राजदीप हाथापाई प्रकरण पर पत्रकारों के बीच भी ध्रुवीकरण : कोई पक्ष में तो कोई विपक्ष में

Ashish Maharishi : देश में जब से Narendra Modi की भगवा सरकार बनी है, तब से हिंदुत्‍व के ठेकेदारों की गुंडागर्दी बढ़ गई है। देश ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी ये ताकतें सिर उठा रही हैं। Rajdeep Sardesai को पहले गाली देना और फिर हमला करना यह बताता है कि भगवा आतंक एक बार फिर देश में सिर उठाने के लिए बेताब है। याद कीजिए 1992 और 2002, जब इन ताकतों ने पूरी दुनिया में हमारे देश को बदनाम कर दिया था। संघ से शिक्षा दीक्षा पाकर ये ताकत हर जगह फैल चुकी हैं। झुग्‍गी झोपड़ी से लेकर न्‍यूज रूम तक ये फैले हुए हैं। इनका विरोध जितना कीजिए, कम है। राम और हिंदू धर्म के ये ठेकेदार न सिर्फ इंसानियत के दुश्‍मन हैं, बल्‍कि हिंदुत्‍व के भी दुश्‍मन हैं। गांधी के ये हत्‍यारे अब गांधी और विवेकानंद को बेच रहे हैं। दोस्‍तों, पत्रकार Rajdeep Sardesai पर हमले का खुले या छिपे तरीके से समर्थन करने वालों को मित्र सूची से हटा रहा हूं। मित्र सूची में सांप्रदायिक लोग नहीं चाहिए। यदि आप पत्रकार पर हमले का समर्थन करते हैं तो अपने आप मेरी सूची से हट जाएं। वरना मुझे हटाना पड़ेगा।

Dr. Subramanian Swamy : From yesterday many media houses are playing a small, incomplete clip and claiming that Modi supporters attacked Rajdeep Saradesai! Now watch this video to know what really happened! It was our renowned Journalist who actually first abused, and attacked an NRI at Madison Square Garden, NYC. After this incident NRI’s started calling Police, which is the right thing to do! Also, you can find other YouTube videos where our leading Journalist is insulting NRIs by calling them Idiots, frenzy Narendra modi supporters, people with money but no class etc.!  Video Link… https://www.youtube.com/watch?v=9nVswhKG9So

Awadhesh Kumar : मित्रों, कल राजदीप सरदेसाई के साथ दुर्व्यवहार की मैंने निंदा की थी। कारण, उस समय हमारे पास एबीपी न्यूज चैनल का वही वीडिया उपलब्ध था जिसमें उनको धक्का देते हुए हाथ से पिटाई हो रही है। हालांकि उस समय भी मैंने आश्चर्य प्रकट किया था कि आखिर आज तक और हेडलाइन टुडे जिसके वे प्रतिनिधि हैं, इसे क्यों नहीं दिखा रहा है! अब एक वीडियो क्लिप आया है जिसमें राजदीप भी आम मुहल्ले के लड़कों की तरह बाजाब्ता हाथों से एक व्यक्ति पर हमला करते हैं, उसे मारते हुए धकेलते हैं। लोग कह रहे हैं, आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। एक साथ कई लोग कह रहे हैं कि कॉल द पुलिस, कॉल द पुलिस। यह अमेरिकी स्वभाव है कि कानून वहां लोग हाथ में नहीं लेते। ऐसा होने पर लोग पुलिस को ही बुलाते हैं। इसके आगे पीछे का वीडियो नहीं है। राजदीप का व्यवहार भी वहां असभ्य है। वह व्यवहार कहीं से भी समर्थन देने योग्य नहीं है। जाहिर है, या तो राजदीप पहले किसी के द्वारा टोकने पर उसे मारते हुए धकेलते हैं या पहले उनके साथ कुछ हुआ है। पर जिस समय वे धकेलते हुए दिख रहे हैं उस समय वह व्यक्ति उन पर हमला नहीं कर रहा है। हो सकता है उसके बाद गुस्से में उन पर हमला हुआ हो। लेकिन राजदीप के द्वारा किया गया कृत्य भी किसी दुष्टि से स्वीकार्य नहीं है। लगता ही नहीं कि कोई वरिष्ठ गंभीर पत्रकार ऐसा कर सकता है। वहां मोदी मोदी का नारा सुनाई दे रहा है, एक युवक उनको टोकता भी है कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं और उस पर वे उस पर हमला कर देते हैं। इसलिए अच्छा होगा कि पूरी घटना का वीडियो फुटेज लाया जाए। सच्चाई तभी सामने आएगी। मेरा अनुरोध होगा कि जिसके पास भी पूरा वीडियो फुटेज हो वो जरुर सामने लायें।

