बिना शीर्षक के अखबार और खबर

आज चुनाव परिणाम का दिन है। रिवाज रहा है शीर्षक में जीत और हार के कारण बताने का। ईमानदारी से कहूं तो उत्तर प्रदेश की जीत अगर नोटबंदी की ‘सफलता’ थी और बिहार में अंतरात्मा की आवाज पर सरकार बदल गई और बहुमत मिलने का मतलब नोटबंदी तथा जीएसटी है तो पाठकों या मतदाताओं को जीत हार का कारण बताने की जरूरत नहीं है। जो हराता है या सत्ता सौंपता है वो जानता है। ऐसे में अखबारों के शीर्षक किसके लिए?

जीतने वालों के अपने मायने होते हैं। हारने वाला जीतने की कोशिश में लग जाता है या गाय-गोबर मंदिर से हार कर छोड़ भी दे तो जनता के पास विकल्प तो हो। ऐसी हालत में इंदौर के नए अखबार प्रजातंत्र ने कल ही एलान कर दिया था कि वह इस बार चुनाव परिणाम के खबर बिना शीर्षक छापेगा और फिर भी अखबार अधूरा नहीं लगेगा। तो आज के प्रजातंत्र का पहला पन्ना देखिए। चुनाव परिणाम है लेकिन कोई शीर्षक नहीं। आप जो जानना चाहें वह है जबरदस्ती की टिप्पणी नहीं।

ऐसा ही आज का टेलीग्राफ है। सभी अखबारों में चुनाव नतीजे की खबर लीड है यहां राहुल गांधी की फोटो है और शीर्षक, “अब हमें लड़ना है”। अगर राहुल ने ऐसा कहा है तो इसका मतलब यही है कि यह तो बिना लड़े मिला है। राहुल ने कहा हो या नहीं।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की टिप्पणी। संपर्क : anuvaad@hotmail.com

 

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