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अजीत अंजुम ने पूछा- प्रसूनजी किसी आर्थिक मजबूरी के मारे भी न थे, फिर ‘सूर्या’ में गए क्यों?

Ajit Anjum : मुझे हैरत तो उस दिन हुई थी, जिस दिन प्रसून वाजपेयी ने सूर्या समाचार ज्वाइन किया था. आज बिल्कुल हैरान नहीं, जब जाना कि प्रसून पूरी टीम के साथ वहां से रुखसत हो रहे हैं.
जिस आदमी से 20 मिनट की मुलाकात बाद ही मैं चाय तक छोड़कर उठ गया था कि आपके साथ न मैं चाय पी सकता हूँ न एक दिन काम कर सकता हूँ, उस आदमी की कंपनी में प्रसून चले कैसे गए? हैरानी इस बात पर हुई थी.

मेरी मुलाकात डेढ़ साल पहले हुई थी. नहीं चाहते हुए भी किसी के बहुत अनुरोध पर मिलने गया था. पहले मिनट में ही मैंने तय कर लिया कि यहां तो काम किसी सूरत में नहीं करना है. 15 मिनट बाद ‘लाला जी’ जी की चाय आई. चाय सामने रखते हुए उन्होंने कहा- ‘देखो जी, हम तो हर रोज की चाय का भी हिसाब रखते हैं. मुझे पता होता है कि आज कितनी चाय बनी’.

तभी मैं ये कहते हुए उठ खड़ा हुआ कि आप किसी वक्त के मारे को खोजिए, जो आपके साथ काम कर सके. आप चाय का हिसाब रखिए और बिस्किट के साइज पर रिसर्च करते रहिए. मेरे जैसा आदमी एक घंटा आपके साथ काम नहीं कर सकता.

लाला जी को हक्का बक्का छोड़ मैं तेजी से बाहर निकल गया. बाद में सुना कि कई संपादक आए और गए. हैरान उस दिन हुआ जब प्रसून गए. ये बात अगस्त 2017 की है. मैंने एक सुबह ताव में आकर इंडिया टीवी से इस्तीफ़ा दे दिया था और कुछ दिन ब्रेक पर रहने का मन बना चुका था. तीसरे ही दिन एक आदमी का फ़ोन आया कि आपसे आज ही मिलना है. देर रात को वो मेरे घर आए. प्रिया गोल्ड बिस्किट के मालिक का महिमा मंडन करने के बाद मेरे सामने उनके गर्भस्थ चैनल को लाँच करने का ऑफ़र रखा. मैंने साफ़ मना कर दिया तो कहने लगे कि एक बार कल ही आप चैयरमैन साहब से मिल लीजिए. फिर जो फ़ैसला करना हो करिए.

मैंने उनके ऑफ़िस जाने से इनकार किया. तब मेरी बताई जगह पर मीटिंग तय हुई. लाला जी मिलते ही कहने लगे मेरे ऑफ़िस ही चलिए. आराम से बात करेंगे. शिष्टाचार में मैं उनके साथ उनकी ही गाड़ी में चला गया. लेकिन शुरुआती बातों से ही पता चल गया कि उनकी मंशा क्या है. मैं चाहता तो लाखों की मोटी और मुंहमांगी रक़म लेकर दो-चार-छह महीने गुज़ार देता, जैसे कुछ बड़े पत्रकार-संपादक करते हैं. लेकिन मेरा ताव मुझे ऐसा करने नहीं देता है.

बाद में लाला जी से इस एनकाउंटर के बारे में मैंने कई दोस्तों को बताया. कुछ ने ये भी कहा कि आपको इतना ब्लंट नहीं होना चाहिए था. मैंने हमेशा यही कहा कि वो आदमी ऐसा ही ब्लंट जवाब डिजर्व करता था. मुझे ये बात समझ नहीं आई कि प्रसून जी किसी आर्थिक मजबूरी के मारे भी नहीं थे, फिर गए क्यों?

Asit Nath : बिस्कुटिया चैनल ने भी Punya Prasun Bajpai को रुखसत कर दिया। इस ख़बर से मुझे कोई हैरानी नहीं हुई। जिस दिन मैंने सुना कि प्रसून जी ने बिस्कुटिया चैनल ज्वाइन किया है उसी दिन मेरा पहला रिएक्शन था कि उन्होंने ग़लत फैसला ले लिया। उनके इस फैसले से बिस्कुटिया अग्रवाल का क़द बड़ा हुआ और खुद उनका क़द छोटा हुआ। बिस्कुटिया अग्रवाल से हुई मुलाकात के बाद मैंने जान लिया था कि ये आदमी मीडिया संस्थान चलाने के योग्य नहीं है।

मुझे याद है मेरे बड़े भाई तुल्य Anshuman Tripathi जी ने चैनल के दफ्तर में मुझे बुलाया था और बिस्कुटिया अग्रवाल से मेरी मुलाकात करवाई थी। योजना थी कि मैं प्राइम टाइम शो करूं और आउटपुट की जिम्मेदारी संभालूं। लेकिन 15-20 मिनट की बातचीत में मेरा मन ऊब गया और मैंने Anshuman Tripathi जी से माफी मांग ली। बाद में खुद अंशुमान जी ने भी चैनल छोड़ दिया। बिस्कुटिया अग्रवाल बिस्कुट बेच सकता है चैनल नहीं चला सकता। आज जब पता चला कि पुण्य प्रसून जी को भी उसने रुखसत कर दिया तो कोई हैरानी नहीं हुई।

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और असित नाथ की एफबी वॉल से.

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