अमर उजाला अपने पत्रकारों को ‘पत्रकार’ बताने में भी डरता है!

अमर उजाला अपने गांव देहात कस्बे के पत्रकारों को पत्रकार बताने से डरता है. इसके पीछे वजह चाहें जो हो, पर यह हरकत उसके जमीनी पत्रकारों को व्यथित कर देती है.

माना जाता है कि अखबार वाले अपने गांव देहात कस्बे के संवाददाताओं को संवाददाता इसलिए नहीं कहते बताते छापते क्योंकि उन्हें संवाददाता की सारी सुविधाएं देनी होंगी, वेज बोर्ड के हिसाब से उन्हें ठीकठाक सेलरी व अन्य तय भुगतान देना होगा.

साथ ही ये संवाददाता अपने हक के लिए श्रम विभाग से लेकर पीएफ व अन्य कई विभागों में दावा करने में सक्षम हो जाते हैं. इसी भय से अखबार मालिक अपने ग्रामीण संवाददाताओं को संवाददाता लिखने से परहेज करते हैं.

पिछले दिनों सूर्यकान्त मिश्रा की मां का निधन हुआ. ये अमर उजाला के जैतीपुर (शाहजहांपुर) के संवाददाता हैं. सूर्यकांत जमीनी स्तर पर लगातार सरोकारी पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं. मां के निधन पर अमर उजाला के अलावा बाकी सारे अखबारों ने पत्रकार की मां का निधन या संवाददाता को मातृशोक टाइप शीर्षक से खबरें छापी.

लेकिन खुद अमर उजाला ने, जहां सूर्यकांत काम करते हैं, शीर्षक लगाया- ‘संवाद सूत्र को मातृ शोक’.

ये हरकत सूर्यकांत को अंदर तक हिला गई. जिस अखबार के लिए उन्होंने दिन देखा न रात, खतरा देखा न धमकी, उस अखबार ने उन्हें वाजिब सम्मान तक देना उचित नहीं समझा.

स्थानीय लोगों ने भी अमर उजाला की निंदा की और कहा कि देखें, ये है अमर उजाला, इसे अपने रिपोर्टर को पत्रकार लिखने में शर्म आती है. जबकि अन्य अखबारों ने पत्रकार लिखा है. कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि ग्रामीण पत्रकार अपनी जान की बाजी लगाकर, धमकियों की परवाह न करते हुए निष्पक्ष ख़बरें अपने संस्थान को देता है. पर संस्थान में बदले में पैसा रुपया तो छोड़िए, उचित सम्मान तक नहीं देता.

दैनिक जागरण, अमृत विचार समेत अन्य अखबारों में छपी खबर देखें-

दूसरे अखबारों में अपने पत्रकार को पत्रकार लिखा देख शर्म के मारे अगले दिन अमर उजाला ने अपने पत्रकार को पत्रकार लिखा और अपनी ग़लती सुधारते हुए फिर से खबर प्रकाशित की. देखें-

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One comment on “अमर उजाला अपने पत्रकारों को ‘पत्रकार’ बताने में भी डरता है!”

  • bhakt mohan pun says:

    Amar Ujala ea darpok akhabar hai, ginka management taraju or bbnt wale baniye hai, Journilism ka “J” nahin janete malik log, maine dekha hai Court or CLBor CBI ke samene mai inki halat kaise kharab hoti thi, agar mai na hota to aaj Malik jail mai hota.

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