जो इस्तीफा दे चुका है उसे श्रम विभाग नोएडा ने पार्टी बनाकर नोटिस जारी कर दिया! (पढ़ें प्रसून शुक्ला का पत्र)

द्वारा, प्रसून शुक्ला, पूर्व एडिटर इन चीफ  एवं सीईओ, न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल

08.06.2015

श्री शमीम अख्तर

सहायक श्रम आयुक्त

गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

संदर्भ :  प्रसून शुक्ला, (पूर्व सीईओ एवं एडिटर इन चीफ) को भेजे गये 06.06.15 की नोटिस का जवाब

शमीम जी,

 

5 जून 2015 को कर्मचारियों से प्राप्त शिकायत के मद्देनजर 06 जून 15 को जारी आपके ऑफिस से पत्रांक में मेरी उपस्थित आपके दफ्तर में जरूरी बताई गई. आप कर्मचारियों का हक दिलाने की मंशा रखने का दम भरते हैं, ये अच्छी बात है. लेकिन व्यवहार में आप का बर्ताव कहीं से भी सरकारी मुलाजिम जैसा नहीं है. आप साजिश का हिस्सा बनते रहे. 17अप्रैल2015 से लेबर कोर्ट में जारी विवाद में अभी तक मुझे कोई भी नोटिस नहीं भेजी गई थी. हालांकि इसके लिए भी आपने कुछ कर्मचारियों लगातार प्रेरित किया. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वेतन की दृष्टि से 29-05-2015 को मेरा न्यूज़ एक्सप्रेस के दफ्तर में आखिरी दिन था. जिसकी सूचना प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को मेल के जरिए 16-05-15 को दे दी गई थी. जिसमें साफ था कि मैंने 29अप्रैल2015 को इस्तीफा दे दिया था. संबंधित पत्राचार संलग्न है. (पत्राचार क्रमांक-1)

कर्मचारियों को पैसा मिलना चाहिए, लेकिन सैलरी दिलाने में मेरी भूमिका शुरू से ही शून्य और खुद वेतनभोगी की है. इसके बावजूद विवाद होने की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए 29 अप्रैल को ही इस्तीफा दे दिया. क्या आप भी ऐसी नैतिकता का परिचय देने में सक्षम हैं? सैलरी विवाद पर प्रबंधन से अपना विरोध दिखाने के लिए दो बार मेल भी किया. क्या आप बता सकते हैं कि इस्तीफे से ज्यादा मैं और क्या कर सकता था? इससे संबंधित पत्राचार संलग्न कर रहा हूं. {(पत्राचार क्रम-1)}

कर्मचारियों के साथ आपने भी शुरू से ही विवाद में मेरा नाम नहीं डाला क्योंकि सैलरी सीधे पुणे हेड ऑफिस से आती थी. इसके बारे में सभी कर्मचारियों को पता था. कर्मचारियों द्वारा किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक प्रक्रिया में मुझे नहीं शामिल करने के पीछे भी यही वजह रही. प्रबंधन ने सारे मामले को देखने और अपना पक्ष रखने के लिए सीओओ संदीप शुक्ला को भेजा, जिन्होंने विवाद के मद्देनजर कंपनी के तरफ से हस्ताक्षर भी किये. ऐसे में मेरे इस्तीफा देने के बाद मुझे नोटिस भेजना आपकी एक कुटिल चाल रही.

शमीम जी, आपकी नीयत शुरू से ही इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की रही. जिसका खुलासा 18 अप्रैल 2015 को मेरे द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट आने से हुआ. ये रिपोर्ट न्यूज़ एक्सप्रेस के उन लोगों ने तैयार की, जो अपने हक की लड़ाई के लिए आपके ऑफिस गये थे. जांचकर्ताओं में ऑउटपुट हेड राकेश त्रिपाठी, डिप्टी एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर अभय उपाध्याय और प्रिंसिपल कॉरसपोंडेंट प्रख्या शामिल रहीं. जिनकी रिपोर्ट में आपका रोल सीधे तौर पर संदिग्ध पाया गया. जांच संबंधी पत्राचार भी संलग्न कर रहा हूं. {जांच रिपोर्ट (पत्राचार क्रम-2)}

