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दिल्ली में इन दिनों तीन-चार चैनल सुपारी जर्नलिज्म चला रहे हैं : राजदीप सरदेसाई


: चैनलों में रात में नौटंकी चलती है : पत्रकार राजदीप सरदेसाई का कहना है कि दिल्ली में इन दिनों तीन-चार चैनल सुपारी जर्नलिज्म चला रहे हैं। वहां मालिकों के इशारे पर, जो कि सरकार की तरफ देख रहे हैं, आम आदमी पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने खुलकर कहा कि रात को चैनलों पर जो नौटंकी हो रही है, उसमें आम आदमी पार्टी पर तो चर्चा होती है, लेकिन उनके प्रतिनिधि को नहीं बुलाया जाता। दिल्ली में आखिर हो क्या रहा है?


: चैनलों में रात में नौटंकी चलती है : पत्रकार राजदीप सरदेसाई का कहना है कि दिल्ली में इन दिनों तीन-चार चैनल सुपारी जर्नलिज्म चला रहे हैं। वहां मालिकों के इशारे पर, जो कि सरकार की तरफ देख रहे हैं, आम आदमी पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने खुलकर कहा कि रात को चैनलों पर जो नौटंकी हो रही है, उसमें आम आदमी पार्टी पर तो चर्चा होती है, लेकिन उनके प्रतिनिधि को नहीं बुलाया जाता। दिल्ली में आखिर हो क्या रहा है?

चार बाग में हुए सेशन “डीकंस्ट्रक्टिंग चेंज : द इलेक्शन दैट चेंज्ड इंडिया” में राजदीप ने समकालीन राजनीति पर खुलकर चर्चा की। चर्चा 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी के उत्थान और विपक्ष के दर्जे से वंचित कांग्रेस और राहुल गांधी पर केंद्रित रही। पत्रकार मिहिर शर्मा और मधु त्रेहान ने सत्र को रोचक बनाया। राजदीप ने मीडिया के रवैये पर सवाल उठाया। इमरजेंसी के दौर की चर्चा करते हुए कहा कि तब मीडिया पर सेंसरशिप थी, लेकिन अब एक अलग दौर आ गया है, जिन्हें प्रधानमंत्री से सवाल पूछने चाहिए, वे सेल्फी ले रहे हैं। हालांकि इस डाउनफॉल के लिए मीडिया खुद ही जिम्मेदार है।

राजदीप ने कहा कि भारत दिल्ली में नहीं, बल्कि राज्यों की राजधानियों में है। जहां कई मुख्यमंत्री विकास के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें समझ में आ गया है कि चुनावों में विकास के मुद्दे से ही जीत हासिल की जा सकती है। मिहिर शर्मा ने सवाल उठाया कि चुनावों में जो वादे किए गए थे, अब युवाओं को रोजगार चाहिए। 13 मिलियन को रोजगार की जरूरत है, जबकि हैं सिर्फ एक मिलियन। अब देखना है पांच साल में क्या होगा?

राजदीप ने कहा कि वे मोदी के चीयरलीडर नहीं हैं, लेकिन मोदी ने जो किया, वह सामने है। उन्होंने इस उम्र में भी सोशल नेटवर्किंग के माध्यम को अपनाया और युवाओं के करीब पहुंचे। इनमें वो 18-23 साल के युवा हैं, जो उदारीकरण के बाद जन्मे हैं और मोदी के 2002 के सबसे बुरे दौर के समय मात्र आठ साल के थे। जबकि राहुल सोशल नेटवर्किंग से दूर हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेसी मित्रों से इस बारे में चर्चा करते हैं, तो जवाब आता है कि राहुल जनता से सीधा सम्पर्क करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल को यदि कुछ करना है, तो पांच साल के लिए लखनऊ जाएं, वहां सीधे एक-एक व्यक्ति से मिलें और उत्तरप्रदेश में पांच साल में सरकार बनवाकर दिल्ली आएं। मिहिर ने कहा कि केन्द्र सरकार भूमि सुधार बिल लाई, लेकिन कांग्रेस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उस समय उनके नेता जन्मदिन मना रहे थे, जबकि इस पर गंभीर चि ंतन ही नहीं हुआ। राजदीप ने यहां भी चुटकी ली और कहा कि अब जागीरदारी और जमींदारी प्रथा की तरह पार्टियां नहीं चलेंगी।

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1 Comment

1 Comment

  1. rajinder soni

    January 27, 2015 at 9:25 am

    rajdeep sir theek kahte hai zamanz badal gya lekin patarkarita me bhadwagiri ka daur aa gya hai bade udhyogpatiyon ne media par ekadikar karna shuru kar diya yah aane wale kal ke bure sanket hau

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