प्रभासाक्षी.कॉम के ईपेपर का शुभारंभ, नया पोर्टल और मोबाइल एप जल्द ही आएगा

भारत के प्रमुख हिंदी समाचार विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम का ईपेपर भी आज से (epaper.prabhasakshi.com) पर उपलब्ध है। जल्द ही पोर्टल भी अत्याधुनिक स्वरूप में पाठकों के सामने होगा। भारत के प्रमुख हिंदी समाचार विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम का ईपेपर आज से पाठकों के लिए (epaper.prabhasakshi.com) पर उपलब्ध है। प्रभासाक्षी के सहयोगी संपादक नीरज कुमार दुबे ने बताया कि जल्द ही पोर्टल भी अत्याधुनिक स्वरूप में पाठकों के सामने होगा। प्रभासाक्षी का आगामी पोर्टल और मोबाइल एप तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक तथा भारतीयता की सशक्त छवि प्रदर्शित करने वाले होंगे।

प्रभासाक्षी.कॉम पिछले लगभग डेढ़ दशक से देश और विदेशों के कोने-कोने में हिंदी पाठकों का चहेता बना हुआ है। वर्तमान में प्रतिदिन चार लाख से ज्यादा हिट्स प्राप्त करने वाले इस पोर्टल पर प्रकाशित सामग्री रुचिकर और पठनीय होने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता से भरी होती है। जहाँ इंटरनेट पर सनसनीखेज और अशालीन सामग्री की भरमार है, वहीं प्रभासाक्षी ने साफ-सुथरी तथा निष्पक्षतापूर्ण सामग्री के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। यह पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण नहीं कर रहा अपितु भारतीय संस्कृति और भारतीयता का संदेश प्रसारित करने में भी तल्लीनता के साथ जुड़ा हुआ है।

देश के अनेक जाने-माने पत्रकार, लेखक, साहित्यकार, व्यंग्यचित्रकार आदि प्रभासाक्षी के साथ जुड़े रहे हैं। स्व. खुशवंत सिंह, स्व. अरुण नेहरू, स्व. दीनानाथ मिश्र प्रभासाक्षी पर नियमित कॉलम लिखते रहे। वर्तमान में श्री तरुण विजय, श्री राजनाथ सिंह सूर्य और श्री कुलदीप नायर जैसे प्रतिष्ठित स्तंभकार प्रभासाक्षी से जुड़े हुए हैं। तकनीकी दृष्टि से भी इस पोर्टल ने नए प्रतिमान कायम किए हैं, विशेषकर हिंदी भाषा में मौजूद प्रारंभिक सीमाओं तथा कठिनाइयों के बावजूद उसने गांव-कस्बों में रहने वाले नागरिकों के लिए उनकी अपनी भाषा में समाचार और विश्लेषण प्राप्त करना आसान बनाया है।

लगभग डेढ़ दशक पहले जब इंटरनेट पर हिंदी नाममात्र के लिए उपलब्ध थी उस समय प्रभासाक्षी के प्रबंध संपादक श्री गौतम मोरारका ने बिना किसी व्यावसायिक लाभ की अपेक्षा करते हुए इंटरनेट पर हिंदी भाषा के विकास, विस्तार और आम भारतीयों तक उनकी अपनी भाषा में वांछित जानकारी पहुँचाने का जो लक्ष्य तय किया था उसे देश-विदेश के लाखों पाठकों की बदौलत हासिल तो कर लिया गया लेकिन चुनौती बिना आर्थिक लाभ के मैदान में डटे रहने की थी। पिछले 14 वर्षों में पता नहीं कितने हिंदी के समाचार पोर्टल आए और गए लेकिन श्री मोरारका जी के दृढ़ निश्चयी रुख और हिंदी भाषा के प्रति प्रतिबद्धता के कारण प्रभासाक्षी मैदान में ना सिर्फ डटा रहा बल्कि अपने तीव्र अपडेशन और विविधता भरी पठनीय सामग्री के चलते समाचार जगत में एक अलग पहचान बनाने में भी कामयाब रहा।

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