जांच नतीजों में यह भी सामने आया कि प्रबंधन के खिलाफ आपने लोगों को शुरू से भड़काया और मेरे खिलाफ मामले को सांप्रदायिक रंग देने की भरपूर कोशिश की. आप दो महीने से कार्रवाई कर रहे हैं, पुणे में प्रबंधन से सीधे संवाद कर रहे थे, तब सीईओ को क्यों नहीं पार्टी बनाया? इस्तीफे के बाद नोटिस क्यूं भेजा? 5जून2015 को लिखे शिकायती पत्र में मेरा नाम डालकर मेरी प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया. ये प्रशासनिक दायित्व निभाने का सबसे घटिया प्रमाण है.

जहां तक सुश्री रूबी अरूण (पूर्व इनपुट एडिटर) की शिकायत का सवाल है, तो सुश्री रूबी श्रमिक की श्रेणी में आती ही नहीं हैं, जिसका ज्ञान आपको अच्छी तरह से है. सुश्री रूबी ने 5 मई को अपना इस्तीफा उस समय जांच के दौरान सौंपा, जब उनपर एक महिला रिपोर्टर ने गाली-गलौज करने का आरोप लगाया. जिसके साक्ष्य में तमाम गवाह और सबूत भी मौजूद हैं, जिसके चलते सुश्री रूबी ने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा. इस्तीफे के कारण सुश्री रूबी का पूरा पैसा कंपनी ने एक महीने की नोटिस के हिसाब से 5 जून 2015 को दे दिया है. सुश्री रूबी के इस्तीफे, और उन पर लगे आरोपों से संबंधित जांच की कॉपी भी संलग्न कर रहा हूं. {जांच रिपोर्ट (पत्राचार क्रम-3)}

शमीम जी, ऐसा मुझे ज्ञात हुआ है कि सुश्री रूबी कंपनी की ओर से मिली गाड़ी वापस नहीं देना चाहती हैं, जिसके कारण वो आपके साथ मिलकर मामले को न्यायिक प्रक्रिया में उलझाने की साजिश रच रही हैं. जिसका उदाहरण यह नोटिस है.अगर प्रार्थी सुश्री रूबी अरूण इस्तीफे से इंकार करती हैं तो हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से आपराधिक श्रेणी में मामला दर्ज करके पत्राचार की जांच कराई जा सकती है. आपको सचेत कर रहा हूं कि आप किसी भी गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा ना बने.(पत्राचार क्रम-3)

इन तथ्यों को आपको कई कर्मचारियों ने बताया, पर तथ्यों को अनदेखा करके आप ना केवल अपनी बल्कि सरकार और विभाग की भी छवि धूमिल कर रहे हैं. ये गंभीर विषय है.  मेरी साख को दांव पर लगाने की कोशिश के लिए केवल आप जिम्मेदार हैं. आपराधिक साजिश की आशंका के चलते इस पत्र और संलग्न पत्राचार की कॉपी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, प्रमुख सचिव, श्रम विभाग के साथ एसएसपी गौतमबुद्ध नगर और एसएसपी गाजियाबाद के पास भी भेज रहा हूं. ताकि किसी भी आपराधिक साजिश को नाकाम बनाया जा सके और आपको भी सचेत करता हूं कि नोटिस वापस लेकर भविष्य में इस बाबत कोई पत्राचार नहीं करें.

हस्ताक्षर

प्रसून शुक्ला
पूर्व संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी
न्यूज़ एक्सप्रेस

कॉपी :
1. श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधानमंत्री
2. श्री राजनाथ सिंह जी, गृहमंत्री
3. श्री अखिलेश यादव जी, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
4. प्रमुख सचिव, श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश
5. एसएसपी, गौतमबुद्ध नगर
6. एसएसपी, गाजियाबाद      

संलग्न पत्राचार के कुल पृष्ठ : 
पत्राचार क्रमांक 1 =  इस्तीफे से संबंधित पत्राचार
पत्राचार क्रमांक 2  = 18.04.15जांच रिपोर्ट के कागजात       
पत्राचार क्रमांक 3 = सुश्री रूबी के इस्तीफे और गाड़ी संबंधी कागजात

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