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ईवीएम-वीवीपैट पर 21 विपक्षी दलों ने पुनर्विचार याचिका दायर की

तीन चरणों में ईवीएम में गडबडी कि ढेरों शिकायत, वीवीपैट में भी पर्ची 7 सेकंड की जगह केवल 3 सेकंड दिखती है… आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों ने बुधवार को 50 फीसदी ईवीएम-वीवीपैट मिलान को लेकर उच्चतम न्यायालय में बुधवार को पुनर्विचार याचिका दायर की। 14 अप्रैल को बैठक में विपक्षी दलों ने इस मामले को फिर से उच्चतम न्यायालय लेकर जाने की बात कही थी।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को ईवीएम और वीवीपैट के मिलान का दायरा बढ़ाने के लिए कहा था। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया था कि लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभाओं के पांच बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट का मिलान किया जाए। इससे पहले हर विधानसभा के एक पोलिंग बूथ पर ही पर्चियों का मिलान होता था।

पहले भी 21 विपक्षी दलों ने इस व्यवस्था के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ विपक्षी पार्टियों की 50 फीसद पर्चियों के मिलान की मांग पर सहमत नहीं हुई थी। पीठ ने कहा था कि इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ेगी, बुनियादी ढांचे को देखते हुए ये मुमकिन नहीं लगता।

चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय में कहा था कि वीवीपैट स्लिप गिनने का मौजूदा तरीका सबसे उपयुक्त है। अभी विधानसभा चुनाव में एक पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान होता है। वहीं, आम चुनाव में लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों की एक-एक पोलिंग बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान होता है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि मौजूदा व्यवस्था ठीक है इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। अगर 50 फीसद पर्चियों के मिलान की मांग मानी गई तो चुनाव परिणाम आने में कम से कम छह दिनों का समय लगेगा।कोर्ट में चुनाव आयोग के हलफनामें का जवाब देते हुए विपक्षी दलों ने कहा था कि अगर वीवीपैट पर्चियों की गिनती के कारण चुनाव नतीजों में छह दिनों की देरी से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चुनाव आयोग के हलफनामे के जवाब में अपना जवाब दाखिल करते हुए विपक्षी दलों ने कहा था कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। आयोग ने हलफनामे में दावा किया है कि नतीजों में औसतन छह दिनों की देरी हो सकती है।

नायडू के अलावा शरद पवार, केसी वेणुगोपाल, डेरेक ओब्रायन, शरद यादव, अखिलेश यादव, सतीश चंद्र मिश्रा, एमके स्टालिन, टीके रंगराजन, मनोज कुमार झा, फारूक अब्दुल्ला, एसएस रेड्डी, कुमार दानिश अली, अजीत सिंह, मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, जीतन राम मांझी, प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह याचिकाकर्ताओं में शामिल थे।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग समाप्त होने के बाद कई विपक्षी दलों की दिल्ली में बैठक हुईथी। बैठक में इस मुद्दे को फिर से उच्चतम न्यायालय में ले जाने की तैयारी की बात कही गई थी, क्योंकि पहले चरण के मतदान में बड़ी संख्या में ईवीएम मशीनों में गडबडी की शिकायतें सामने आई थीं ।विपक्षी पार्टियों द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इन नेताओं ने कहा कि ईवीएम के खिलाफ हम उच्चतम न्यायालय जाएंगे।दलों ने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए बैलट पेपर से वोटिंग की वकालत की।

‘संविधान बचाओ’ के नारे के तहत आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल शामिल हुए। सिंघवी ने कहा कि पहले चरण के चुनाव के बाद ईवीएम पर सवाल उठे हैं, हमें नहीं लगता कि चुनाव आयोग इसपर पर्याप्त ध्यान दे रहा है। अगर आप एक्स पार्टी को वोट देते हैं तो वोट वाई पार्टी को जाता है। वीवीपैट में भी पर्ची 7 सेकंड की जगह केवल 3 सेकंड दिखती है।

इसके पहले नायडू ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत लेकर चुनाव आयोग पहुंचे थे। उनका आरोप था कि आंध्र प्रदेश में गुरुवार को पहले चरण की वोटिंग के दौरान 4 हजार से ज्यादा ईवीएम में खराबी आई थी। रविवार को उन्होंने कहा, ‘हम ईवीएम के मुद्दे पर फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बहुत कम देश हैं जो ईवीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हमें वोटर्स का विश्वास जीतना है तो बैलट पेपर का इस्तेमाल करना होगा।’

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