Sanjay Tripathi : वैसे समर्थक होना बुरा नही है सर भक्त होना दुखद है जो व्यक्ति को विवेक शून्य बनाती है।यह ऐसी परंपरा बन रही है जिसका परिणाम बहुत घातक होगा। यदि राजदेसाई का नाटक पूर्व नियोजित है तो मोदी का नाटक वहां की भीड़ सब पूर्वनियोजित है।वहां सब गुजराती की भीड़ इकट्ठा की गई थी जिसके लिये बाकायदा दिन रात प्रयास किया गया है। और जो विरोध कर रहे थे उनको दूर किया गया।और रही बात अमेरिका मे सम्मान की तो वो वहा के सरकारी आचरण से दिखता है न कि भाड़े के भीड़ से न तो एयर पोर्ट पर ही कोई प्रोटोकॉल न ही ट्रैफिक रोका गया।एक सामान्य आदमी जैसा व्यवहार अमेरिका प्रशासन द्वारा किया गया।

Satya Prakash Chaudhary : राजदीप सरदेसाई पर हमले की खबर एबीपी न्यूज को छोड़ कर हर जगह गायब दिखी. सचमुच अंबानी के सिक्कों ने पत्रकारों खास कर संपादकों को कुत्ते में बदल दिया है. भौंकनेवाले नहीं, तलवे चाटनेवाले. गलती चाहे जिसकी हो, पर यह खबर तो दिखनी, छपनी चाहिए थी…

Ajay Kumar : सत्‍यप्रकाश जी, कुछ वीडियो फेसबुक पर अपलोड हैं, जिसमें राजदीप सरदेसाई जी के रिपोर्टिंग का तरीका दिख रहा है। हाथ पहले राजदीप सरदेसाई जी ने चलाया है। उस पर भी गौर किया जाना चाहिए। पत्रकार के तौर पर हम किसी के विरोधी हो सकते हैं। किसी के विचार से असहमत हो सकते हैं। लेकिन हमें भी अपनी मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए। कुछ वीडियो में यह दिख रहा है कि राजदीप सरदेसाई जी शायद अपनी सीमा को लांघ रहे हैं।

Yogesh Kumar Sheetal : क्रिया की प्रतिक्रिया होती है ऐसा शायद राजदीप सरदेसाई ने पहली बार इतनी नजदीक से अनुभव किया होगा!

Suresh Chiplunkar : काश कि पीटा होता… पूरा वीडियो देखा है मैंने… शुरुआत इस “ट्रेडर” ने ही की थी पहले एक दर्शक को Asshole बोलकर, फिर धक्का देकर… इसके साथ सिर्फ जवाबी धक्कामुक्की ही हो पाई… कान के नीचे जोरदार आवाज़ निकल ही नहीं पाई… खेद की बात है. दोनों मियाँ-बीबी नंबर एक के नौटंकीबाज हैं… अपनी किताब बेचने का स्टंट है ये सब.

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Comments on “राजदीप हाथापाई प्रकरण पर पत्रकारों के बीच भी ध्रुवीकरण : कोई पक्ष में तो कोई विपक्ष में

  • Rajdeep ke Acharan ko dekh kar koi ise sover patrkar bolta h to uski budhi par Taras aata h, bhartiye media me pichale 20 salo me bahut sare Dalal, jugadu patrkarita ke nam par congress ke liye kam karte h unme kuch apne aap ko vam panthi, manavtavadi, v dalitvadi kahlate h, inlogo me narendra modi v sangh ke prati grihna bhari hui h, ese patrkar janta ke liye patrakarita nahi karte apne vichar janta par thopne ki kosis me lage rahte h,

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  • jitendra jyoti says:

    पत्रकारिता की स्थिति में तब सुधार आएगा जब दिल्ली में बैठे चैनल और समाचार पत्र में उच्च पद पर आसीन बुजुर्ग और दलाल पत्रकारों को जंतर मंतर पर रस्सी से बांधकर नंगा करके डंडा से पीटा जाये।

    जितेन्द्र ज्योति (पत्रकार 9891687498)

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