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सहारा मीडिया से रणविजय सिंह को टर्मिनेट किए जाने की खबर!

सहारा मीडिया से एक बड़ी सूचना है कि दशकों से वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे रणविजय सिंह को प्रबंधन ने टर्मिनेट कर दिया है. उन्हें काफी समय से अधिकार विहीन कर साइडलाइन कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि रणविजय सिंह पर कई किस्म के आरोप थे जिसमें पद का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण करना भी शामिल है. उन पर अवैध संपत्ति बनाने और आर्थिक भ्रष्टाचार करने के भी आरोप हैं. उनको लेकर सहारा में आंतरिक जांच कराई गई जिसमें वह सहारा मीडिया के लिए अयोग्य पाये गये. उन पर स्टाफ में असंतोष को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय के खासमखास ओपी श्रीवास्तव उनसे इन दिनों सख्त नाखुश थे. चर्चा है कि तीन चार बड़े विकेट और गिरेंगे बहुत ज़ल्द. उधर, रणविजय खुद यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें टर्मिनेट नहीं किया गया, बल्कि वह खुद हटे हैं. 

<p>सहारा मीडिया से एक बड़ी सूचना है कि दशकों से वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे रणविजय सिंह को प्रबंधन ने टर्मिनेट कर दिया है. उन्हें काफी समय से अधिकार विहीन कर साइडलाइन कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि रणविजय सिंह पर कई किस्म के आरोप थे जिसमें पद का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण करना भी शामिल है. उन पर अवैध संपत्ति बनाने और आर्थिक भ्रष्टाचार करने के भी आरोप हैं. उनको लेकर सहारा में आंतरिक जांच कराई गई जिसमें वह सहारा मीडिया के लिए अयोग्य पाये गये. उन पर स्टाफ में असंतोष को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय के खासमखास ओपी श्रीवास्तव उनसे इन दिनों सख्त नाखुश थे. चर्चा है कि तीन चार बड़े विकेट और गिरेंगे बहुत ज़ल्द. उधर, रणविजय खुद यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें टर्मिनेट नहीं किया गया, बल्कि वह खुद हटे हैं.  </p>

सहारा मीडिया से एक बड़ी सूचना है कि दशकों से वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे रणविजय सिंह को प्रबंधन ने टर्मिनेट कर दिया है. उन्हें काफी समय से अधिकार विहीन कर साइडलाइन कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि रणविजय सिंह पर कई किस्म के आरोप थे जिसमें पद का दुरुपयोग करते हुए महिलाओं का शोषण करना भी शामिल है. उन पर अवैध संपत्ति बनाने और आर्थिक भ्रष्टाचार करने के भी आरोप हैं. उनको लेकर सहारा में आंतरिक जांच कराई गई जिसमें वह सहारा मीडिया के लिए अयोग्य पाये गये. उन पर स्टाफ में असंतोष को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया. बताया जा रहा है कि सुब्रत राय के खासमखास ओपी श्रीवास्तव उनसे इन दिनों सख्त नाखुश थे. चर्चा है कि तीन चार बड़े विकेट और गिरेंगे बहुत ज़ल्द. उधर, रणविजय खुद यह दावा कर रहे हैं कि उन्हें टर्मिनेट नहीं किया गया, बल्कि वह खुद हटे हैं. 

रणविजय सिंह पर गाज गिराए जाने के बाद कहा जा रहा है कि कई अन्य मोटी पगार वाले नाकार लोगों को सहारा मीडिया से हटाया जा सकता है. उधर भड़ास से बातचीत में रणविजय सिंह ने टर्मिनेट किए जाने की सूचना को गलत बताया. उन्होंने कहा कि वे महीने भर पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जिसे प्रबंधन ने अब स्वीकार किया है. रणविजय सिंह के मुताबिक उनके पास सहारा में करने के लिए कोई काम नहीं था इसलिए उन्हें सुब्रत राय से मिलकर या तो काम देने या फिर इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया था.

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आगे की योजना के बारे में रणविजय सिंह का कहना है कि 21 नवंबर को बिटिया की शादी है. शादी के बाद ही वह नए वेंचर के बारे में घोषणा करेंगे. ज्ञात हो कि रणविजय सिंह राष्ट्रीय सहारा लखनऊ के स्थानीय संपादक रहे. बाद में उन्हें ग्रुप एडिटर तक बनाया गया और नोएडा में बिठाया गया. अब उनकी सहारा से विदाई हो गई है.

