सुनिए, ये पीएम मीडिया जगत को क्या संदेश दे रहा है, देखें वीडियो

Mukes Kumar : ध्यान से सुनिए। एक लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री क्या कह रहा है, उसके मायने क्या हैं और पूरे मीडिया जगत को वह क्या संदेश दे रहा है? ये भी कि चैनल का सीईओ उन्हें किन शब्दों में आश्वस्त कर रहा है। अब देखना ये है कि उन पत्रकारों का क्या होता है और वे कैसी पत्रकारिता कर पाते हैं जिनके बारे में पीएम ने इतने उच्च कोटि के विचार व्यक्त किए हैं।

Ajit Ujjainkar : आज की इलेक्ट्रॉनिक युगीन पत्रकारिता के दौर में कोई भी ‘ख़बर’ छिपी नहीं रह सकती। लेकिन, ज़िम्मेदार पद पर आसीन व्यक्ति का देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकारों पर इस तरह का कटाक्ष कि, ‘…..जिनके ब्लड में है, मुझे गाली देना।” अशोभनीय है। निंदनीय है। किंतु, यह कटाक्ष क्यों किया गया यह भी बहुत विचारणीय है। कोई अतीत वगैरा…… ???? वो रिफरेंस नदारद है। वरना उच्च पद पर आसीन व्यक्ति इस तरह का कटाक्ष कि ही नहीं सकता। ग़लती किसी की भी हो लेकिन मूल तथ्य का सामने आना अनिवार्य है।

लेकिन, सच तो ये है कि, सत्तानशीनों का दिल खुश करने के लिये उनके इशारों पर मुजरा करने से बेहतर है स्वतंत्र रहना। क्योंकि, पत्रकारिता कोई ‘नौकरी’ नहीं होती। वहीं, पत्रकारिता के गिरते स्तर के लिए स्वयं पत्रकार ही ज़िम्मेदार हैं, जिसकी भरपाई की संभावना उसी जगह पर नज़र आती है जहां धरती और आकाश का मिलन होता है। वैसे वर्तमान में मौजूद चैनलों की भीड़ से अलग ही तरह से अपने को प्रस्तुत करने एवं उस प्रयत्न को देशव्यापी स्तर पर लाकर खड़ा करने वाला अनुभवी पत्रकारों का यह समूह प्रशंसा,पारितोषिक एवं उत्साहवर्धन का हक़दार है

तटस्थ होकर इस तरह लिखने को भी लोग ‘विद्रोह’ ही कहेंगे, और उनके लिये जवाब में “मौन” ही पर्याप्त है। क्योंकि वे भी किसी विचारधारा के साथ हैं। लेकिन, क्या करें “सच तो सच है।” और जो दिखाई दिया उस पर चुप्पी साधकर बैठने से अच्छा है कि, लिखकर ‘बाग़ी’ क़रार दे दिया जाऊँ। इस पर जिन्हें गालियाँ देना है, तालियाँ बजाना है, मुंह छिपाकर हंसना है वे स्वतंत्र हैं। क्योंकि, यह भी अकाट्य सत्य ही है कि, इस पोस्ट को पढ़कर लोग आगे तो बढ़ जायेंगे, पर बहुत विरले ही अपनी प्रतिक्रिया देने की ज़हमत उठायेंगे। पर ध्यान रहे, इस तरह का कटाक्ष कभी भी केवल एक पत्रकार पर नहीं होता।

“Journalism is meant for vertebrates.”

देखें संबंधित वीडियो…

दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार और मुंबई के पत्रकार अजीत उज्जैनकर की एफबी वॉल से.


मूल खबर….

मोदीजी, वैचारिक असहमति रखने वाले मीडियाकर्मी को आप गाली देने वाला पत्रकार नहीं बोल सकते : यशवंत सिंह

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