हुये कहा कि ‘आप लोग जानते नहीं है कि मैं किसका बेटा हूँ। दो मिनट में वर्दी उतर जायेगी।’

फ़ोटो का असर हो या फिर पुलिस की हमेशा की काहिली। आरोपी गाड़ी से उतर कर चला गया। जाते जाते उसने गाड़ी से बड़े आराम से पैसों से भरा एक बड़ा बैग निकाला और कुछ सामान भी समेट लिया। आमतौर पर यूँ भी यूपी की पुलिस बड़ी गाड़ियों के मालिकों पर हाथ डालने से ख़ौफ़ खाती है। साथ ही इस गाड़ी में विधानसभा का पास लगा देखकर पुलिस की हालत ख़राब हो गयी और हमेशा की तरह वो आरोपी के सामन नतमस्तक हो गयी। जबकि मौक़े पर आरोपी पकड़ा जा सकता था। भारी कैश ज़ब्त हो सकता था।

लेकिन सीएम से आरोपी के पिता की करीबी की बात समझते ही पुलिस में आंखे बंद कर लीं। बौखलाई पब्लिक ने बाद में गाड़ी की तलाशी ली तो पता चला कि गाड़ी लखनऊ में एक टीवी रिपोर्टर की है जिसने ये बेनामी गाड़ी किसी दूसरे के नाम से ले रखी है। गाड़ी से टीवी रिपोर्टर का विज़िटिंग कार्ड और चैनल का माइक भी गाड़ी में मिला।

बताया जाता है कि जब ये घटना हुई तो लखनऊ में सरकार और पत्रकार की गहरी साँठगाँठ का ऐसा खेल उजागर हुआ जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे मामले को दबाने के लिये सरकार के खासमखास लोग सामने आये। इन्होंने ना सिर्फ़ घटना के बाद फ़ोन खड़खड़ा कर सारे पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए बल्कि दबाव बनाया कि वो इस मामले में मुक़दमा दर्ज ना करें।

सोशल मीडिया के जमाने में बात वायरल होते देर नहीं लगती लिहाज़ा घटना की फ़ोटो वायरल होने लगी। पुलिस पर सवाल उठने लगे। घटना के बाद की फ़ोटो मे आरोपी गाड़ी में स्टेरिंग पर बैठा साफ़ देखा जा सकता है पर फिर भी पुलिस ने काफ़ी दबाव के बाद मामला अज्ञात के ख़िलाफ़ दर्ज किया। मुक़दमे में कैश बरामदगी की बात को ग़ायब कर दिया।

उसकी गाड़ी में फ़र्ज़ी तरीक़े से विधानसभा का पास लगा था जिसे बाद में नोच दिया गया। वो मामूली रिपोर्टर होने के बावजूद अपने आपको बड़े न्यूज चैनल का ब्यूरो प्रमुख बताता है। इतनी मंहगी गाड़ी सिर्फ अवैध पैसों से आ सकती है। गाड़ी में बकायदा पचास लाख रूपये कैश मिले। मौकायेवारदात पर आरोपी मौजूद था। उसके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर जमकर कैंम्पेन चला। फिर भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।

बताया जाता है कि टीवी रिपोर्टर अपनी काली कमाई से अपने अधिकारियों को जमकर तोहफ़े और हिस्सा भी देता है, लिहाज़ा संस्थान के स्तर पर भी लोग लगे हैं कि उनकी दुधारू गाय पर आँच ना आये।

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