फिलहाल पूरा सहारा मीडिया इन दिनों अभिजीत सरकार के नेतृत्व में ठीकठाक चल रहा है. सेलरी का संकट भी खत्म हो गया है. टाइम से लोगों को सेलरी मिलने लगी है. सहारा के चैनल्स जल्द ही टाटा स्काई पर लाए जा रहे हैं. सहारा मीडिया को आर्थिक रूप से दुरुस्त करने के क्रम में ही बड़े पदों पर आसीन निष्क्रिय लोगों को हटाया जा रहा है.

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0 Comments

  1. Insaf

    November 5, 2016 at 4:26 pm

    सहारा मैनेजमेंट से गंदगी साफ़ करने के लिए कुछ सुझाव है. यदि सही में इसपर अमल हुआ तो राष्ट्रीय सहारा गौरव ही नहीं प्राप्त करेगा , बल्कि पुरे सहारा इंडिया का माँ सम्मान बढेगा.
    1. वैसे पदाधिकारियों का पता लगायें जिन्होंने अपने चहेतों को बढ़ावा देने के लिए रिदेजिनेट की परम्परा निकाली.योग्य कर्मी प्रमोशन के मुहताज रह गए और रिदेजिनेट कर्मियों ने एजेडब्लू , ऑफिसर , जूनियर एग्जीक्यूटिव होते हुए मजीठिया में जमकर विशेष संबाददाता की मलाई मारी है. क्योंकि ऐसे ऑफिसर कैडर को विशेष संबाददाता की पूंछ लगा दी गयी. १५-२०-२५ वर्षों से कई लोग वरिष्ठ संबाददाता, प्रधान संबाददाता बने हुए है. एग्जीक्यूटिव भी है और सीनियर एग्जीक्यूटिव भी है , किन्तु वरिष्ठ के तलवे नहीं चाटने के कारन रिदेगिनाते नहीं हो पाए इसलिए मजीठिया में बेहद जूनियर से पीछे कर दिए गए.
    २. संस्थान यह भी गुप्त रूप से पता करे कि किसने हालिया हड़ताल का साथ दिया था. ऐसे लोग कभी भी फन उठा सकते है. मजीठिया में ऐसे कई लोगों को पुरस्कार दिया गया है. १०-१५-२० हजार तक उनकी सैलरी बढाई गयी है. जो हड़ताल रोकने के लिए आगे आये उनके वेतन न बढाकर सजा दी गयी. इस बात का ख्याल संस्थान अवश्य रखे.
    ३. योग्यता और मेरिट का अवश्य ध्यान रखा जाये.

  2. Uday

    November 6, 2016 at 1:29 am

    It is a hard fact that some officer cadre worker redisiginated in March 2016 as a special correspondent due to caste of his then boss. Now the boss is out and his inefficient khurpench worker getting the advantage of Majithia wage board. It is totally wrong. This type of worker misguided the company for his hinterest. If Majithia wage board is inforced from 2010 then how a new entrant worker redesiginated in 2016 get the Majithia benefit. For the transparency, a central team should visit the all branches of Rashtriya Sahara and investigate the matter. Majithia reccomends the promotion and increment in five years. What about the worker who has niether got the promotion or nor redesignitated in five years or fifteen years. Company should give respectable designation as well as increment who are left from promotion and redesignation in 10 to 15 years.

  3. Bharat

    November 6, 2016 at 10:40 am

    Rahtriya Sahara has applied Majithiya in a haste . There are so many clause in Majithia wage board but it seems pick and choose method applied. Majithia has journalistic designation and administrative designation both. For example if some one is senior correspondent his administrative designation is executive. Majithia reccommends benefit in both cases either he is executive or sr, correspondent so on sr.executive, principal correspondent or manager , dy.manager, sr, manager. One has to check the joinig date of holding such a possition.Company has to give revised salary in each cases. So, Rashtriya Sahara should reviews in greater interest of company. Ranvijay Singh was one of the man who started redignated process. So company has taught him good lesson.

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